JNU यौन उत्पीड़न मामला नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद रूप कुमारी चौधरी के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की चेयरपर्सन विजया के. रहाटकर से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा।
NCW की चेयरपर्सन से मुलाकात कर सौंपा ज्ञापन
मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा महिला मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने JNU में सामने आए कथित यौन उत्पीड़न के मामले को गंभीरता से उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रमुख विजया के. रहाटकर के समक्ष अपनी मांगें रखीं और मामले में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।
इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य कथित घटना के संबंध में संबंधित पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग को आयोग तक पहुंचाना था। हालांकि, इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इसे लेकर आयोग की ओर से किसी आधिकारिक निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
रूप कुमारी चौधरी के नेतृत्व में पहुंचा प्रतिनिधिमंडल
भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद रूप कुमारी चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। महिला मोर्चा के नेताओं ने कथित यौन उत्पीड़न के मामले को उठाते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग से इस पर संज्ञान लेने और नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की।
महिला सुरक्षा और यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में शिकायतों की निष्पक्ष जांच तथा उचित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
अब आयोग के कदम पर नजर
इस घटनाक्रम के बाद अब राष्ट्रीय महिला आयोग की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। प्रतिनिधिमंडल की ओर से ज्ञापन सौंपे जाने के बाद मामले में आयोग क्या प्रक्रिया अपनाता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट हो सकता है।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट है कि भाजपा महिला मोर्चा ने कथित JNU यौन उत्पीड़न मामले को लेकर कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। मामले से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
महत्वपूर्ण: यह मामला आरोपों से संबंधित है। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोप को जांच या सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष से पहले सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।