बिहार में 24 घंटे में 40 बच्चों के लापता होने से चिंता

बिहार में बच्चों के लापता होने से जुड़ा आंकड़ा चिंता बढ़ाने वाला है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में महज 24 घंटे के दौरान करीब 40 बच्चों के गायब होने की जानकारी सामने आई है। इनमें लड़कियों की संख्या अधिक बताई जा रही है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस की ओर से लापता बच्चों की तलाश और उनकी सुरक्षित बरामदगी के लिए कार्रवाई की जा रही है। अभिभावकों से भी बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत पुलिस से संपर्क करने की अपील की गई है।
1,375 नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र, CM योगी बोले- बिना भेदभाव मिल रहा गरीबों को हक

लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में सरकारी सेवाओं में नियुक्ति पाने वाले युवाओं के लिए सोमवार को लखनऊ में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1,375 नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सरकार की योजनाओं, कानून व्यवस्था और गरीबों को मिल रही सरकारी सुविधाओं को लेकर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने राशन वितरण व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश के करीब 16 करोड़ लोगों को किसी का चेहरा देखकर राशन नहीं दिया जाता, बल्कि पात्रता के आधार पर लाभ दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति को उसका हक मिलना चाहिए और सरकार इसी व्यवस्था के तहत काम कर रही है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय प्रदेश के कई जिलों में अराजकता का माहौल था और माफिया का प्रभाव बना हुआ था। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उस दौर में माफिया की समानांतर सरकार चलने की स्थिति थी और आम लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता रहती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव आया है। उनके मुताबिक प्रदेश अब कर्फ्यू, दंगा, माफिया और उपद्रव जैसी स्थितियों से मुक्त है। उन्होंने सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता कानून का राज स्थापित करना और आम नागरिक को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना है। नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ निभाने की बात कही। ग्राम पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में इन अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। नियुक्ति पाने वाले अधिकारियों से ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं को पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की अपेक्षा है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने युवाओं को सरकारी सेवा में मिली नई जिम्मेदारी को जनता की सेवा से जोड़ते हुए कार्य करने का संदेश दिया।
मायावती ने EVM और VVPAT को लेकर उठाए सवाल, चुनाव प्रक्रिया पर फिर उठी बहस

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से मतदान की प्रक्रिया को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया है। मायावती ने कहा कि BSP शुरुआत से ही EVM के जरिए मतदान कराने का विरोध करती रही है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ने EVM से जुड़ी चुनाव प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी थी। मायावती के अनुसार, अदालत के समक्ष EVM के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने EVM की व्यवस्था को समाप्त करने के बजाय उसके साथ VVPAT मशीन के इस्तेमाल की प्रक्रिया को लागू करने का निर्देश दिया। VVPAT यानी Voter Verifiable Paper Audit Trail व्यवस्था के तहत मतदाता को यह देखने का अवसर मिलता है कि उसका वोट किस उम्मीदवार के पक्ष में दर्ज हुआ है। BSP प्रमुख ने VVPAT व्यवस्था की मौजूदा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि चुनाव में EVM से मतों की गिनती के दौरान सभी VVPAT पर्चियों की गिनती नहीं की जाती। इसी आधार पर उन्होंने दावा किया कि VVPAT लगाए जाने का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। मायावती के बयान के बाद एक बार फिर भारत में मतदान प्रक्रिया, EVM और VVPAT की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। EVM को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर अपनी चिंताएं और मांगें सामने रखते रहे हैं, जबकि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े संस्थान इलेक्ट्रॉनिक मतदान व्यवस्था और VVPAT के इस्तेमाल को लेकर निर्धारित नियमों के तहत चुनाव कराते हैं। गौरतलब है कि VVPAT व्यवस्था का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज वोट के साथ कागजी सत्यापन का एक माध्यम उपलब्ध कराना है। चुनावों में VVPAT पर्चियों की जांच और गिनती के लिए निर्धारित नियम और प्रक्रियाएं लागू होती हैं। ऐसे में EVM और VVPAT को लेकर किसी भी दावे को समझने के लिए आधिकारिक चुनावी प्रक्रिया और न्यायालय के संबंधित आदेशों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। मायावती के ताजा बयान ने EVM से मतदान और VVPAT सत्यापन के मुद्दे को फिर से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
म्याग्दी में भारी बारिश का कहर, सड़क संपर्क बाधित; जनजीवन प्रभावित

म्याग्दी (नेपाल): नेपाल के म्याग्दी जिले में लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। बारिश के चलते कई इलाकों में सड़क संपर्क बाधित होने से लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। इसके साथ ही परिवहन और अन्य जरूरी सेवाओं पर भी असर पड़ा है। स्थानीय लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क बहाल करने और आवश्यक सेवाओं को सामान्य करने के प्रयास जारी हैं। लोगों से खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की अपील की गई है।
रामेश्वरम में मछुआरों का प्रदर्शन, पिपर और स्टील नावों के लिए परमिट व डीजल सब्सिडी की मांग

