नेपाल से भारी पानी आने के बाद बेतिया में गंडक का दबाव बढ़ा, दो जगह तटबंध क्षतिग्रस्त

बेतिया, बिहार: पश्चिम चंपारण में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ने से चंपारण तटबंध पर दबाव बढ़ गया। इसी दौरान तटबंध को दो स्थानों पर नुकसान पहुंचा। बिहार जल संसाधन विभाग के मुताबिक, बगहा में गंडक का जलस्तर 91.25 मीटर तक पहुंच गया था, जो 2024 के पिछले रिकॉर्ड से भी अधिक है। भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने बेतिया में स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि करीब 24 घंटे के भीतर नेपाल की ओर से पहले लगभग 3 लाख क्यूसेक और उसके बाद करीब 6.74 लाख क्यूसेक पानी अचानक छोड़े जाने की बात सामने आई। उनके मुताबिक, इस तरह करीब 9.5 लाख क्यूसेक पानी आने से नदी का दबाव काफी बढ़ गया और दो जगह तटबंध टूट गया। सांसद ने बताया कि तटबंध को नुकसान पहुंचने की सूचना मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभाग की टीमें मौके पर सक्रिय हो गईं। उन्होंने कहा कि सोमवार सुबह से ही बचाव और मरम्मत से जुड़े काम शुरू कर दिए गए थे। उनका दावा है कि अब तक किसी व्यक्ति या पशु के हताहत होने की सूचना नहीं है। जल संसाधन विभाग की ओर से भी तटबंधों की सुरक्षा और मरम्मत के लिए टीमों को अलग-अलग संवेदनशील इलाकों में भेजा गया है। विभाग के अनुसार, पश्चिम चंपारण के खैरटवा और बैरिया क्षेत्र में चंपारण तटबंध के दो हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। वहीं, बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बगहा, बेतिया, मोतिहारी और गोपालगंज में इंजीनियरों की टीमें तैनात की गई हैं। संजय जायसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री भी आज प्रभावित इलाकों का जायजा लेने पहुंच रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाढ़ से प्रभावित लोगों को सरकार की ओर से नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। नेपाल में लगातार बारिश और गंडक के बढ़ते प्रवाह को देखते हुए प्रशासन की चुनौती फिलहाल कम नहीं हुई है। तटबंधों पर निगरानी बढ़ाई गई है और कमजोर स्थानों पर बचाव एवं मरम्मत का काम जारी है।
छपरा में बांध टूटने से बाढ़ का कहर, कई इलाकों में घुसा पानी; बेतिया-मुजफ्फरपुर में भी हालात गंभीर

बिहार में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। सारण जिले के मकेर प्रखंड में बाघाकोल और हैजलपुर के पास तटबंध पर बढ़े दबाव के बाद निचले इलाकों में पानी फैलने की स्थिति बनी है। वहीं बेतिया, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज और वैशाली समेत कई जिलों में भी नदी के बढ़े जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जल संसाधन विभाग की 30 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, मकेर प्रखंड के हैजलपुर, परमानंद छपरा और नौकरहा गांवों के निचले इलाकों में पानी फैलने और संपर्क बाधित होने की आशंका जताई गई है। गंडक के जलग्रहण क्षेत्र में अत्यधिक बारिश के कारण नदी का जलस्राव बढ़ा है। इसके साथ ही गंगा का जलस्तर भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर रहने से तटबंधों पर दबाव बढ़ा है। कई जगहों पर सीपेज और पाइपिंग की स्थिति सामने आने के बाद फ्लड फाइटिंग का काम जारी है। इससे पहले गंडक नदी के बढ़े जलस्तर ने पश्चिम चंपारण में भी तटबंधों पर भारी दबाव बनाया। बगहा में गंडक का जलस्तर 91.25 मीटर तक पहुंच गया, जो वहां दर्ज अब तक के उच्चतम बाढ़ स्तर से 35 सेंटीमीटर अधिक है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 5,43,500 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया था। इस तेज प्रवाह का असर पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली तक देखने को मिला। बेतिया और पश्चिम चंपारण में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। गंडक के दबाव के कारण चंपारण तटबंध को कई जगह नुकसान पहुंचा और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने लगा। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें प्रभावित स्थानों पर मरम्मत और सुरक्षा कार्य में जुटी हैं। सारण में भी प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है। बांध और तटबंधों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अधिकारियों ने स्थिति का निरीक्षण किया है। स्थानीय स्तर पर लोगों को सतर्क रहने और पानी बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी जा रही है। फिलहाल बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति नदी के जलस्तर और पानी के बहाव पर निर्भर है। प्रशासन की प्राथमिकता तटबंधों को सुरक्षित रखने, प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर राहत-बचाव अभियान चलाने की है।