शायना एनसी का ममता बनर्जी पर हमला, बोलीं- जंतर-मंतर पर नौटंकी बंद कीजिए

मुंबई: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना नेता शायना एनसी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उनसे पहले पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और कथित फर्जी मतदाताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए। शायना एनसी ने अपने बयान में दावा किया कि पश्चिम बंगाल में 60 लाख फर्जी वोट थे। हालांकि, यह आंकड़ा उनके बयान में किया गया दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक आंकड़ों और दस्तावेजों को देखना जरूरी है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर साधा निशाना शायना एनसी ने कहा कि ममता बनर्जी जंतर-मंतर आकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे मौजूद हैं, तो ममता बनर्जी को पहले अपने राज्य की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। शिवसेना नेता ने अपने बयान में ममता बनर्जी के आंदोलन पर भी टिप्पणी की और कहा कि उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के बजाय बंगाल में SIR से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने इस राजनीतिक पहल को लेकर कड़ी आलोचना करते हुए कहा, “जंतर-मंतर पर नौटंकी बंद कीजिए।” बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर भी लगाया आरोप अपने बयान के दौरान शायना एनसी ने बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी का आंदोलन ऐसे लोगों को बचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह शायना एनसी का राजनीतिक आरोप है। इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए स्वतंत्र प्रमाण और संबंधित तथ्यों की जांच आवश्यक है। SIR पर सियासी टकराव तेज मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच पहले से ही बहस जारी है। एक ओर इस प्रक्रिया को चुनावी सूची की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके क्रियान्वयन और मतदाताओं पर संभावित प्रभाव को लेकर राजनीतिक सवाल उठाए जा रहे हैं। शायना एनसी के ताजा बयान से इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिलते हैं। अब देखना होगा कि ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल, यह मामला चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में बना हुआ है।