BIHAR NEWS:राघोपुर में एंबुलेंस की ऑक्सीजन व्यवस्था पर भड़कीं मीसा भारती, ड्राइवर से बोलीं- हम डॉक्टर की पढ़ाई किए हैं, हम झूठ बोल रहे हैं?

मीसा भारती राघोपुर एंबुलेंस मामला राघोपुर, बिहार: बिहार के राघोपुर में एंबुलेंस के अंदर ऑक्सीजन की व्यवस्था को लेकर सांसद मीसा भारती नाराज हो गईं। एंबुलेंस की स्थिति देखने के दौरान उनकी ड्राइवर से तीखी बातचीत हुई। इस दौरान मीसा भारती ने अपनी मेडिकल पढ़ाई का हवाला देते हुए ड्राइवर से सवाल किया। उनका बयान अब स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर चर्चा का विषय बन सकता है। एंबुलेंस में ऑक्सीजन की स्थिति देखकर नाराज हुईं सांसद मिली जानकारी के अनुसार, राघोपुर में एंबुलेंस के अंदर ऑक्सीजन की व्यवस्था देखने के दौरान मीसा भारती ने अपनी नाराजगी जाहिर की। मौके पर मौजूद एंबुलेंस चालक के साथ उनकी बातचीत तीखी हो गई। सांसद ने ऑक्सीजन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और ड्राइवर के जवाब पर असहमति जताई। इस दौरान मीसा भारती ने कहा, “हम डॉक्टर का पढ़ाई किए हैं, हम झूठ बोल रहे हैं और आप ड्राइवर होकर सही बोल रहे हैं।” उनके इस बयान से साफ था कि वह एंबुलेंस में ऑक्सीजन की स्थिति को लेकर संतुष्ट नहीं थीं। स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल एंबुलेंस किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। ऐसे में उसमें ऑक्सीजन सहित जरूरी चिकित्सा सुविधाओं का सही तरीके से काम करना बेहद जरूरी है। खासकर गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाते समय ऑक्सीजन की उपलब्धता और उसकी कार्यशील स्थिति काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। राघोपुर में सामने आए इस घटनाक्रम ने एंबुलेंस में उपलब्ध सुविधाओं की जांच और उनकी नियमित निगरानी की जरूरत को फिर से चर्चा में ला दिया है। हालांकि, ऑक्सीजन सिस्टम में वास्तविक तकनीकी खराबी थी या व्यवस्था को लेकर कोई अन्य विवाद हुआ, इसकी पुष्टि के लिए विस्तृत जानकारी जरूरी है। जांच और जवाबदेही जरूरी इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं। यदि किसी तरह की कमी पाई जाती है, तो उसकी जांच कर जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगा जाना चाहिए। साथ ही, एंबुलेंस में मौजूद चिकित्सा उपकरणों की नियमित जांच सुनिश्चित करना भी जरूरी है। राघोपुर की इस घटना ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल, मामले से जुड़ी तकनीकी स्थिति और संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

VAISALI NEWS:राघोपुर नाव हादसे पर मीसा भारती ने उठाए सवाल, सरकारी नावों की उपलब्धता और एंबुलेंस पहुंचने में देरी पर मांगी जांच

  राघोपुर नाव हादसा,वैशाली/राघोपुर: बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में नाव पलटने की घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। इस हादसे ने प्रभावित परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। घटना को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की सांसद मीसा भारती ने दुख जताया और प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस दुखद घटना से कई परिवार पूरी तरह टूट गए हैं। ऐसे समय में पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के साथ-साथ हादसे से जुड़े पहलुओं की जांच करना भी जरूरी है। मीसा भारती ने सरकारी नावों की व्यवस्था पर उठाए सवाल मीसा भारती ने कहा कि राघोपुर में हुई घटना बेहद दुखद है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए ईश्वर से उन्हें इस कठिन समय को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। साथ ही उन्होंने सवाल किया कि जब लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए नावों की जरूरत थी, तो सरकार की ओर से पर्याप्त नावों की व्यवस्था क्यों नहीं की गई थी। सांसद ने मांग की कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि सरकारी स्तर पर नावें उपलब्ध कराने में कोई कमी रह गई थी या नहीं। उनके मुताबिक, नदी वाले क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही को सुरक्षित बनाने के लिए पर्याप्त नावों की तैनाती जरूरी है, ताकि इस तरह की परिस्थितियों में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। जिलाधिकारी के घटनास्थल पर पहुंचने का किया जिक्र मीसा भारती ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि घटना की सूचना मिलने के बाद जिलाधिकारी मौके पर पहुंचीं और करीब तीन से चार घंटे तक वहां मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को घटनास्थल पर पहुंचने के साथ-साथ हादसे के कारणों और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं की भी तत्काल जांच करनी चाहिए थी। हालांकि, सरकारी नावों की उपलब्धता और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर उठाए गए सवालों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। एंबुलेंस पहुंचने में देरी का भी उठा मुद्दा सांसद ने स्थानीय लोगों के हवाले से यह भी कहा कि हादसे की सूचना मिलने के बाद एंबुलेंस को घटनास्थल तक पहुंचने में करीब आधा घंटा लग गया। उन्होंने इस मुद्दे को भी गंभीरता से लेने की जरूरत बताई। राघोपुर नाव हादसे के बाद अब सुरक्षित परिवहन, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा और प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। नदी और दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए नाव आवागमन का एक महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में पर्याप्त नावों की उपलब्धता, सुरक्षा उपायों और आपातकालीन सेवाओं की तत्परता सुनिश्चित करना जरूरी है। फिलहाल, हादसे से जुड़े कारणों और व्यवस्थागत कमियों को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाना भी प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है।

