SIR को लेकर असीम अरुण का विपक्ष पर निशाना, बोले- हार के बाद EVM और चुनाव आयोग पर उठाते हैं सवाल

कानपुर देहात: उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री असीम अरुण ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनाव में जीत मिलने पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाते, लेकिन हार के बाद EVM और SIR जैसी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल खड़े करने लगते हैं। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि INDI गठबंधन में शामिल दलों की यह आदत बन गई है कि चुनाव जीतने पर उन्हें चुनाव आयोग से कोई शिकायत नहीं रहती, लेकिन परिणाम उनके पक्ष में नहीं आने पर EVM और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने SIR की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताते हुए कहा कि इसमें लोगों को अपनी आपत्ति और बात रखने के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए। असीम अरुण के मुताबिक, SIR के दौरान मतदाताओं को कई बार अपनी जानकारी दुरुस्त कराने और संबंधित दावे या आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया गया। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक व्यवस्थित और त्रुटिरहित बनाना है। ‘वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों का फायदा उठाती थीं पार्टियां’ मंत्री ने विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लंबे समय से मतदाता सूची में मौजूद कथित गड़बड़ियों का राजनीतिक दल अपने हित में इस्तेमाल करते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि SIR के बाद ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी और राजनीतिक दलों को इसका लाभ उठाने का मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को लेकर अपनाई जा रही प्रक्रिया से विरोधी दल परेशान हैं, क्योंकि अब चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। असीम अरुण का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। विपक्ष जहां SIR की प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं और सवाल सामने रख रहा है, वहीं सरकार इसे मतदाता सूची को दुरुस्त करने और चुनावी प्रक्रिया को मजबूत बनाने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है। इस पूरे मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियां तेज, परिक्रमा को लेकर प्रशासन ने कसी कमर

अयोध्या, उत्तर प्रदेश: भगवान राम की नगरी अयोध्या में आगामी दीपोत्सव और पंचकोषी व चौदह कोषी परिक्रमा को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने बताया कि दीपोत्सव के आयोजन में अब करीब एक महीने का समय ही शेष रह गया है। ऐसे में तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि आयोजन को बेहतर और व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार समन्वय बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसके साथ ही अधिकारियों की टीम अलग-अलग स्थानों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रही है। संबंधित विभागों के बीच तालमेल बनाकर तैयारियों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। दीपोत्सव को लेकर तैयारियां तेज अयोध्या में दीपोत्सव एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इस अवसर पर अयोध्या पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने आयोजन को सुचारु रूप से संचालित करने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी रहती है। जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने उम्मीद जताई कि इस बार भी दीपोत्सव का आयोजन बेहतर तरीके से संपन्न कराया जाएगा। इसके लिए प्रशासन सभी जरूरी व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा करने में जुटा है। पंचकोषी और चौदह कोषी परिक्रमा पर भी फोकस दीपोत्सव के साथ अयोध्या की पंचकोषी परिक्रमा और चौदह कोषी परिक्रमा भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण आयोजन हैं। इन धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना रहती है। इसे देखते हुए मार्गों, सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी तैयारियों को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और सभी धार्मिक आयोजनों का संचालन शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित तरीके से कराया जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि तैयारियों को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा की जा रही है। प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार दीपोत्सव के साथ दोनों प्रमुख परिक्रमा भी सफलतापूर्वक आयोजित होंगी।
दिल्ली AI वीडियो विवाद पर प्रदीप भंडारी का राहुल गांधी पर निशाना, उठाए कई सवाल

नई दिल्ली: दिल्ली में महिला पत्रकार से कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर चल रहे विवाद के बीच भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस वीडियो के आधार पर दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर सवाल उठाए गए, वह वास्तविक वीडियो नहीं बल्कि AI की मदद से तैयार किया गया था। प्रदीप भंडारी ने कहा कि राहुल गांधी की ओर से सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर पोस्ट किए जाने के बाद कांग्रेस से जुड़े लोगों ने भी वीडियो को व्यापक स्तर पर साझा किया। उनके मुताबिक, बाद में दिल्ली पुलिस की जांच में वीडियो के कथित तौर पर फर्जी और AI-generated होने की बात सामने आई। AI से बनाए गए वीडियो का दावा दिल्ली पुलिस ने 6 अक्टूबर को बताया कि उसने 24 वर्षीय नदीम अहमद को कथित रूप से एक हेरफेर किए गए वीडियो को बनाने और प्रसारित करने के मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, वीडियो में ACP विवेक भगत को महिला के साथ अनुचित व्यवहार करते हुए दिखाया गया था और इसे वास्तविक CCTV फुटेज जैसा प्रस्तुत किया गया। पुलिस का कहना है कि तकनीकी जांच में वीडियो के AI-generated होने की पुष्टि हुई। प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस से मांगा स्पष्टीकरण भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का पूरा इको-सिस्टम इस वीडियो को लेकर एक नैरेटिव बनाने में सक्रिय रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वीडियो फर्जी साबित हुआ है तो राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से इस पर स्पष्टीकरण क्यों नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने इसे कांग्रेस की राजनीति के एक कथित पैटर्न से जोड़ते हुए कहा कि फर्जी सूचनाओं के जरिए लोकतांत्रिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, यह प्रदीप भंडारी का राजनीतिक आरोप है, जिसे स्वतंत्र तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। महिला पत्रकारों के आरोपों की अलग जांच इस पूरे विवाद में यह भी महत्वपूर्ण है कि महिला पत्रकारों ने 3 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन शिकायतों को आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। यानी AI वीडियो के फर्जी होने की पुलिस जांच और महिला पत्रकारों की वास्तविक शिकायतों की जांच अलग-अलग मामले हैं। प्रदीप भंडारी ने इसी संदर्भ में राहुल गांधी और कांग्रेस से सवाल किया कि कथित फर्जी वीडियो के सामने आने के बाद क्या वे इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे।
पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने कोर्ट की तारीखों को लेकर उठाए सवाल