तमिलनाडु: रामेश्वरम में मछुआरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मत्स्य विभाग के टोकन कार्यालय के सामने धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी मछुआरों ने पिपर और स्टील से बनी नावों के लिए मछली पकड़ने की अनुमति के टोकन जारी करने तथा डीजल सब्सिडी उपलब्ध कराने की मांग उठाई। मछुआरों का कहना है कि समय के साथ समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से कई लोगों ने अपनी पुरानी लकड़ी की नावों को पिपर और स्टील की नावों में परिवर्तित कराया है। उनका आरोप है कि नावों को आधुनिक स्वरूप देने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा इन संशोधित नावों के लिए आवश्यक फिशिंग परमिट जारी नहीं किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारी मछुआरों के मुताबिक परमिट नहीं मिलने के कारण उन्हें समुद्र में जाकर नियमित रूप से मछली पकड़ने में परेशानी हो रही है। इससे उनकी रोजमर्रा की आय प्रभावित होने के साथ-साथ परिवारों के सामने आर्थिक चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। मछुआरों ने विभाग से मांग की कि नियमों के तहत नावों की जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर जल्द से जल्द उन्हें मछली पकड़ने के टोकन जारी किए जाएं। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने पिपर और स्टील की नावों के लिए डीजल सब्सिडी देने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि समुद्र में मछली पकड़ने के लिए ईंधन पर होने वाला खर्च काफी अधिक है। ऐसे में डीजल सब्सिडी मिलने से मछुआरों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हो सकता है। मांगों को लेकर बड़ी संख्या में मछुआरे मत्स्य विभाग के टोकन कार्यालय पहुंचे और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने विभाग से अपनी समस्याओं का समाधान करने और परमिट जारी करने की प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की। मछुआरों का कहना है कि वे अपनी नावों को आधुनिक बनाने के बाद अब विभागीय अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले में जल्द हस्तक्षेप कर आवश्यक परमिट और डीजल सब्सिडी से जुड़ी मांगों पर उचित कार्रवाई करने की अपील की है।
उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने पर विवाद, पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस

उज्जैन, मध्य प्रदेश: सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण को लेकर उज्जैन की शाही मस्जिद का मामला लगातार गरमाता जा रहा है। मस्जिद के सड़क की प्रस्तावित सीमा में आने वाले हिस्से को हटाने की योजना के विरोध के बीच रविवार को मौके पर बड़ी संख्या में लोग जुट गए। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच झड़प की स्थिति बन गई। इस दौरान पत्थरबाजी की घटना सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों की भी तैनाती की गई। प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। दरअसल, उज्जैन नगर निगम की ओर से सिंहस्थ-2028 को देखते हुए शहर के प्रमुख मार्गों के चौड़ीकरण की योजना पर काम किया जा रहा है। इसी योजना के तहत गोपाल मंदिर रोड को करीब 15 मीटर तक चौड़ा करने का प्रस्ताव है। प्रशासन के अनुसार, सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई के लिए मस्जिद का कुछ हिस्सा प्रभावित हो रहा है। इस कार्रवाई को लेकर मस्जिद प्रबंधन और स्थानीय लोगों की ओर से आपत्ति जताई गई है। मामला अब कानूनी स्तर पर भी पहुंच चुका है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने सितंबर में सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने से जुड़ी याचिकाओं को खारिज किया था। अदालत के आदेश में सड़क चौड़ीकरण को सिंहस्थ-2028 के दौरान यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था से जोड़ते हुए प्रशासन की कार्रवाई का उल्लेख किया गया था। हालांकि, मस्जिद से जुड़े लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थल को बचाते हुए सड़क चौड़ीकरण का कोई वैकल्पिक रास्ता निकाला जाना चाहिए। प्रशासन की ओर से फिलहाल बातचीत के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश की जा रही है। उज्जैन में हुई झड़प के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। प्रशासन की प्राथमिकता शांति बनाए रखना और किसी भी तरह की हिंसक स्थिति को आगे बढ़ने से रोकना है। मामले को लेकर आगे की कार्रवाई स्थानीय प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होने की उम्मीद है।
बिहार की कानून व्यवस्था पर JDU नेता राजीव रंजन का बयान, चिराग पासवान के आरोपों पर दी प्रतिक्रिया

पटना: बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) नेता राजीव रंजन ने चिराग पासवान के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बिहार में कानून व्यवस्था की स्थिति देश के ज्यादातर राज्यों की तुलना में बेहतर है। राजीव रंजन ने अपने बयान में सरकार की ओर से अपराध की घटनाओं के बाद की जाने वाली कार्रवाई का भी उल्लेख किया। JDU नेता के मुताबिक, किसी भी राज्य में घटनाओं का पूरी तरह समाप्त हो जाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर बिहार में कोई आपराधिक घटना सामने आती है, तो प्रशासन और पुलिस की ओर से उसके बाद कार्रवाई की जाती है। उनका कहना है कि कानून व्यवस्था का आकलन केवल घटनाओं की संख्या से नहीं, बल्कि घटनाओं के बाद प्रशासन की कार्रवाई और अपराध पर नियंत्रण के प्रयासों से भी किया जाना चाहिए। राजीव रंजन ने बिहार की वर्तमान सरकार की कानून व्यवस्था नीति को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मॉडल से जोड़ते हुए कहा कि जिस व्यवस्था को नीतीश कुमार के नेतृत्व में आगे बढ़ाया गया था, उसी मॉडल को अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार में भी लागू किया जा रहा है। उनके बयान के बाद बिहार की कानून व्यवस्था एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के नेताओं की ओर से राज्य में अपराध और पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं। ऐसे में चिराग पासवान के बयान पर JDU की यह प्रतिक्रिया राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है। राजीव रंजन ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर है और आपराधिक घटनाओं के बाद कार्रवाई की जा रही है। वहीं, राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों और अन्य राजनीतिक नेताओं के सवाल लगातार सामने आते रहे हैं। फिलहाल, बिहार में कानून व्यवस्था का मुद्दा आगामी राजनीतिक बहसों में भी प्रमुख विषय बना हुआ है। सरकार और विपक्ष के दावों के बीच वास्तविक स्थिति को समझने के लिए आधिकारिक अपराध आंकड़ों और पुलिस कार्रवाई के रिकॉर्ड को देखना महत्वपूर्ण होगा।