LACKNOW NEWS:INDIA गठबंधन के प्रदर्शन पर सुरेश खन्ना का हमला, बोले- संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ आंदोलन लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश

सुरेश खन्ना का INDIA गठबंधन पर हमला: लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सुरेश खन्ना ने INDIA गठबंधन के विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज पर सवाल उठाने से पहले राजनीतिक दलों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। खन्ना के मुताबिक, चुनाव आयोग का प्रमुख दायित्व मतदाता सूची को दुरुस्त रखना और पात्र मतदाताओं के नाम इसमें शामिल करना है। चुनाव आयोग के समर्थन में क्या बोले सुरेश खन्ना? मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि निर्वाचन आयोग संवैधानिक व्यवस्था के तहत काम करता है। उत्तर प्रदेश में भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति इसी व्यवस्था के अंतर्गत की गई है। ऐसे में किसी संस्था या उसके कामकाज पर बिना उचित आधार के आरोप लगाना सही नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योग्य मतदाताओं के नाम सूची में शामिल हों और मतदाता सूची अधिक सटीक व त्रुटिरहित बने। ‘मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध होनी चाहिए’ सुरेश खन्ना ने कहा कि एक नागरिक के तौर पर वह भी चाहेंगे कि मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध हो। लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची की विश्वसनीयता बेहद जरूरी है। इसके लिए निर्वाचन आयोग समय-समय पर सूची के पुनरीक्षण का काम करता है। उन्होंने संकेत दिया कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया को राजनीतिक विवाद के बजाय लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए। राजनीतिक दलों को दी नसीहत INDIA गठबंधन के विरोध-प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए खन्ना ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ आंदोलन करना लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश जैसा है। उन्होंने जिम्मेदार राजनीतिक दलों और खासकर उनके प्रमुख नेताओं से अपील की कि वे ऐसे हालात पैदा करने से बचें, जिनसे संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हों। मंत्री के इस बयान से स्पष्ट है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। जहां सुरेश खन्ना ने निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया का समर्थन किया, वहीं INDIA गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर उन्होंने विपक्षी दलों की रणनीति पर सवाल उठाए। मुख्य बात: सुरेश खन्ना ने मतदाता सूची के शुद्धिकरण को जरूरी बताते हुए चुनाव आयोग का समर्थन किया और राजनीतिक दलों से संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदार रवैया अपनाने की अपील की।

सुरेश खन्ना का कांग्रेस पर हमला, बोले- संवैधानिक संस्थाओं का विरोध लोकतंत्र को कमजोर करता है; सपा को बताया डूबता जहाज

सुरेश खन्ना का कांग्रेस पर हमला; लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सुरेश खन्ना ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का विरोध करना देश के लोकतंत्र को कमजोर करने जैसा है। कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए उन्होंने इसे गलत कदम बताया और कहा कि इस तरह के विरोध से पार्टी को सफलता नहीं मिलने वाली है। वहीं, सपा के तीन विधायकों के भाजपा में शामिल होने के मुद्दे पर उन्होंने समाजवादी पार्टी को डूबते हुए जहाज की संज्ञा दी। संवैधानिक संस्थाओं के विरोध पर कांग्रेस को घेरा मंत्री सुरेश खन्ना ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाएं देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसी संस्थाओं का विरोध करने से लोकतंत्र की मजबूती पर असर पड़ता है। उनके मुताबिक, कांग्रेस का यह कदम उचित नहीं है और पार्टी को इससे कोई राजनीतिक सफलता नहीं मिलेगी। उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक गतिविधियों के बीच कांग्रेस पर भाजपा के हमले के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मंत्री ने अपने बयान में जिस विरोध का जिक्र किया, उसके संदर्भ में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। सपा के तीन विधायकों के भाजपा में जाने पर तंज समाजवादी पार्टी के तीन विधायकों के भाजपा में शामिल होने को लेकर भी सुरेश खन्ना ने विपक्षी दल पर निशाना साधा। उन्होंने सपा की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी एक डूबता हुआ जहाज है। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि डूबते हुए जहाज पर आखिर कौन बैठना चाहेगा? सुरेश खन्ना ने यह भी दावा किया कि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी के कुछ और नेता पार्टी छोड़ सकते हैं। उनके इस बयान से प्रदेश की राजनीति में दल-बदल और विपक्षी दलों की स्थिति को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। यूपी की राजनीति में बयानबाजी तेज उत्तर प्रदेश में भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। सुरेश खन्ना के बयान में एक तरफ कांग्रेस के विरोध की आलोचना की गई, तो दूसरी तरफ सपा में नेताओं के पार्टी छोड़ने को लेकर निशाना साधा गया। मुख्य बात यह है कि भाजपा नेता ने संवैधानिक संस्थाओं के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा और सपा के तीन विधायकों के भाजपा में शामिल होने को लेकर पार्टी की स्थिति पर सवाल उठाए। हालांकि, सपा के भविष्य में और नेताओं के पार्टी छोड़ने संबंधी उनका दावा फिलहाल एक राजनीतिक बयान है। इस पर आगे की घटनाओं से ही स्थिति स्पष्ट होगी।