बलिया: भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के बीच चल रहा पारिवारिक विवाद एक बार फिर चर्चा में है। बलिया परिवार न्यायालय में चल रहे मामले को लेकर ज्योति सिंह ने पवन सिंह की कोर्ट में मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं। ज्योति सिंह का कहना है कि पवन सिंह लगातार चार बार कोर्ट की तारीख पर उपस्थित नहीं हुए, जबकि वह खुद महिला होने के बावजूद हर सुनवाई की तारीख पर अदालत पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि वह न्यायिक प्रक्रिया में अपनी ओर से पूरी जिम्मेदारी निभा रही हैं और हर तारीख पर उपस्थित होती हैं। ज्योति सिंह ने अपनी सास से मिलने की इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी सास से मिलने का मन करता है, लेकिन पिछली घटना के कारण उनके मन में डर बना हुआ है। इसी वजह से वह उनसे मिलने को लेकर सहज महसूस नहीं कर पा रही हैं। यह मामला बलिया परिवार न्यायालय में विचाराधीन है। ज्योति सिंह के बयान के बाद एक बार फिर पवन सिंह और उनके पारिवारिक विवाद को लेकर चर्चा तेज हो गई है। गौरतलब है कि मामले में दोनों पक्षों की अपनी-अपनी बातें हैं और अंतिम स्थिति अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
रोहतास में विकास परियोजनाओं को मिली रफ्तार, सासाराम बाईपास का लोकार्पण

रोहतास: जिले में विकास कार्यों को गति देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए। शिवसागर प्रखंड की करूप पंचायत स्थित पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। 🔴 पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में खगोल विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, करूप में निर्मित खगोल विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया गया। इस प्रयोगशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों को व्यावहारिक तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों में वैज्ञानिक सोच और नई तकनीकों के प्रति रुचि बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। 🔴 सेवा सेतु अभियान और सहयोग शिविर कार्यक्रम में सेवा सेतु अभियान एवं सहयोग शिविर से जुड़ी गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य लोगों तक सरकारी योजनाओं और जनकल्याणकारी सेवाओं की जानकारी पहुंचाने के साथ उन्हें योजनाओं का लाभ लेने में सहायता उपलब्ध कराना रहा। 🔴 सासाराम बाईपास परियोजना का लोकार्पण रोहतास दौरे के दौरान सासाराम बाईपास परियोजना का लोकार्पण भी किया गया। इस परियोजना से शहर के भीतर वाहनों के दबाव को कम करने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। खासकर भारी वाहनों के आवागमन को शहर के बाहरी हिस्से से गुजरने का विकल्प मिलने से जाम की समस्या में राहत की संभावना है। 🔴 बेदा फ्लाईओवर का लिया जायजा इसके अलावा बेदा फ्लाईओवर का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान निर्माण और विकास कार्यों की स्थिति को देखा गया तथा परियोजना की प्रगति का जायजा लिया गया। 🔴 कायाकल्प अभियान के तहत पोखर का निरीक्षण दौरे के दौरान ‘कायाकल्प अभियान’ के तहत जीर्णोद्धार किए गए पोखर का भी निरीक्षण किया गया। इस दौरान जलस्रोत के विकास और आसपास किए गए कार्यों की स्थिति देखी गई। ऐसे कार्यों से स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, रोहतास दौरे में शिक्षा, सड़क, यातायात, जल संरक्षण और जनकल्याण से जुड़ी कई योजनाओं पर जोर दिया गया। इन परियोजनाओं के जरिए जिले में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और आम लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
ECI के खिलाफ विपक्ष के मार्च पर महुआ माजी का बयान, बोलीं- सवाल उठे हैं तो जवाब भी जरूरी