पटना में विपक्ष का प्रदर्शन तेज, मीसा भारती बैरिकेड पर चढ़ीं; चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी

पटना: बिहार की राजधानी पटना में विपक्षी दलों का प्रदर्शन गुरुवार को उस वक्त जोरदार हो गया, जब प्रदर्शनकारियों ने लगाए गए बैरिकेड को पार करने की कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान राजद सांसद मीसा भारती भी बैरिकेड के ऊपर चढ़कर आगे बढ़ती नजर आईं। इसके बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। 🔴 प्रदर्शन में जमकर नारेबाजी पटना में विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई सवालों पर विपक्ष की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। 🔴 बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय ज्यादा गर्म हो गई, जब प्रदर्शनकारी पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड को पार करने लगे। कई कार्यकर्ता बैरिकेड के ऊपर चढ़ गए। इसी दौरान मीसा भारती भी बैरिकेड पर चढ़कर आगे बढ़ती दिखाई दीं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और आगे जाने से रोकने का प्रयास किया। 🔴 मोदी सरकार पर भी निशाना प्रदर्शनकारियों ने मोदी सरकार की नीतियों और चुनावी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। इसी मांग को लेकर विपक्ष की ओर से प्रदर्शन किया जा रहा है। 🔴 पटना में बढ़ी राजनीतिक हलचल इस प्रदर्शन के बाद पटना में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के कारण प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को निर्धारित सीमा में रखने की कोशिश की गई। फिलहाल पटना में विपक्ष का यह प्रदर्शन बिहार की सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है। मीसा भारती के बैरिकेड पर चढ़ने का वीडियो और प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारे भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

जमुई पीड़िता की फोटो मामले में मीसा भारती का FIR को लेकर सवाल, सचिवालय थाने में कार्रवाई की मांग

पटना, बिहार: जमुई मामले की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने को लेकर बिहार की राजनीति में विवाद बढ़ता जा रहा है। राजद सांसद मीसा भारती ने पटना के सचिवालय थाने पहुंचकर इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करना पॉक्सो कानून के प्रावधानों का उल्लंघन है। मीसा भारती ने कहा कि वह एक महिला सांसद और जनप्रतिनिधि होने के बावजूद कई घंटे से थाने में बैठकर FIR दर्ज करने की मांग कर रही थीं। उनका आरोप था कि थाने के अधिकारी उनकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं कर रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की शिकायत दर्ज कराने में इतनी परेशानी हो रही है, तो आम लोगों की स्थिति क्या होगी। राजद सांसद ने जमुई मामले में सोशल मीडिया पर पीड़िता की पहचान से संबंधित सामग्री साझा करने वालों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि सामान्य लोगों के खिलाफ POCSO के तहत कार्रवाई की जा सकती है तो सोशल मीडिया पर पीड़िता या उसके परिवार की तस्वीर साझा किए जाने के मामले में भी कानून समान रूप से लागू होना चाहिए। इस बीच, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सचिवालय थाने में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है। पुलिस के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा होने से नाबालिग पीड़िता की निजता और पहचान प्रभावित हो सकती थी। मामले में POCSO एक्ट, भारतीय न्याय संहिता और IT Act की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। मीसा भारती ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी जवाब देने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर तस्वीर कैसे पोस्ट हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी थी। उनका कहना था कि यदि सोशल मीडिया अकाउंट किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संचालित किया जाता है, तो इसकी स्पष्ट जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। जमुई की घटना के बाद पीड़िता की पहचान से जुड़ी तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने को लेकर पुलिस पहले से कार्रवाई कर रही है। ऐसे मामलों में नाबालिग पीड़ित की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना कानूनी रूप से महत्वपूर्ण विषय है। फिलहाल, CMO कर्मचारी के खिलाफ दर्ज FIR के बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाना है कि तस्वीर किसने सोशल मीडिया पर अपलोड की और उसके प्रसार की जिम्मेदारी किन लोगों की थी।