राहुल गांधी का बड़ा आरोप: विपक्षी सांसदों को प्रदर्शन से रोकने का दावा, बोले- ‘कार्रवाई की जाएगी’

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाया है। दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया कि लोकसभा और राज्यसभा के करीब 300 सांसद शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें पिछले दो दिनों से प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी सांसद लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते हैं। उनके मुताबिक, बीते दिन जंतर-मंतर पर भी विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोका गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके कुछ लोगों के साथ मारपीट भी की गई। राहुल गांधी ने लगाए गंभीर आरोप राहुल गांधी ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इन लोगों ने कथित तौर पर मिलकर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई है। हालांकि, ये सभी आरोप राहुल गांधी की ओर से लगाए गए हैं और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस बयान के समय उपलब्ध नहीं है। ‘कार्रवाई होगी और सजा दिलाई जाएगी’ विपक्ष के नेता ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने दावा किया कि भविष्य में इस पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उन्हें सजा दिलाई जाएगी। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने अपने समर्थकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर कार्रवाई सुनिश्चित करना उनकी गारंटी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल वोटर लिस्ट, चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
28 दिन की जगह 30 दिन की वैधता! राघव चड्ढा के मुद्दे का असर

राज्यसभा में कुछ महीने पहले राघव चड्ढा द्वारा उठाया गया प्रीपेड रिचार्ज की वैधता का मुद्दा अब असर दिखाता नजर आ रहा है। उन्होंने मांग उठाई थी कि जिन ग्राहकों को डेटा की जरूरत नहीं है, उन्हें 28 दिन के बजाय पूरे 30 दिन की वैधता दी जाए। मौजूदा 28 दिन की वैधता के कारण ग्राहकों को साल में 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता था। अब इस दिशा में बदलाव की बात सामने आई है। ऐसे प्रीपेड ग्राहक जिन्हें मोबाइल डेटा की जरूरत नहीं है, उन्हें वॉयस कॉल और SMS जैसी सेवाओं के साथ 30 दिनों की वैधता मिल सकेगी। इससे साल में रिचार्ज की संख्या घटकर 12 हो जाएगी। राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को आम उपभोक्ताओं से जुड़ा बताते हुए राज्यसभा में उठाया था। उनका कहना था कि 28 दिन की वैधता के कारण ग्राहकों को साल में एक अतिरिक्त रिचार्ज करना पड़ता है। अब नियमों में बदलाव से उपभोक्ताओं को इस अतिरिक्त रिचार्ज से राहत मिलने की उम्मीद है। इस बदलाव को उपभोक्ता हित से जुड़े उस मुद्दे के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसे राघव चड्ढा ने संसद में उठाया था।