गंडक में पानी छोड़े जाने के बाद बढ़ी चिंता, बिहार सरकार ने जिलों को किया अलर्ट

पटना: बिहार के उत्तर-पश्चिमी जिलों में बाढ़ की स्थिति को लेकर प्रशासन सतर्क है। गंडक नदी में दोबारा पानी छोड़े जाने के बाद नदी के आसपास के इलाकों में जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सरकार की ओर से प्रभावित और संभावित प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है। बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश ने बाढ़ की स्थिति पर जानकारी देते हुए बताया कि गंडक में एक बार फिर पानी छोड़ा गया है, जिसके कारण कुछ इलाकों में ऐसी स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मंत्री के मुताबिक, गंडक के पानी के मार्ग में आने वाले सभी जिलों के प्रशासन को सतर्क किया गया है। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को स्थिति पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां जारी हैं। नदी के जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों में होने वाले बदलावों की लगातार जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता संवेदनशील इलाकों में निगरानी बनाए रखना और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना है। अधिकारियों की ओर से लोगों से भी प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।

गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर अलर्ट, वाल्मीकिनगर बराज पर बढ़ा दबाव

बिहार में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने बताया कि पिछले 24 घंटे के दौरान नेपाल के गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्र में काफी बारिश हुई है। लगातार हो रही बारिश के कारण वाल्मीकिनगर बराज पर पानी का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। विजय चौधरी के मुताबिक, वाल्मीकिनगर बराज से गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज करीब 4.25 लाख क्यूसेक तक पहुंच चुका है। नेपाल के देवघाट से मिलने वाली सूचनाओं और वहां की स्थिति के आधार पर बिहार में गंडक के जलस्तर को लेकर अनुमान लगाया जा रहा है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए नदी में जलश्राव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक हुई बारिश और नेपाल से मिल रहे संकेतों के आधार पर वाल्मीकिनगर बराज में करीब 5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फिलहाल एक अनुमान है और इसे पक्की भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता। आने वाले घंटों में नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में बारिश और वहां से मिलने वाले नए आंकड़ों के आधार पर स्थिति और स्पष्ट होगी। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी के आसपास और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे प्रशासन की ओर से जारी होने वाले अलर्ट और निर्देशों का पालन करें। प्रशासन भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें। फिलहाल गंडक के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और नदी के आसपास जाने से बचने की सलाह दी जा रही है।

गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से NH-727B पर बढ़ी परेशानी, करीब 1 किलोमीटर सड़क डूबी

बगहा, बिहार। पश्चिम चंपारण जिले में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नदी का पानी बढ़ने के कारण बेतिया और बगहा के बीच गुजरने वाले NH-727B का करीब एक किलोमीटर हिस्सा जलमग्न हो गया है। सड़क पर पानी आने से इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों और वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, रात करीब 10 बजे वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 3,28,400 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके असर से नदी के आसपास के निचले इलाकों के साथ-साथ सड़क के कुछ हिस्सों में भी पानी फैल गया। NH-727B बेतिया और बगहा क्षेत्र के बीच आवागमन का महत्वपूर्ण मार्ग है। सड़क के एक हिस्से के जलमग्न होने से स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। पानी की स्थिति को देखते हुए वाहन चालकों को इस मार्ग पर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि का असर आसपास के इलाकों पर भी पड़ सकता है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों के बीच पानी बढ़ने को लेकर चिंता बनी हुई है। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर जलस्तर की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। बारिश और बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण गंडक के जलस्तर में आगे भी बदलाव हो सकता है। ऐसे में नदी के आसपास रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सड़क पर जमा पानी और यातायात व्यवस्था को लेकर है। जलस्तर कम होने तक लोगों को अनावश्यक रूप से जलमग्न हिस्से से गुजरने से बचना चाहिए। स्थानीय प्रशासन द्वारा स्थिति के अनुसार आगे आवश्यक कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

कुशीनगर में बाढ़ का खतरा बढ़ा, वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़ा गया 2.80 लाख क्यूसेक पानी

कुशीनगर, उत्तर प्रदेश। नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए वाल्मीकिनगर बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया है। प्रशासन ने संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कुशीनगर में SDRF की टीम तैनात कर दी है। साथ ही प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाते हुए बाढ़ से निपटने की तैयारियों को सक्रिय कर दिया गया है। कुशीनगर के अपर जिलाधिकारी पवन कुमार के मुताबिक, वाल्मीकिनगर बैराज से शनिवार दोपहर करीब 1 बजे 2.80 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसका प्रभाव कुशीनगर क्षेत्र में करीब पांच घंटे बाद दिखाई देने की संभावना है। प्रशासन लगातार नदी के जलस्तर और संभावित प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है। एडीएम ने बताया कि जिले के 7 गांव ऐसे हैं, जहां 4 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने की स्थिति में पूरी तरह जलमग्न होने का खतरा रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पहले से एहतियाती कदम उठाए हैं। बाढ़ की किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए जिले की सभी बाढ़ चौकियों और बाढ़ शिविरों को ऑपरेशनल रखा गया है। SDRF की टीम भी मौके पर तैनात है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई की जा सके। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इसके अलावा पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें ऊंचे स्थानों पर ले जाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार आगे के कदम उठाए जाएंगे।