2027 चुनाव से पहले केशव मौर्य का बड़ा दावा, बोले- बिखर चुका है INDI गठबंधन

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का INDI गठबंधन अब बिखर चुका है और इसका असर आने वाले चुनावों में साफ तौर पर दिखाई देगा। मौर्य ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश समेत जिन राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां भारतीय जनता पार्टी बड़े अंतर से जीत दर्ज करेगी। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि INDI गठबंधन के नेता साथ रहें या अलग-अलग हो जाएं, इससे बीजेपी की चुनावी संभावनाओं पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक, जनता का समर्थन भारतीय जनता पार्टी के साथ है और आगामी चुनाव में पार्टी को इसका लाभ मिलेगा। राहुल गांधी पर भी साधा निशाना उपमुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर विपक्ष के आंदोलनों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का आंदोलन जनहित से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाकर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाना है। मौर्य ने कहा कि विपक्ष के आंदोलन में आम जनता के मुद्दों की बजाय सत्ता हासिल करने की राजनीतिक कोशिश ज्यादा दिखाई देती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि एक गरीब परिवार से आने वाले व्यक्ति ने लंबे समय तक गुजरात और देश की सेवा की है और देश को आगे बढ़ाने का काम किया है। 2027 पर बीजेपी की नजर उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सत्तारूढ़ बीजेपी जहां अपने संगठन और सरकार के कामकाज को आधार बनाकर जनता के बीच जाने की तैयारी में है, वहीं विपक्षी दल सरकार के खिलाफ मुद्दों को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। केशव प्रसाद मौर्य का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। हालांकि, चुनावी नतीजे अंततः जनता के मतदान और उस समय के राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेंगे।

SIR को लेकर असीम अरुण का विपक्ष पर निशाना, बोले- हार के बाद EVM और चुनाव आयोग पर उठाते हैं सवाल

कानपुर देहात: उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री असीम अरुण ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनाव में जीत मिलने पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाते, लेकिन हार के बाद EVM और SIR जैसी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल खड़े करने लगते हैं। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि INDI गठबंधन में शामिल दलों की यह आदत बन गई है कि चुनाव जीतने पर उन्हें चुनाव आयोग से कोई शिकायत नहीं रहती, लेकिन परिणाम उनके पक्ष में नहीं आने पर EVM और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने SIR की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताते हुए कहा कि इसमें लोगों को अपनी आपत्ति और बात रखने के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए। असीम अरुण के मुताबिक, SIR के दौरान मतदाताओं को कई बार अपनी जानकारी दुरुस्त कराने और संबंधित दावे या आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया गया। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक व्यवस्थित और त्रुटिरहित बनाना है। ‘वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों का फायदा उठाती थीं पार्टियां’ मंत्री ने विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लंबे समय से मतदाता सूची में मौजूद कथित गड़बड़ियों का राजनीतिक दल अपने हित में इस्तेमाल करते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि SIR के बाद ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी और राजनीतिक दलों को इसका लाभ उठाने का मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को लेकर अपनाई जा रही प्रक्रिया से विरोधी दल परेशान हैं, क्योंकि अब चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। असीम अरुण का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। विपक्ष जहां SIR की प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं और सवाल सामने रख रहा है, वहीं सरकार इसे मतदाता सूची को दुरुस्त करने और चुनावी प्रक्रिया को मजबूत बनाने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है। इस पूरे मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।