रांची, झारखंड: चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी सांसदों के विरोध मार्च को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी ने विपक्ष के रुख का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन का प्रदर्शन चुनाव आयोग के मुख्यालय तक पहुंचने के उद्देश्य से किया गया था। विपक्ष की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, क्योंकि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। महुआ माजी ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को अपनी बात रखने और सरकार या संवैधानिक संस्थाओं से सवाल पूछने का अधिकार है। उनके मुताबिक, जब चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, तो उन सवालों का जवाब भी सामने आना चाहिए। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल का दावा JMM सांसद ने अपने बयान में SIR यानी Special Intensive Revision से जुड़े फैसलों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्यों की ओर से यह बात सामने आई है कि उनकी अनुमति के बिना करीब 10 महीने के दौरान SIR से संबंधित 14 फैसले लिए गए। महुआ माजी के अनुसार, अगर चुनाव आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्था की निर्णय प्रक्रिया को लेकर ही सवाल खड़े हो रहे हैं, तो विपक्ष का विरोध करना स्वाभाविक है। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए दावों और फैसलों को लेकर संबंधित पक्षों की आधिकारिक स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। ‘लोकतांत्रिक तरीके से विरोध नहीं करेंगे तो क्या करेंगे?’ महुआ माजी ने कहा कि विपक्षी दल अगर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी असहमति दर्ज नहीं कराएंगे तो फिर उनके पास अपनी बात जनता और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाने का क्या रास्ता बचेगा। उन्होंने विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच ECI की विश्वसनीयता, SIR और चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, जबकि इन आरोपों और मांगों पर चुनाव आयोग का पक्ष भी इस विवाद में अहम रहेगा।
अति पिछड़ा वर्ग आयोग की मांग को लेकर आम जनता पार्टी राष्ट्रीय का पटना में धरना, सरकार को आंदोलन की चेतावनी

पटना: अति पिछड़ा वर्ग के अधिकारों और उनकी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर आम जनता पार्टी राष्ट्रीय ने पटना में धरना-प्रदर्शन किया। पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, यह प्रदर्शन अति पिछड़ा अत्याचार निवारण आयोग के गठन की मांग को लेकर आयोजित किया गया। पार्टी ने आरोप लगाया कि अति पिछड़ा वर्ग के लोगों के साथ अपराध और उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए अलग से प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है। प्रदर्शन के दौरान सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की गई। धरना में उठाए गए प्रमुख मुद्दे अति पिछड़ा अत्याचार निवारण आयोग के गठन की मांग। अति पिछड़ा वर्ग से जुड़े आपराधिक मामलों की अलग से निगरानी और आंकड़े तैयार करने की मांग। सरकार से अति पिछड़ा समाज के खिलाफ होने वाली घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील। पार्टी ने कहा कि आयोग बनने से इस वर्ग से जुड़े मामलों की निगरानी और समाधान के लिए एक विशेष संस्थागत व्यवस्था तैयार हो सकेगी। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विद्यापति चन्द्रवंशी ने धरना स्थल पर कहा कि अति पिछड़ा समाज के साथ होने वाली आपराधिक घटनाओं और अत्याचार के मामलों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अति पिछड़ा वर्ग के लिए प्रस्तावित आयोग का गठन जल्द किया जाए। पार्टी ने यह भी कहा कि वर्तमान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित अपराधों के आंकड़े अलग से दर्ज किए जाते हैं, उसी तरह अति पिछड़ा वर्ग से जुड़े अपराधों का भी अलग रिकॉर्ड तैयार करने की व्यवस्था होनी चाहिए। पार्टी का तर्क है कि इससे इस वर्ग से जुड़े मामलों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और प्रभावी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। धरना कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारी, बिहार प्रदेश के नेता, महिला मोर्चा की पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। पार्टी ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार उनकी मांग पर जल्द निर्णय नहीं लेती है, तो आगे सड़क पर आंदोलन और मुख्यमंत्री के घेराव जैसे कार्यक्रम किए जा सकते हैं।
उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान: CEC के खिलाफ जारी रहेगा विरोध, UCC पर भी साफ किया रुख

