SIR पर जीतन राम मांझी का बड़ा बयान, बोले- अंतिम फैसला CEC के हाथ में

पटना, बिहार: बिहार में SIR (Special Intensive Revision) को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की भूमिका को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और अंतिम निर्णय CEC के हाथ में होता है। 🔴 मांझी बोले- CEC का फैसला अंतिम जीतन राम मांझी ने कहा कि मीटिंग बुलाना मुख्य चुनाव आयुक्त का काम है। उन्होंने कहा कि जिस तरह मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री की इच्छा के बाद किसी विषय पर चर्चा और बहस होती है, उसी तरह संस्थागत प्रक्रिया के तहत निर्णय लिए जाते हैं। 🔴 SIR पर फैसला हो चुका है तो सवाल क्यों? केंद्रीय मंत्री ने SIR का जिक्र करते हुए कहा कि जब चुनाव आयोग इस मुद्दे पर अपना निर्णय सुना चुका है, तो उस फैसले पर सवाल उठाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उनके बयान का मुख्य फोकस चुनाव आयोग के निर्णय को स्वीकार करने पर रहा। 🔴 चुनाव आयोग में CEC की भूमिका पर जोर मांझी ने कहा कि चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त सर्वेसर्वा होता है और अंतिम निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त के हाथ में ही होता है। उन्होंने इसी आधार पर SIR को लेकर आयोग के निर्णय पर सवाल उठाने की जरूरत से इनकार किया। 🔴 SIR को लेकर जारी है राजनीतिक बहस बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया, मतदाता सूची और उसके प्रभाव को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है। मांझी के ताजा बयान ने इस बहस में चुनाव आयोग की भूमिका और CEC के निर्णय की अहमियत को केंद्र में ला दिया है। अब SIR से जुड़ी आगे की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की ओर से आने वाली आधिकारिक जानकारी पर नजर रहेगी।
बिहार SIR: मतदाता सूची की जांच में 22 लाख से अधिक मृतकों के नाम मिले, CM सम्राट चौधरी का दावा

पटना, बिहार: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जांच प्रक्रिया के दौरान सामने आए आंकड़ों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री के अनुसार, मतदाता सूची की जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए, जिनकी पात्रता या वर्तमान स्थिति को लेकर रिकॉर्ड में बदलाव की जरूरत थी। सम्राट चौधरी ने बताया कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान करीब 22 लाख 34 हजार ऐसे नाम मिले, जिनसे जुड़े मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी। इसके अलावा करीब 36 लाख 28 हजार ऐसे लोगों के नाम भी सामने आए, जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके थे। मुख्यमंत्री के मुताबिक, जांच में करीब 7 लाख ऐसे नाम भी मिले, जो एक से अधिक जगहों पर मतदाता के रूप में दर्ज थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्यापन के बाद ऐसे नामों को मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया पूरी की गई। सरकार की ओर से इसे मतदाता सूची को अधिक व्यवस्थित और अद्यतन बनाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। SIR के दौरान मतदाता सूची में दर्ज नामों और संबंधित विवरणों के सत्यापन को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस भी देखने को मिली है। विपक्षी दलों की ओर से प्रक्रिया के अलग-अलग पहलुओं पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े पक्षों का कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना और गलत या पुराने रिकॉर्ड को दुरुस्त करना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ताजा बयान के बाद एक बार फिर बिहार की मतदाता सूची में हुए बदलावों और SIR प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस प्रक्रिया के अंतिम प्रभाव को समझने के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सत्यापन और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम शामिल रहते हैं और कितने नाम बाहर किए जाते हैं।
बिहार SIR पर सम्राट चौधरी का बयान, वोटर लिस्ट पर कही बड़ी बात

बिहार SIR पर सम्राट चौधरी का बयान, वोटर लिस्ट पर कही बड़ी बात पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने SIR के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया के बाद बिहार की अंतिम वोटर लिस्ट जारी की गई, जिसमें 7 करोड़ 42 लाख मतदाता दर्ज हैं। सम्राट चौधरी ने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने समेत कई सवाल उठाए गए। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बिहार दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोगों के नाम वोटर लिस्ट में नहीं होने की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रशासन और चुनाव आयोग को जानकारी मिलने के बाद संबंधित मामलों की जांच की गई और बताए गए लोगों के नाम सूची में मौजूद पाए गए। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूरी चुनाव प्रक्रिया के दौरान ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया, जिसमें 18 वर्ष से अधिक उम्र के किसी व्यक्ति ने यह दावा किया हो कि उसका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार SIR और वोटर लिस्ट को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।