जमुई पीड़िता की फोटो मामले में मीसा भारती का FIR को लेकर सवाल, सचिवालय थाने में कार्रवाई की मांग

पटना, बिहार: जमुई मामले की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने को लेकर बिहार की राजनीति में विवाद बढ़ता जा रहा है। राजद सांसद मीसा भारती ने पटना के सचिवालय थाने पहुंचकर इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करना पॉक्सो कानून के प्रावधानों का उल्लंघन है। मीसा भारती ने कहा कि वह एक महिला सांसद और जनप्रतिनिधि होने के बावजूद कई घंटे से थाने में बैठकर FIR दर्ज करने की मांग कर रही थीं। उनका आरोप था कि थाने के अधिकारी उनकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं कर रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की शिकायत दर्ज कराने में इतनी परेशानी हो रही है, तो आम लोगों की स्थिति क्या होगी। राजद सांसद ने जमुई मामले में सोशल मीडिया पर पीड़िता की पहचान से संबंधित सामग्री साझा करने वालों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि सामान्य लोगों के खिलाफ POCSO के तहत कार्रवाई की जा सकती है तो सोशल मीडिया पर पीड़िता या उसके परिवार की तस्वीर साझा किए जाने के मामले में भी कानून समान रूप से लागू होना चाहिए। इस बीच, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सचिवालय थाने में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है। पुलिस के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा होने से नाबालिग पीड़िता की निजता और पहचान प्रभावित हो सकती थी। मामले में POCSO एक्ट, भारतीय न्याय संहिता और IT Act की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। मीसा भारती ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी जवाब देने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर तस्वीर कैसे पोस्ट हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी थी। उनका कहना था कि यदि सोशल मीडिया अकाउंट किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संचालित किया जाता है, तो इसकी स्पष्ट जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। जमुई की घटना के बाद पीड़िता की पहचान से जुड़ी तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने को लेकर पुलिस पहले से कार्रवाई कर रही है। ऐसे मामलों में नाबालिग पीड़ित की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना कानूनी रूप से महत्वपूर्ण विषय है। फिलहाल, CMO कर्मचारी के खिलाफ दर्ज FIR के बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच में यह स्पष्ट किया जाना है कि तस्वीर किसने सोशल मीडिया पर अपलोड की और उसके प्रसार की जिम्मेदारी किन लोगों की थी।
जमुई पीड़िता की तस्वीर को लेकर तेजस्वी का हमला, सम्राट चौधरी पर POCSO के तहत कार्रवाई की मांग

जमुई की नाबालिग पीड़िता और उसके परिजनों की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर POCSO एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए बिहार पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से साझा की गई तस्वीर को बाद में हटा दिया गया। तेजस्वी यादव ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। उनके मुताबिक, गरीब हो या अमीर, नेता हो या अधिकारी और मुख्यमंत्री हो या कोई आम नागरिक—कानून के दायरे में सभी बराबर होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जमुई मामले में नाबालिग पीड़िता की पहचान से जुड़ी तस्वीर सार्वजनिक किए जाने से POCSO कानून के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। तेजस्वी ने बिहार पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जमुई और दूसरे मामलों में POCSO के तहत बड़ी संख्या में लोगों पर कार्रवाई की गई है। ऐसे में उनका सवाल है कि यदि किसी आम व्यक्ति पर कानून लागू होता है तो संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के मामले में भी समान प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं करती है तो वे इस मामले को अदालत में ले जाएंगे और बिहार पुलिस को भी पक्षकार बनाएंगे। तेजस्वी ने यह भी कहा कि कानून से ऊपर कोई व्यक्ति नहीं हो सकता और कानून लागू करने में दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। दरअसल, जमुई में 19 सितंबर को एक नाबालिग लड़की और उसके साथ मौजूद किशोर के साथ कथित बदसलूकी और मारपीट का मामला सामने आया था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने POCSO के तहत मामला दर्ज किया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। वीडियो साझा करने वाले कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी पुलिस ने कार्रवाई की है। इस पूरे मामले में अब जांच और कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ नाबालिग पीड़िता की पहचान की गोपनीयता को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। तेजस्वी यादव की मांग है कि इस मामले में कानून के अनुसार समान कार्रवाई की जाए।