PATNA NEWS:चिराग पासवान का विपक्ष पर हमला, बोले- जनता का भरोसा खो चुके हैं विरोधी दल

चिराग पासवान का विपक्ष पर हमला:पटना: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने विपक्ष के राजनीतिक रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी अमेठी से चुनाव जीतते हैं और प्रियंका गांधी वायनाड से जीत दर्ज करती हैं, तब सब कुछ ठीक माना जाता है। लेकिन जब पश्चिम बंगाल में एनडीए की सरकार बनने की संभावना की चर्चा होती है, तो सवाल उठाए जाने लगते हैं। चिराग पासवान के इस बयान ने चुनावी राजनीति और विपक्ष की भूमिका को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अपनी राजनीतिक स्थिति कमजोर होने के कारण इस तरह के मुद्दों को उठा रहा है। उनके मुताबिक, विपक्षी दलों ने जनता के बीच अपना भरोसा खो दिया है और अब उन्हें अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन पर क्या बोले चिराग पासवान? मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के संदर्भ में चिराग पासवान ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने बयान में चुनावी नतीजों और राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर विपक्ष के रवैये की तुलना की। उनका कहना था कि विपक्ष को अपनी जीत और दूसरे दलों की संभावित जीत के मामलों में अलग-अलग नजरिया नहीं अपनाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की चुनावी जीत का उदाहरण देते हुए कहा कि विपक्ष अपने नेताओं की सफलता को स्वीकार करता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में एनडीए की सरकार बनने की संभावना सामने आने पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे विपक्ष की राजनीतिक सोच से जोड़कर पेश किया। पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी साधा निशाना चिराग पासवान के बयान में पश्चिम बंगाल की राजनीति भी प्रमुख मुद्दा रही। उन्होंने एनडीए की संभावित सरकार को लेकर उठ रहे सवालों के जरिए विपक्ष पर निशाना साधा। हालांकि, उनके इस बयान को राजनीतिक आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल में सरकार गठन की वास्तविक स्थिति चुनावी नतीजों और संबंधित राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी चर्चा चिराग पासवान की टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। इस बयान से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है। फिलहाल, चिराग पासवान ने विपक्ष की राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए उसे जनता का भरोसा खो चुका बताया है। अब इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और आगे की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रहेगी।
SIR के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन जारी रहेगा, रेणुका चौधरी बोलीं- न्याय मिलने तक लड़ाई जारी रखेंगे

नई दिल्ली: SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर विपक्षी दलों का विरोध जारी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक विपक्ष अपनी आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने इस विरोध को लोकतांत्रिक अधिकारों, संविधान और जनता के हक की लड़ाई बताया। रेणुका चौधरी ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना विपक्ष का नैतिक दायित्व है। उनके मुताबिक, देश में बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने, संविधान की बात करने और अपने अधिकारों की मांग करने पर भी सवाल खड़े किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर SIR के खिलाफ विरोध जताना भी गलत माना जाता है, तो फिर लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का अधिकार कहां रह जाता है? संविधान से मिले अधिकारों के लिए लड़ाई कांग्रेस सांसद ने कहा कि संविधान ने नागरिकों को जो अधिकार दिए हैं, वे देश की लोकतांत्रिक विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने स्वतंत्र भारत में मिली आजादी को एक पवित्र जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि इसे बदलने या कमजोर करने का अधिकार किसी को नहीं होना चाहिए। रेणुका चौधरी ने सवाल उठाया कि क्या सरकार की हर कार्रवाई को बिना सवाल किए स्वीकार कर लिया जाए? उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष का काम केवल चुप रहना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करना भी है। सरकार के जवाब तक जारी रहेगा विरोध प्रदर्शन कितने दिनों तक चलेगा, इस सवाल पर रेणुका चौधरी ने कहा कि जब तक सरकार सच्चाई को स्वीकार नहीं करती, तब तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष अलग-अलग मंचों और तरीकों से अपना विरोध दर्ज कराता रहेगा। उनके बयान से स्पष्ट है कि SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है। कांग्रेस सांसद ने इस संघर्ष को अपना नैतिक कर्तव्य बताते हुए कहा कि अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए लड़ते रहना जरूरी है। मुख्य बात: रेणुका चौधरी ने SIR के खिलाफ विरोध को संविधान से मिले अधिकारों की रक्षा से जोड़ते हुए कहा कि न्याय मिलने और सरकार की ओर से सच्चाई स्वीकार किए जाने तक विपक्ष विभिन्न मंचों पर अपनी आवाज उठाता रहेगा।
INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन पर रंजीत रंजन का बड़ा हमला, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: INDIA ब्लॉक के नेताओं और सांसदों के चुनाव आयोग के सामने विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन ने चुनाव आयोग के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग किसी एक दल या सरकार का नहीं, बल्कि पूरे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का संवैधानिक संस्थान है और उसे विपक्ष की बात भी उसी गंभीरता से सुननी चाहिए। रंजीत रंजन के मुताबिक, विपक्ष के नेता और करीब 300 सांसद चुनाव आयोग से मिलने के लिए आगे बढ़ रहे थे। उनका कहना था कि इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ चुनाव आयोग से मिलने की कोशिश पहले जैसी सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती थी, लेकिन जिस तरह से इसे लेकर स्थिति बनी, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘चुनाव आयोग सबकी बात सुने’ कांग्रेस सांसद ने कहा कि विपक्ष लगातार चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कई सवालों के जवाब मांग रहा है। उनका आरोप है कि इन सवालों का सीधा जवाब चुनाव आयोग की ओर से आने के बजाय सरकार की ओर से प्रतिक्रिया दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विपक्ष चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांग रहा है तो जवाब भी चुनाव आयोग को ही देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का उद्देश्य किसी तरह का हंगामा करना नहीं था। उनके अनुसार, यदि 300 सांसदों के एक साथ अंदर आने की जगह नहीं थी तो चुनाव आयोग की ओर से उन्हें सीमित प्रतिनिधिमंडल के साथ मिलने की अनुमति दी जा सकती थी या फिर बाहर बातचीत की जा सकती थी। चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के सवाल रंजीत रंजन ने अपने बयान में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि आयोग के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है, तो उसे विपक्ष के सवालों का सामना करने में संकोच नहीं होना चाहिए। हालांकि, विपक्ष की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर चुनाव आयोग और सरकार का पक्ष अलग हो सकता है। चुनाव प्रक्रिया से जुड़े दावों और आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित आधिकारिक जवाब और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर चुनाव आयोग की भूमिका, विपक्ष के सवालों और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
ECI के खिलाफ विपक्ष के मार्च पर महुआ माजी का बयान, बोलीं- सवाल उठे हैं तो जवाब भी जरूरी

