बिहार में गंडक का कहर, चंपारण में 4 जगह तटबंध टूटे; 200 गांव बाढ़ की चपेट में

चंपारण: बिहार में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने पश्चिम चंपारण और आसपास के इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई जगह तटबंध टूटने के बाद बाढ़ का पानी तेजी से गांवों और रिहायशी इलाकों में फैल रहा है। बताया जा रहा है कि करीब 200 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन और राहत-बचाव टीमों की सक्रियता बढ़ा दी गई है। जानकारी के मुताबिक, चंपारण इलाके में गंडक के दबाव के कारण चार स्थानों पर तटबंध टूटने की बात सामने आई है। तटबंध टूटने के बाद बड़ी मात्रा में पानी आसपास के इलाकों में पहुंच गया। कई गांवों में घरों के आसपास पानी जमा है, जबकि ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की जरूरत पड़ रही है। कई गांवों में बढ़ी परेशानी बाढ़ के पानी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन भी प्रभावित हुआ है। कई सड़कों पर पानी चढ़ने से लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। खेतों में पानी भरने से फसलों को भी नुकसान की आशंका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ रहे पानी के कारण स्थिति पहले की तुलना में ज्यादा गंभीर होती जा रही है। ट्रेन सेवाओं पर भी असर चंपारण क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति का असर रेल परिचालन पर भी पड़ा है। जलभराव और सुरक्षा कारणों को देखते हुए कुछ ट्रेनों को रद्द करने की जानकारी सामने आई है। इससे यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। रेल प्रशासन की ओर से प्रभावित रेलखंडों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। सीएम सम्राट चौधरी करेंगे हवाई सर्वेक्षण बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज चंपारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण करेंगे। इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों, टूटे तटबंधों और जलभराव की स्थिति का जायजा लिया जाएगा। मुख्यमंत्री के हवाई सर्वेक्षण के बाद राहत और बचाव कार्यों को लेकर आगे की रणनीति पर भी फैसला लिया जा सकता है। राहत और बचाव पर नजर बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने की कोशिश की जा रही है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, भोजन और जरूरी सामान उपलब्ध कराने के साथ-साथ संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जा रही है। गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर और तटबंध टूटने से चंपारण में स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर प्रभावित लोगों की ओर से राहत कार्यों को और तेज करने की मांग की जा रही है। वहीं, बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर अतिरिक्त सहायता की मांग भी उठ रही है।