भोजपुरी क्रिकेट कमेंट्री की बढ़ती लोकप्रियता पर रवि किशन ने कही बड़ी बात, FICCI Frames 2026 में क्षेत्रीय भाषाओं पर चर्चा

मुंबई, महाराष्ट्र: FICCI Frames 2026 के दौरान क्षेत्रीय भाषाओं में क्रिकेट कमेंट्री को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान भाजपा सांसद और अभिनेता रवि किशन ने भोजपुरी भाषा में क्रिकेट कमेंट्री की लोकप्रियता और इसके बढ़ते प्रभाव पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं को क्रिकेट से जोड़ने की पहल की सराहना करते हुए FICCI का आभार जताया। रवि किशन ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में क्रिकेट कमेंट्री को बढ़ावा देने का विचार बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने विशेष रूप से भोजपुरी कमेंट्री का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह इसने क्रिकेट दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि चर्चा का एक अहम विषय यह भी था कि क्षेत्रीय भाषा में कमेंट्री किस तरह बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच बना सकती है। उनके मुताबिक, भोजपुरी जैसी भाषाओं में क्रिकेट की प्रस्तुति ने यह दिखाया है कि खेल को स्थानीय भाषाओं के जरिए दर्शकों से जोड़ने की काफी संभावनाएं हैं। भोजपुरी कमेंट्री को पसंद करने वालों का जताया आभार रवि किशन ने अपनी भोजपुरी कमेंट्री को पसंद करने वाले दर्शकों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने खास तौर पर उन लोगों का जिक्र किया जो भोजपुरी भाषा को पूरी तरह नहीं समझते, लेकिन इसके बावजूद उनकी कमेंट्री को पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए खुशी की बात है कि भोजपुरी नहीं समझने वाले लोग भी कमेंट्री को सुनते और पसंद करते हैं। इससे क्षेत्रीय भाषा में खेल कमेंट्री की पहुंच को लेकर एक अलग तस्वीर सामने आती है। क्षेत्रीय भाषाओं के लिए बढ़ता मंच FICCI Frames 2026 में क्षेत्रीय भाषाओं और मनोरंजन उद्योग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल को क्षेत्रीय भाषाओं में प्रस्तुत करने से स्थानीय दर्शकों के साथ जुड़ाव बढ़ाने की संभावनाओं पर भी ध्यान गया। रवि किशन के बयान के बाद भोजपुरी क्रिकेट कमेंट्री एक बार फिर चर्चा में है। क्षेत्रीय भाषाओं में खेल प्रसारण को लेकर बढ़ती दिलचस्पी यह संकेत देती है कि आने वाले समय में क्रिकेट कमेंट्री के क्षेत्र में भाषाई विविधता को और अधिक स्थान मिल सकता है।
आयुष्मान खुराना का संदेश- अपनी जड़ों से जुड़े रहकर ही ग्लोबल पहचान बनाएं

मुंबई, महाराष्ट्र: अभिनेता आयुष्मान खुराना ने FICCI FRAMES के 26वें संस्करण में भारतीय सिनेमा और कलाकारों की वैश्विक पहचान को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सबसे जरूरी है कि कलाकार अपनी पहचान और मूल से जुड़े रहें। आयुष्मान खुराना के मुताबिक, ‘स्टे ऑथेंटिक’ यानी अपनी वास्तविक पहचान को बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता है और इसी विविधता को दुनिया के सामने मजबूती से प्रस्तुत किया जाना चाहिए। अभिनेता ने इस बात पर जोर दिया कि जब कोई व्यक्ति अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ा रहता है, तो उसके लिए वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाना आसान हो सकता है। उनके अनुसार, भारतीय कलाकारों और फिल्म इंडस्ट्री को अपनी स्थानीय कहानियों, संस्कृति और अनुभवों को आत्मविश्वास के साथ दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास जारी रखना चाहिए। आयुष्मान ने यह भी कहा कि आगे बढ़ने और बेहतर करने की कोशिश हमेशा जारी रहनी चाहिए। उन्होंने आकांक्षा और निरंतर प्रयास को सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। FICCI FRAMES के मंच से आयुष्मान खुराना का यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब भारतीय मनोरंजन उद्योग की पहुंच लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही है। भारतीय फिल्मों, कलाकारों और कहानियों को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने की संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं।