राहुल गांधी के तिरंगे प्रेम पर विवेक ठाकुर का सवाल, बोले- कब से जागी हिंदुस्तानी भावना?

राहुल गांधी के तिरंगे प्रेम: नई दिल्ली: भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनके तिरंगे के प्रति प्रेम और राष्ट्रभावना को लेकर सवाल उठाए हैं। विवेक ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी के बयानों और राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए उनके इरादों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता केवल मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसे मुद्दों को उठा रहे हैं। विवेक ठाकुर ने राहुल गांधी पर साधा निशाना भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने राहुल गांधी के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस में खुद राहुल गांधी ने कहा है कि हर दिन कोई न कोई सरप्राइज देखने को मिलेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी से किसी सकारात्मक पहल की उम्मीद करना मुश्किल है। हालांकि, ये टिप्पणियां विवेक ठाकुर की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं। विवेक ठाकुर ने तिरंगे के सम्मान और राष्ट्र के प्रति समर्पण का मुद्दा उठाते हुए भाजपा के अभियान ‘हर घर तिरंगा’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान देशभर के गांवों और घरों में लोग राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। उनके मुताबिक, तिरंगा फहराना केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के प्रति सम्मान और समर्पण व्यक्त करने का माध्यम है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर भी उठाए सवाल भाजपा सांसद ने प्रदर्शन के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करना गलत नहीं है, लेकिन इसके लिए निर्धारित स्थानों और नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। विवेक ठाकुर के अनुसार, जंतर-मंतर को सामूहिक प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाए जाने और तीन नए प्रदर्शन स्थलों के चयन की बात सामने आई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद वहां पहुंचे कुछ लोग केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित करना चाहते थे। तिरंगे को लेकर राहुल गांधी से पूछा सवाल विवेक ठाकुर ने राहुल गांधी की राष्ट्रभावना पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उन्हें तिरंगे से प्रेम कब से हो गया और उनके भीतर हिंदुस्तानी होने की भावना कब जागी? उनके इस बयान से राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। इस पूरे मामले में एक ओर भाजपा सांसद ने राहुल गांधी की मंशा पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन और राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं। लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध और प्रदर्शन का अपना महत्व है, लेकिन इन मुद्दों पर चर्चा के दौरान तथ्यों और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखना भी जरूरी है। नोट: यह खबर भाजपा सांसद विवेक ठाकुर के दिए गए बयान पर आधारित है। राहुल गांधी की मंशा को लेकर लगाए गए आरोपों को उनके दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, ‘चौकीदार चोर है’ मानहानि मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक

**नई दिल्ली:** कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। साथ ही, राहुल गांधी की उस याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राहुल गांधी की कथित ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी से जुड़ा है। इस बयान को लेकर उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ा और राहुल गांधी ने राहत पाने के लिए अदालत का रुख किया। ## सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया। अदालत ने उनकी याचिका पर संबंधित पक्ष को नोटिस भी जारी किया है। इस याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें मानहानि मामले को रद्द करने की उनकी मांग स्वीकार नहीं की गई थी। **सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश मामले की कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से अहम है।** हालांकि, कार्यवाही पर रोक लगने का मतलब यह नहीं है कि राहुल गांधी को मामले में अंतिम रूप से बरी कर दिया गया है। मामले के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है। ## क्या है पूरा मामला? ‘चौकीदार चोर है’ नारा वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक बहस का प्रमुख हिस्सा बना था। राहुल गांधी ने इस टिप्पणी का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को निशाना बनाने के लिए किया था। इसी टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत की गई थी। इसके बाद राहुल गांधी ने कानूनी राहत के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाया। बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। ## आगे क्या होगा? अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब पर निर्भर करेगी। अदालत का अगला रुख इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है। **फिलहाल, ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक राहुल गांधी के लिए राहत है, लेकिन मानहानि मामले का अंतिम निपटा रा अभी नहीं हुआ है।**hai
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छह राज्यों में नियुक्त किए नए राज्यपाल, जानें किसे कहां मिली जिम्मेदारी

राष्ट्रपति मुर्मू ने छह राज्यपाल नियुक्त किए :नई दिल्ली:** राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और तबादले से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल में केरलम, तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा, उत्तराखंड और सिक्किम शामिल हैं। राष्ट्रपति भवन की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, चार राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं, जबकि दो राज्यपालों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। **मुख्य बातें एक नजर में** * राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति की। * चार राज्यों को नए राज्यपाल मिले। * केरलम और तमिलनाडु में राज्यपालों की जिम्मेदारियां बदली गईं। * सभी नियुक्तियां संबंधित राज्यपालों के पदभार संभालने की तारीख से प्रभावी होंगी। ## छह राज्यों में किसे मिली राज्यपाल की जिम्मेदारी? राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, नई नियुक्तियों की सूची इस प्रकार है: 1. **ओम प्रकाश माथुर:** केरलम के राज्यपाल नियुक्त किए गए। वह इससे पहले सिक्किम के राज्यपाल थे। 2. **राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर:** तमिलनाडु के राज्यपाल बनाए गए। वह पहले केरलम के राज्यपाल थे और तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। 3. **ब्रज मोहन राम:** ओडिशा के नए राज्यपाल नियुक्त किए गए। 4. **डॉ. सुधा यादव:** कर्नाटक की राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई। 5. **डॉ. ढाल सिंह बिसेन:** उत्तराखंड के नए राज्यपाल नियुक्त किए गए। 6. **दुष्यंत गौतम:** सिक्किम के राज्यपाल बनाए गए। ## प्रशासनिक फेरबदल क्यों है महत्वपूर्ण? राज्यपाल का पद भारतीय संविधान और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख होते हैं। उन्हें संविधान के प्रावधानों के अनुसार कई जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। इनमें राज्य सरकार के गठन से जुड़ी प्रक्रियाएं, विधेयकों पर संवैधानिक भूमिका और विधानसभा से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। छह राज्यों में हुए इस बदलाव के बाद संबंधित राजभवनों में नेतृत्व की जिम्मेदारियां बदलेंगी। खास तौर पर केरलम से राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु भेजने और ओम प्रकाश माथुर को केरलम की जिम्मेदारी देने से दो मौजूदा राज्यपालों के कार्यक्षेत्र में बदलाव हुआ है। **निष्कर्ष:** राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा की गई छह राज्यपालों की नियुक्तियां देश की प्रमुख राष्ट्रीय और राजनीतिक खबरों में शामिल हैं। अब इन नियुक्तियों के प्रभावी होने के लिए संबंधित राज्यपालों के पदभार ग्रहण करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।