BIHAR RAJNITI NEWS: प्रशांत किशोर की सफाई, बोले- CM सम्राट चौधरी के खिलाफ मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया

प्रशांत किशोर का सम्राट चौधरी पर बयान: पटना, बिहार: बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर के बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर दिए गए अपने कथित विवादित बयान पर सफाई दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और ऐसी बातें उनके नाम से जोड़ी जा रही हैं, जिन्हें उन्होंने कहा ही नहीं। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि उनके बयान का गलत अर्थ निकालने से वास्तविक बात लोगों तक नहीं पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि जो बात उन्होंने कही ही नहीं, उसे उनके मुंह में नहीं डाला जाना चाहिए। उनके इस स्पष्टीकरण के बाद बिहार की सियासत में बयानबाजी को लेकर चर्चा और तेज होने की संभावना है। बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का लगाया आरोप प्रशांत किशोर ने अपने पक्ष को रखते हुए कहा कि किसी भी बयान को उसके पूरे संदर्भ में समझना जरूरी है। उनके मुताबिक, किसी बात को चुनिंदा तरीके से पेश करने या उसका अर्थ बदलने से लोगों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है। उन्होंने अपने कथित विवादित बयान को लेकर फैल रही चर्चाओं पर आपत्ति जताई और अपनी बात स्पष्ट करने की कोशिश की। सम्राट चौधरी पर आरोप दोहराने से बढ़ी सियासी चर्चा इस पूरे मामले में खास बात यह है कि सफाई देने के बावजूद प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर अपने पहले के कड़े आरोपों को दोहराया। यानी उन्होंने एक तरफ अपने बयान को गलत तरीके से पेश किए जाने का विरोध किया, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री को लेकर अपना राजनीतिक रुख भी बरकरार रखा। इस घटनाक्रम को बिहार की मौजूदा राजनीतिक बयानबाजी के संदर्भ में देखा जा रहा है। प्रशांत किशोर और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से जुड़ा यह मामला राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है। राजनीतिक बयानबाजी पर टिकी निगाहें प्रशांत किशोर की सफाई के बाद अब इस मामले में आगे आने वाली प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी। हालांकि, उनके आरोपों और बयान को लेकर किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित पक्षों की विस्तृत प्रतिक्रिया और मूल बयान का संदर्भ देखना जरूरी है। फिलहाल, प्रशांत किशोर का मुख्य संदेश यही है कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश न किया जाए, जबकि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर उनके आरोपों पर उनका रुख बरकरार है।

प्रशांत किशोर का चुनाव आयोग पर हमला, बोले- पारदर्शिता आने तक जारी रहेगा विरोध

पटना: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को उचित बताते हुए कहा कि केवल किसी एक अधिकारी को पद से हटाने से चुनावी व्यवस्था में सुधार नहीं होगा। इसके लिए पूरी चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना जरूरी है। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि पिछले 8 से 10 वर्षों में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने, चुनाव कार्यक्रम तय करने, पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और मतगणना की प्रक्रिया पर चिंता जताई। इसके साथ ही उन्होंने आदर्श आचार संहिता के कथित चयनात्मक पालन का मुद्दा भी उठाया। 10 हजार रुपये बांटने के आरोप पर आयोग को घेरा जन सुराज नेता ने बिहार में मतदान से पहले मतदाताओं को 10-10 हजार रुपये बांटे जाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि ऐसी गतिविधियों पर चुनाव आयोग की भूमिका प्रभावी नजर नहीं आ रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती है। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि जब तक चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में मतदाताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। विधान परिषद चुनाव में शिक्षक और रोजगार बने मुद्दे प्रशांत किशोर ने विधान परिषद चुनाव को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस बार शिक्षक और स्नातक मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। उनके अनुसार, मतदाताओं के बीच जातिगत समीकरणों के बजाय शिक्षकों के लिए सातवें वेतनमान और स्नातकों के लिए रोजगार जैसे सवाल चर्चा में हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव में अब केवल पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों की बात नहीं हो रही, बल्कि मतदाता अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दे रहे हैं। NDA उम्मीदवारों को हराने की अपील प्रशांत किशोर ने कहा कि मतदान में लगभग 10 दिन शेष रहने के बीच सत्तारूढ़ पक्ष की बेचैनी बढ़ रही है। जन सुराज का मानना है कि यदि NDA उम्मीदवारों को चुनाव में हार का सामना करना पड़ता है, तो शिक्षकों और स्नातकों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक स्तर पर अधिक मजबूती से उठाया जा सकेगा। फिलहाल, चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर प्रशांत किशोर के बयान ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। चुनाव के नतीजे और मतदाताओं का रुख आने वाले दिनों में इस राजनीतिक बहस की दिशा तय करेंगे।