पुनपुन नदी के जमींदारी बांध की मरम्मत की मांग, रविशंकर प्रसाद ने CM सम्राट चौधरी को लिखा पत्र

पटना। पटना साहिब के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिहार में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर पुनपुन नदी के पुराने जमींदारी बांध की तत्काल मरम्मत और उसकी ऊंचाई बढ़ाने की मांग की है। सांसद ने इस संबंध में बिहार के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी को भी पत्र लिखकर त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया है। रविशंकर प्रसाद ने अपने पत्र में बताया कि गंगा, दरधा और अन्य सहयोगी नदियों में आई बाढ़ के कारण वे पिछले कई दिनों से अपने संसदीय क्षेत्र के विभिन्न इलाकों का दौरा कर रहे हैं और बाढ़ प्रभावित लोगों की स्थिति का जायजा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के दौरे के दौरान पुनपुन नदी के पुराने जमींदारी बांध की स्थिति बेहद चिंताजनक सामने आई है। सांसद के अनुसार, पिछले करीब 25 से 30 वर्षों से इस पुराने जमींदारी बांध की समुचित मरम्मत नहीं हुई है। लंबे समय से रखरखाव के अभाव में बांध कई स्थानों पर कमजोर हो गया है और इसकी ऊंचाई भी पहले की तुलना में कम हो गई है। बाढ़ के दौरान पुनपुन और दरधा नदियों के बढ़े जलस्तर से बांध पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिसके कारण कई जगह टूटने की स्थिति बनती है और आसपास के गांवों में पानी फैल जाता है। रविशंकर प्रसाद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ फतुहा और पुनपुन नदी से जुड़े क्षेत्रों में पुराने जमींदारी बांधों की स्थायी मरम्मत कराई जाए। साथ ही बांध की ऊंचाई बढ़ाने की दिशा में भी तत्काल कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में बाढ़ के दौरान ग्रामीण इलाकों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इसके अलावा सांसद ने गौरीचक से अलावलपुर और जमुनापुर जाने वाले मार्ग की ऊंचाई बढ़ाने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान यह रास्ता डूब जाने से लोगों का आवागमन प्रभावित होता है। ऐसे में सड़क की ऊंचाई बढ़ाने से स्थानीय लोगों को आवागमन में राहत मिल सकती है। सांसद रविशंकर प्रसाद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी से पूरे मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है, ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को राहत मिल सके और भविष्य में जलभराव एवं बांध टूटने की समस्या को कम किया जा स
12 दिन बाद भी जलप्रलय के निशान, गंडक बराज और त्रिवेणी संगम से तीन शव बरामद

बगहा/वाल्मीकिनगर। नेपाल के रसुआ में 26 अगस्त को लैंडस्लाइड के बाद आए भीषण सैलाब के 12 दिन बाद भी तबाही के निशान लगातार सामने आ रहे हैं। इंडो-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकिनगर गंडक बराज और त्रिवेणी संगम तट से तीन शव बरामद किए गए हैं। दो शव त्रिवेणी संगम तट से मिले, जबकि एक शव गंडक बराज के फाटक नंबर 4 और 5 के बीच फंसा हुआ था। जानकारी के मुताबिक, सैलाब के दौरान गंडक बराज के सभी 36 फाटक उठा दिए गए थे। सोमवार को फाटक डाउन किए जाने के बाद एक शव फाटक के बीच फंसा दिखाई दिया। सूचना मिलने पर नेपाल APF और पुलिस के जवान मौके पर पहुंचे। इसके बाद संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर शव को बाहर निकाला गया। इधर, त्रिवेणी संगम तट के पास दो शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही नेपाली सुरक्षा बलों और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और दोनों शवों को नदी से बाहर निकाला। बरामद तीनों शवों की फिलहाल पहचान नहीं हो सकी है। नेपाली पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम समेत आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। शवों की पहचान के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि 26 अगस्त को नेपाल के रसुआ में लैंडस्लाइड के बाद आए सैलाब ने भारी तबाही मचाई थी। त्रिशूली नदी में आया उफान नारायणी-गंडक नदी के रास्ते भारत तक पहुंचा था। भारतीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन निचले इलाकों में गंडक नदी का पानी अब भी परेशानी का कारण बना हुआ है। इससे पहले भी बगहा इलाके में शव बरामद किए जा चुके हैं। लगातार मिल रहे शव नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा की भयावहता को बयां कर रहे हैं। फिलहाल नेपाली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां शवों की पहचान और हादसे से जुड़े तथ्यों की जांच में जुटी हैं।