सुरेश खन्ना का कांग्रेस पर हमला, बोले- संवैधानिक संस्थाओं का विरोध लोकतंत्र को कमजोर करता है; सपा को बताया डूबता जहाज

सुरेश खन्ना का कांग्रेस पर हमला; लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सुरेश खन्ना ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का विरोध करना देश के लोकतंत्र को कमजोर करने जैसा है। कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए उन्होंने इसे गलत कदम बताया और कहा कि इस तरह के विरोध से पार्टी को सफलता नहीं मिलने वाली है। वहीं, सपा के तीन विधायकों के भाजपा में शामिल होने के मुद्दे पर उन्होंने समाजवादी पार्टी को डूबते हुए जहाज की संज्ञा दी। संवैधानिक संस्थाओं के विरोध पर कांग्रेस को घेरा मंत्री सुरेश खन्ना ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाएं देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसी संस्थाओं का विरोध करने से लोकतंत्र की मजबूती पर असर पड़ता है। उनके मुताबिक, कांग्रेस का यह कदम उचित नहीं है और पार्टी को इससे कोई राजनीतिक सफलता नहीं मिलेगी। उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक गतिविधियों के बीच कांग्रेस पर भाजपा के हमले के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मंत्री ने अपने बयान में जिस विरोध का जिक्र किया, उसके संदर्भ में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। सपा के तीन विधायकों के भाजपा में जाने पर तंज समाजवादी पार्टी के तीन विधायकों के भाजपा में शामिल होने को लेकर भी सुरेश खन्ना ने विपक्षी दल पर निशाना साधा। उन्होंने सपा की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी एक डूबता हुआ जहाज है। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि डूबते हुए जहाज पर आखिर कौन बैठना चाहेगा? सुरेश खन्ना ने यह भी दावा किया कि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी के कुछ और नेता पार्टी छोड़ सकते हैं। उनके इस बयान से प्रदेश की राजनीति में दल-बदल और विपक्षी दलों की स्थिति को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। यूपी की राजनीति में बयानबाजी तेज उत्तर प्रदेश में भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। सुरेश खन्ना के बयान में एक तरफ कांग्रेस के विरोध की आलोचना की गई, तो दूसरी तरफ सपा में नेताओं के पार्टी छोड़ने को लेकर निशाना साधा गया। मुख्य बात यह है कि भाजपा नेता ने संवैधानिक संस्थाओं के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा और सपा के तीन विधायकों के भाजपा में शामिल होने को लेकर पार्टी की स्थिति पर सवाल उठाए। हालांकि, सपा के भविष्य में और नेताओं के पार्टी छोड़ने संबंधी उनका दावा फिलहाल एक राजनीतिक बयान है। इस पर आगे की घटनाओं से ही स्थिति स्पष्ट होगी।
अमेठी में सपा को झटका? विधायक राकेश प्रताप सिंह ने BJP में शामिल होने का किया ऐलान, 1000 जनप्रतिनिधियों के आने का दावा

