INDIA ब्लॉक की बैठक में चुनाव आयोग पर मंथन, खड़गे बोले- एकजुट होकर लड़ेंगे लोकतंत्र की लड़ाई

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बुधवार को विपक्षी दलों के INDIA ब्लॉक की अहम बैठक हुई। बैठक में चुनाव आयोग, मतदाता सूची में बदलाव और आगामी राजनीतिक रणनीति समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बैठक में सभी नेताओं ने अपने विचार रखे और आगे की रणनीति को लेकर सुझाव दिए। खड़गे के मुताबिक, बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई नेताओं ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ऑनलाइन माध्यम से बैठक में अपनी बात रखी। एकजुट होकर संघर्ष की बात मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि बैठक में शामिल दलों ने मिलकर और एकजुट होकर लोकतांत्रिक मुद्दों को मजबूती से उठाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं की ओर से अलग-अलग सुझाव सामने आए, जिन पर आगे चर्चा कर संयुक्त रणनीति तैयार की जाएगी। बैठक का प्रमुख मुद्दा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां रहा। INDIA ब्लॉक के नेता इस मुद्दे पर आगे की संयुक्त कार्रवाई को लेकर विचार-विमर्श कर रहे हैं। खड़गे ने PM मोदी और अमित शाह पर लगाया आरोप बैठक के बाद खड़गे ने चुनाव आयोग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के साथ कठपुतली की तरह व्यवहार किया जा रहा है और कुछ लोगों को माध्यम बनाकर वोटों की कथित चोरी कराई जा रही है। खड़गे ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता जब लोकतंत्र और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, तो उन्हें परेशान करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, ये खड़गे और कांग्रेस की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं; इन दावों पर सरकार और चुनाव आयोग का पक्ष अलग हो सकता है। आगे की रणनीति पर नजर INDIA ब्लॉक की बैठक ऐसे समय हुई है, जब विपक्षी दल चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस ने इससे पहले भी इस मुद्दे पर आंदोलन तेज करने की बात कही है। वहीं, चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को लेकर विपक्षी दलों की संयुक्त रणनीति पर आगे भी राजनीतिक गतिविधियां जारी रहने के संकेत हैं।

केशव मौर्य का INDIA गठबंधन पर हमला, EVM और चुनाव आयोग के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने INDIA गठबंधन की एकजुटता और विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि INDIA गठबंधन में अब एकता नहीं रह गई है और विपक्षी दल अलग-अलग मुद्दों पर अपनी राजनीति कर रहे हैं। मौर्य ने कहा कि देश की जनता गठबंधन के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों को देख रही है। उन्होंने विपक्ष की स्थिति पर तंज कसते हुए इसे “भानुमति का कुनबा” बताया और कहा कि गठबंधन के घटक दलों के बीच एकजुटता दिखाई नहीं दे रही है। EVM और चुनाव आयोग के मुद्दे पर भी निशाना उपमुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग और EVM को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उनका आरोप है कि जब विपक्षी दल चुनाव हारते हैं तो वे EVM और चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हैं, जबकि जीत मिलने पर चुनावी व्यवस्था को लेकर उनका रुख अलग होता है। मौर्य ने कहा कि चुनाव परिणामों को राजनीतिक सुविधा के हिसाब से देखने के बजाय चुनावी प्रक्रिया और जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए। हाल के दिनों में भी उन्होंने विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों पर इसी तरह की प्रतिक्रिया दी है। ‘जनता इसका जवाब देगी’ केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और बीजेपी के राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर किए जाने वाले दावों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजे जनता के वोट से तय होते हैं और जनता ही राजनीतिक दलों के दावों का जवाब देती है। मौर्य का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। सपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की रणनीति को लेकर बीजेपी नेताओं की ओर से लगातार बयान सामने आ रहे हैं। विपक्षी एकजुटता पर बढ़ी राजनीतिक बहस दरअसल, INDIA गठबंधन से जुड़े दल चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार अपनी मांगें उठा रहे हैं। 30 सितंबर 2026 को गठबंधन के नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त रणनीति पर चर्चा की और कई मांगें सामने रखीं। ऐसे में केशव प्रसाद मौर्य का बयान उत्तर प्रदेश की आगामी चुनावी राजनीति में गठबंधन की एकजुटता, EVM और चुनाव आयोग की भूमिका जैसे मुद्दों को लेकर चल रही बहस को और तेज करता है। हालांकि, विपक्षी दल इन मुद्दों पर अपनी अलग दलीलें और आपत्तियां रखते हैं।