रांची, झारखंड: चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी सांसदों के विरोध मार्च को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी ने विपक्ष के रुख का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन का प्रदर्शन चुनाव आयोग के मुख्यालय तक पहुंचने के उद्देश्य से किया गया था। विपक्ष की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, क्योंकि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। महुआ माजी ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को अपनी बात रखने और सरकार या संवैधानिक संस्थाओं से सवाल पूछने का अधिकार है। उनके मुताबिक, जब चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, तो उन सवालों का जवाब भी सामने आना चाहिए। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल का दावा JMM सांसद ने अपने बयान में SIR यानी Special Intensive Revision से जुड़े फैसलों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्यों की ओर से यह बात सामने आई है कि उनकी अनुमति के बिना करीब 10 महीने के दौरान SIR से संबंधित 14 फैसले लिए गए। महुआ माजी के अनुसार, अगर चुनाव आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्था की निर्णय प्रक्रिया को लेकर ही सवाल खड़े हो रहे हैं, तो विपक्ष का विरोध करना स्वाभाविक है। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए दावों और फैसलों को लेकर संबंधित पक्षों की आधिकारिक स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। ‘लोकतांत्रिक तरीके से विरोध नहीं करेंगे तो क्या करेंगे?’ महुआ माजी ने कहा कि विपक्षी दल अगर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी असहमति दर्ज नहीं कराएंगे तो फिर उनके पास अपनी बात जनता और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाने का क्या रास्ता बचेगा। उन्होंने विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच ECI की विश्वसनीयता, SIR और चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, जबकि इन आरोपों और मांगों पर चुनाव आयोग का पक्ष भी इस विवाद में अहम रहेगा।
दिल्ली में INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन पर अजय आलोक का तंज, बोले- ‘छुपन-छुपाई का खेल हो रहा’

नई दिल्ली: दिल्ली में INDIA ब्लॉक के नेताओं के विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता अजय आलोक ने विपक्ष के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए इसे आंदोलन के बजाय ‘छुपन-छुपाई का खेल’ करार दिया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन के तरीके पर तंज कसा। अजय आलोक ने आरोप लगाया कि विपक्ष की ओर से जिस तरह का प्रदर्शन किया जा रहा है, वह किसी गंभीर राजनीतिक आंदोलन की तरह नजर नहीं आ रहा है। उनके मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान नेताओं को जब बस में बैठाया गया, तो उनके कुछ सहयोगियों को आगे भेज दिया गया और बाद में राहुल गांधी बस से उतरकर वहां से चले गए। BJP नेता ने दावा किया कि राहुल गांधी इसके बाद आकाशवाणी की तरफ चले गए और फिर एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गए। इसी घटनाक्रम को लेकर उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पूरी स्थिति ‘छुपन-छुपाई’ के खेल जैसी दिखाई दे रही है। अजय आलोक ने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से दिल्ली के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस सांसदों के साथ सावधानी बरत रही है, क्योंकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। उनके अनुसार, पुलिस की जिम्मेदारी है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे और किसी सांसद के साथ कोई अप्रिय घटना न हो। उन्होंने विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ राजनीतिक दल जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग जगहों पर जाने से स्थिति उलझती दिखाई देती है। हालांकि, INDIA ब्लॉक की ओर से प्रदर्शन को लेकर अपने मुद्दों और राजनीतिक विरोध को लेकर अलग-अलग नेताओं द्वारा बयान दिए जा रहे हैं। ऐसे में अजय आलोक की टिप्पणी ने दिल्ली की सियासत में बयानबाजी को और तेज कर दिया है।