दिल्ली में फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, 9 आरोपी गिरफ्तार

AI और फोटोशॉप की मदद से मेडिकल रिपोर्ट में करते थे हेरफेर, दिव्यांगता प्रमाणपत्र जनरेशन पोर्टल पर अपलोड कर तैयार करते थे फर्जी दस्तावेज नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र तैयार करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दिल्ली और उत्तर प्रदेश से कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और फोटोशॉप जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर मेडिकल रिपोर्ट में बदलाव करते थे। इसके बाद इन दस्तावेजों को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जनरेशन पोर्टल पर अपलोड करके कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए जाते थे। उत्तरी जिले की डीसीपी निहारिका भट्ट ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने दिल्ली और यूपी में कार्रवाई कर गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान कई ऐसे प्रमाणपत्र सामने आए हैं, जिनकी सत्यता की पड़ताल की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस मामले में आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। AI और फोटोशॉप से मेडिकल रिपोर्ट में करते थे बदलाव पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य तकनीक का दुरुपयोग कर मेडिकल दस्तावेजों में कथित तौर पर हेरफेर करते थे। इसके लिए नाम और जन्मतिथि जैसी जानकारियों को बदला जाता था। इसके बाद संशोधित मेडिकल रिपोर्ट को दिव्यांगता प्रमाणपत्र जनरेशन पोर्टल पर अपलोड किया जाता था, ताकि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए जा सकें। इस पूरे मामले में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल की बात सामने आने के बाद जांच एजेंसियां दस्तावेजों की प्रामाणिकता और उनकी तैयारी की प्रक्रिया की जांच कर रही हैं। कई प्रमाणपत्र जांच के दायरे में डीसीपी निहारिका भट्ट के मुताबिक, पुलिस को कई संदिग्ध प्रमाणपत्र मिले हैं। इन सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से तैयार किए गए और इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है। जांच के दौरान गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित फर्जीवाड़े में कौन-कौन शामिल था और दस्तावेजों को तैयार करने के लिए किन तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। आगे भी हो सकती हैं गिरफ्तारियां फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है। बरामद प्रमाणपत्रों की सत्यता की पुष्टि और पूरे नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के बयान के अनुसार, जांच का दायरा बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। यह मामला दिखाता है कि AI और डिजिटल एडिटिंग जैसे आधुनिक उपकरणों का गलत इस्तेमाल करके आधिकारिक दस्तावेजों में हेरफेर करने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कश्मीरी गेट मर्डर केस का खुलासा, रिश्तेदार ही निकला मुख्य आरोपी

नई दिल्ली: कश्मीरी गेट इलाके में हुई हत्या और लूट की वारदात की गुत्थी पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की DCP निहारिका भट्ट के मुताबिक, मामले में मृतक प्रभात का रिश्तेदार ओम मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आया है। पुलिस के अनुसार, ओम को प्रभात के रोजाना के आने-जाने और पैसों से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी थी। DCP निहारिका भट्ट ने बताया कि ओम को पता था कि प्रभात हर शाम गांधीनगर से काफी मात्रा में नकदी लेकर चांदनी चौक की ओर जाता था। इसी जानकारी को आधार बनाकर कथित तौर पर लूट की साजिश रची गई। पुलिस के मुताबिक, ओम ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए अपने कुछ साथियों को झांसी और कानपुर से दिल्ली बुलाया था। पुलिस अधिकारी के अनुसार, इस पूरी साजिश में कुल सात युवक शामिल थे। आरोप है कि 26 तारीख की शाम इन लोगों ने ऑटो रिक्शा को रास्ते में रोककर लूट की कोशिश की। इसी दौरान स्थिति बिगड़ गई और प्रभात की हत्या कर दी गई। पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों को प्रभात के पास मौजूद रकम और उसके नियमित रूट की जानकारी थी। इसी वजह से वारदात को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम देने की आशंका जताई जा रही है। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों की भूमिका और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं को भी खंगाला। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि करीबी लोगों को किसी व्यक्ति की रोजमर्रा की गतिविधियों और आर्थिक लेनदेन की जानकारी किस तरह अपराध की वजह बन सकती है। हालांकि, पुलिस की जांच अभी जारी है और मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात की पूरी योजना कब और कैसे बनाई गई थी, सभी आरोपी एक-दूसरे के संपर्क में कैसे आए और घटना के बाद उन्होंने क्या किया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।