केशव मौर्य का राहुल गांधी और विपक्ष पर निशाना, आंदोलन को बताया फ्लॉप

केशव प्रसाद मौर्य; प्रयागराज, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मतदाता सूची से जुड़े विवाद को लेकर कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और INDI गठबंधन के अन्य दलों के पास केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों की सरकारों के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं है। मौर्य ने विपक्ष के आंदोलन को भी असफल बताते हुए कहा कि इसे जनता का समर्थन नहीं मिल रहा है। विपक्ष पर मुद्दाविहीन होने का आरोप केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि विपक्ष ऐसे विषयों को उठाकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है, जिनके आधार पर सरकार को घेरने का कोई ठोस कारण नहीं बनता। उनके मुताबिक, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल सरकार के खिलाफ प्रभावी मुद्दे नहीं उठा पा रहे हैं। इसी वजह से वे मतदाता सूची से जुड़े मामले को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इस आंदोलन का जनता पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष देश के लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। मतदाता सूची में नामों को लेकर क्या बोले मौर्य? मतदाता सूची में नामों की शुद्धता का मुद्दा उठाते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम सूची में नहीं रहने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है, तो उसका नाम केवल एक ही स्थान की मतदाता सूची में होना चाहिए। मौर्य के बयान का मुख्य जोर मतदाता सूची को सही और व्यवस्थित रखने पर रहा। हालांकि, नाम हटाने या संशोधन की प्रक्रिया संबंधित चुनावी नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही की जाती है। विपक्ष के आंदोलन को बताया फ्लॉप केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसके आंदोलन को देश की जनता का समर्थन नहीं मिल रहा है। उन्होंने इसे पूरी तरह फ्लॉप करार दिया और विपक्ष पर राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस मुद्दे को उठाने का आरोप लगाया। मतदाता सूची में नामों की जांच और संशोधन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। एक ओर भाजपा नेता सूची को दुरुस्त रखने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं, वहीं विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित सवाल उठाए जा रहे हैं। फिलहाल, इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बीच मतदाता सूची की पारदर्शिता, सही नामों का पंजीकरण और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा बहस के प्रमुख विषय बने हुए हैं।