अमेठी, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दल-बदल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अमेठी जिले के गौरीगंज से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक राकेश प्रताप सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि उनके साथ बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और पूर्व जनप्रतिनिधि भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उनके इस बयान से प्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा हो गई है। क्षेत्र के लोगों का समर्थन मिलने का किया दावा राकेश प्रताप सिंह ने भाजपा में शामिल होने के फैसले पर अपने क्षेत्र के लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रवासियों ने उनका समर्थन किया और उनसे भाजपा की सदस्यता लेने का आग्रह किया। विधायक के मुताबिक, लोगों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे इस फैसले में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके क्षेत्र में बूथ स्तर पर समाजवादी पार्टी के लिए काम करने वाले करीब 98 प्रतिशत लोग पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होंगे। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए अलग से जानकारी उपलब्ध होना जरूरी है। तीन विधायकों के भाजपा में जाने की बात कही विधायक राकेश प्रताप सिंह ने अपने बयान में कहा कि विधायक विनोद चतुर्वेदी, अभय सिंह और वह स्वयं भाजपा में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस मौके पर बड़ी संख्या में दूसरे लोग भी पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं। राकेश प्रताप सिंह के अनुसार, करीब 1,000 जनप्रतिनिधि और पूर्व जनप्रतिनिधि भाजपा में शामिल होंगे। उन्होंने मंच पर लगभग एक दर्जन विधायकों की मौजूदगी की बात भी कही। हालांकि, इन सभी लोगों के औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होने की पुष्टि सदस्यता कार्यक्रम और संबंधित आधिकारिक जानकारी से ही होगी। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों के बीच नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिशें लगातार चर्चा में रहती हैं। ऐसे में सपा विधायक के भाजपा में शामिल होने की घोषणा को दोनों दलों के राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है। फिलहाल, राकेश प्रताप सिंह के बयान में किए गए दावों और संभावित रूप से भाजपा में शामिल होने वाले लोगों की संख्या पर आगे की आधिकारिक जानकारी का इंतजार रहेगा। सदस्यता कार्यक्रम के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि उनके साथ कितने जनप्रतिनिधि और पूर्व जनप्रतिनिधि वास्तव में भाजपा में शामिल हुए। मुख्य बातें: गौरीगंज के सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह ने भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया। उन्होंने करीब 1,000 वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों के शामिल होने का दावा किया। विनोद चतुर्वेदी और अभय सिंह के भी भाजपा में शामिल होने की बात कही। बूथ स्तर पर सपा छोड़ने वालों को लेकर विधायक ने बड़ा दावा किया, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि बाकी है।
DELHI NEWS;अखिलेश यादव का बयान: पुलिस को आगे करने और जंतर-मंतर को लेकर उठाए सवाल

अखिलेश यादव का बयान; दिल्ली: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने पुलिस की भूमिका और जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद को कमजोर महसूस करते हैं या अपनी गलती छिपाना चाहते हैं, वे पुलिस को आगे करते हैं। अखिलेश यादव के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में पुलिस की भूमिका और विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को लेकर चर्चा को केंद्र में ला दिया है। अखिलेश यादव ने पुलिस को आगे करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा करने वाले लोग जानते हैं कि वे गलत हैं। उनके मुताबिक, अपनी गलती छिपाने के लिए पुलिस बल का सहारा लिया जाता है। उनके इस बयान को कानून-व्यवस्था और विरोध की आवाज को लेकर उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। जंतर-मंतर को लेकर क्या बोले अखिलेश यादव? जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मुद्दे पर भी सपा प्रमुख ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर ही खत्म हुआ है, लेकिन लोकतंत्र में धरना देने और प्रदर्शन करने का अधिकार समाप्त नहीं हुआ है। अखिलेश यादव ने कहा कि लोग जहां भी धरना देंगे, वही जगह जंतर-मंतर बन जाएगी। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध दर्ज कराने के लिए किसी एक स्थान का होना ही जरूरी नहीं है। यदि किसी जगह पर प्रदर्शन नहीं हो पाता है, तो दूसरी जगह भी लोग अपनी आवाज उठा सकते हैं। लोकतंत्र में प्रदर्शन के अधिकार पर जोर अखिलेश यादव की टिप्पणी में धरना-प्रदर्शन के अधिकार को प्रमुखता दी गई। उन्होंने संकेत दिया कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी मांगों और असहमति को सामने रखने का अवसर मिलना चाहिए। जंतर-मंतर का उल्लेख करते हुए उन्होंने विरोध के लिए स्थान से अधिक उसके उद्देश्य और अधिकार को महत्वपूर्ण बताया। मुख्य बातें: अखिलेश यादव ने पुलिस को आगे करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपनी गलती छिपाने के लिए पुलिस बल का सहारा लेते हैं। जंतर-मंतर को लेकर उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन का लोकतांत्रिक अधिकार खत्म नहीं हुआ है। सपा प्रमुख ने कहा कि लोग जहां प्रदर्शन करेंगे, वही जगह जंतर-मंतर बन जाएगी। अखिलेश यादव का यह बयान पुलिस की भूमिका और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को लेकर उनकी राजनीतिक राय को सामने रखता है।