मतदाता सूची विवाद: राहुल गांधी समेत विपक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, याचिका पर सुनवाई अटकी

मतदाता सूची विवाद; नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के 11 नेताओं ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए हैं। मतदाता सूची विवाद क्या हैं विपक्ष के आरोप? विपक्ष की याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता और उचित सुरक्षा उपायों की कमी हो सकती है। याचिकाकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निर्णय प्रक्रिया, मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में कथित बदलाव और चुनावी डेटाबेस के संचालन पर भी सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े फैसलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि किसी भी योग्य नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो। हालांकि, ये याचिकाकर्ताओं के आरोप हैं और इन पर अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई? याचिका में मतदाता सूची में हुए बदलावों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की गई है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। विपक्ष ने बूथवार हटाए गए नामों और उनके कारणों को सार्वजनिक करने तथा गलत तरीके से नाम हटाए जाने की स्थिति में उन्हें बहाल करने की प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की है। फिलहाल क्यों अटकी सुनवाई? 13 अक्टूबर को याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने दाखिले से जुड़ी 14 प्रक्रियागत कमियां बताई हैं। इनमें कुछ वकालतनामों का नहीं होना, दस्तावेजों की अस्पष्ट प्रतियां और 220 रुपये की कोर्ट फीस कम जमा होना शामिल है। ये आपत्तियां याचिका की प्रक्रिया से संबंधित हैं, न कि उसके आरोपों पर अदालत का फैसला। अब इन कमियों को दूर कर याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने की कोशिश की जाएगी। इस मामले में आगे की कार्रवाई पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजर बनी हुई है।
उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान: CEC के खिलाफ जारी रहेगा विरोध, UCC पर भी साफ किया रुख

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चुनाव आयोग, मतदाता सूची और यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि INDIA ब्लॉक के सांसदों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ शुरू किया गया विरोध आगे भी जारी रहेगा। उमर अब्दुल्ला ने यह बात ऐसे समय कही है, जब विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि आज INDIA ब्लॉक के सांसदों ने CEC के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। उन्होंने संकेत दिया कि यह विरोध यहीं खत्म होने वाला नहीं है और आगे भी जारी रहेगा। उनके मुताबिक, विपक्ष की मुख्य चिंता इस बात को लेकर है कि मतदाता सूची से लोगों के नाम किस आधार पर हटाए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। ऐसे में मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया और उसके आधार को लेकर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची बेहद महत्वपूर्ण होती है और इससे जुड़े सवालों का जवाब मिलना चाहिए। UCC पर भी उमर अब्दुल्ला का स्पष्ट रुख उमर अब्दुल्ला ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर भी अपनी सरकार और जम्मू-कश्मीर का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कोई कानून तब तक वास्तव में ‘यूनिफॉर्म’ नहीं माना जा सकता, जब तक वह हर जगह समान रूप से लागू न हो। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जम्मू-कश्मीर में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर संसद में व्यापक चर्चा की जरूरत बताई। उमर अब्दुल्ला के मुताबिक, इतने महत्वपूर्ण विषय पर देश के सर्वोच्च सदन में गंभीर बहस होनी चाहिए। उनके बयान से साफ है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची और UCC जैसे मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक बहस के प्रमुख विषय बने रह सकते हैं। विपक्ष जहां चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठा रहा है, वहीं UCC को लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लगातार सामने आ रहे हैं।