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चुनाव आयोग, मतदाता सूची और यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि INDIA ब्लॉक के सांसदों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ शुरू किया गया विरोध आगे भी जारी रहेगा। उमर अब्दुल्ला ने यह बात ऐसे समय कही है, जब विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि आज INDIA ब्लॉक के सांसदों ने CEC के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। उन्होंने संकेत दिया कि यह विरोध यहीं खत्म होने वाला नहीं है और आगे भी जारी रहेगा। उनके मुताबिक, विपक्ष की मुख्य चिंता इस बात को लेकर है कि मतदाता सूची से लोगों के नाम किस आधार पर हटाए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। ऐसे में मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया और उसके आधार को लेकर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची बेहद महत्वपूर्ण होती है और इससे जुड़े सवालों का जवाब मिलना चाहिए। UCC पर भी उमर अब्दुल्ला का स्पष्ट रुख उमर अब्दुल्ला ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर भी अपनी सरकार और जम्मू-कश्मीर का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कोई कानून तब तक वास्तव में ‘यूनिफॉर्म’ नहीं माना जा सकता, जब तक वह हर जगह समान रूप से लागू न हो। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जम्मू-कश्मीर में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर संसद में व्यापक चर्चा की जरूरत बताई। उमर अब्दुल्ला के मुताबिक, इतने महत्वपूर्ण विषय पर देश के सर्वोच्च सदन में गंभीर बहस होनी चाहिए। उनके बयान से साफ है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और UCC जैसे मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक बहस के प्रमुख विषय बने रह सकते हैं। विपक्ष जहां चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठा रहा है, वहीं UCC को लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लगातार सामने आ रहे हैं।
पश्चिम बंगाल उपचुनाव पर मंत्री राम कृपाल यादव का बड़ा दावा, बोले- दोनों सीटों पर BJP की होगी जीत

पटना: पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनाव को लेकर बिहार सरकार के मंत्री राम कृपाल यादव ने बड़ा राजनीतिक दावा किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जिन दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहा है, वहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में नतीजे आने की पूरी संभावना है। मंत्री राम कृपाल यादव ने पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति पर अपनी राय रखी। उन्होंने दावा किया कि दोनों उपचुनाव वाली सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में जाएंगी। उनके मुताबिक, इन सीटों पर BJP के सामने फिलहाल कोई मजबूत राजनीतिक चुनौती दिखाई नहीं दे रही है। ‘दोनों सीट BJP के खाते में रहेंगी’ राम कृपाल यादव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में दो सीटों पर उपचुनाव हो रहा है और दोनों सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में रहेंगी। उन्होंने अपने बयान में विपक्षी दलों की स्थिति पर भी सवाल उठाया। मंत्री ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस का प्रभाव इन सीटों पर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि चुनावी मुकाबले में इन दोनों दलों की कोई खास स्थिति नहीं है और BJP को जीत हासिल करने में परेशानी नहीं होगी। चुनावी नतीजों पर टिकी नजर पश्चिम बंगाल में उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। ऐसे में राम कृपाल यादव का यह बयान चुनावी माहौल में राजनीतिक चर्चा को और बढ़ा सकता है। हालांकि, किस दल को जनता का समर्थन मिलेगा, इसका अंतिम फैसला चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा। उपचुनाव के दौरान राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार तेज कर रहे हैं। ऐसे में नेताओं के दावों और जमीनी स्थिति के बीच कितना अंतर है, यह चुनाव के बाद सामने आएगा। फिलहाल, राम कृपाल यादव के बयान ने पश्चिम बंगाल के उपचुनाव को लेकर सियासी बहस को जरूर तेज कर दिया है। BJP जहां जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है, वहीं अन्य दलों की रणनीति और मतदाताओं का रुख चुनाव परिणाम के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
300 सांसदों को क्यों रोका गया? राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब करीब 300 लोकसभा और राज्यसभा सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके दो सहयोगियों से मिलने के लिए आगे बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। राहुल गांधी ने कहा कि सांसद देश के जनप्रतिनिधि हैं और जनता की आवाज को संसद तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में सांसदों को रोकने का कारण स्पष्ट नहीं किया गया। 300 सांसदों को रोकने पर सवाल राहुल गांधी के मुताबिक, विपक्ष के सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन उन्हें चुनाव आयोग के कार्यालय तक जाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 300 सांसदों को वहां जाने से क्यों रोका गया? उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल सांसदों को पुलिस ने एक स्थान पर बैठा दिया और चुनाव आयोग का कार्यालय वहां से महज करीब 50 गज की दूरी पर है। इसके बावजूद उन्हें आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी जा रही है। ‘हम देश की आवाज का प्रतिनिधित्व करते हैं’ राहुल गांधी ने कहा कि सांसद केवल किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि वे देश के लोगों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं। उनके मुताबिक, जब इतने सांसद किसी संवैधानिक संस्था के प्रमुख से मिलने की इच्छा जाहिर कर रहे हैं, तो उन्हें मिलने का अवसर दिया जाना चाहिए। राहुल गांधी ने अपने बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार डरे हुए हैं। हालांकि, यह राहुल गांधी का राजनीतिक बयान और आरोप है, जिस पर चुनाव आयोग की ओर से प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। चुनाव आयोग को लेकर बढ़ी सियासी हलचल इस पूरे घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है। विपक्ष लगातार चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश के तौर पर देखता रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग राहुल गांधी और विपक्षी सांसदों के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।