दक्षिण भारत की कृषि चुनौतियों पर हैदराबाद में मंथन, शिवराज सिंह चौहान बोले- मिलकर बनाएंगे रबी फसल की रणनीति

हैदराबाद: दक्षिण क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों का समाधान निकालने की दिशा में काम कर रही हैं। हैदराबाद में आयोजित सम्मेलन में दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत में अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु, मिट्टी और कृषि परिस्थितियां काफी भिन्न हैं। ऐसे में पूरे देश के लिए एक जैसी कृषि रणनीति बनाना हर क्षेत्र की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता। इसी वजह से क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों के जरिए स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर रबी फसल की तैयारी और योजनाओं पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने दक्षिणी राज्यों में कम बारिश और El Niño के प्रभाव का भी उल्लेख किया। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, कम वर्षा वाले जिलों के लिए आकस्मिक कृषि योजनाएं तैयार की गई हैं, जिन्हें संबंधित राज्य सरकारों के साथ साझा किया जाएगा। सम्मेलन में रबी फसल के लिए आवश्यक तैयारियों के साथ-साथ राज्यों की ओर से केंद्र से अपेक्षित सहयोग पर भी चर्चा होगी। तेलंगाना में फसल विविधीकरण की सराहना करते हुए चौहान ने कहा कि राज्य में धान के साथ दलहन, तिलहन और पाम ऑयल जैसी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने फल, सब्जियों और बागवानी क्षेत्र के विस्तार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। सम्मेलन में पल्स मिशन (Pulses Mission) और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन पर भी चर्चा हो रही है। किसानों को डिजिटल सेवाओं का लाभ पहुंचाने के लिए Farmer ID तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री ने मिट्टी की सेहत को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता और नकली या घटिया कीटनाशकों पर रोक जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर ऐसी कृषि रणनीति तैयार करेंगे, जिससे किसानों को बेहतर सहयोग मिले और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
कर्नाटक में iPhone 18 सीरीज की बिक्री शुरू, Apple Store में उमड़ी खरीदारों की भीड़

बेंगलुरु: टेक्नोलॉजी और स्मार्टफोन बाजार में लंबे समय से चर्चा में रही iPhone 18 सीरीज की बिक्री अब शुरू हो गई है। कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित Apple Store, हेब्बाल में नए आईफोन को खरीदने के लिए ग्राहकों की मौजूदगी देखने को मिली। बिक्री शुरू होने के साथ ही स्टोर के आसपास नए मॉडल को लेकर लोगों में खासा उत्साह नजर आया। iPhone 18 सीरीज की लॉन्चिंग के बाद से ही इसके नए फीचर्स, डिजाइन और कलर विकल्पों को लेकर ग्राहकों के बीच दिलचस्पी बनी हुई थी। बिक्री शुरू होते ही कई ग्राहक स्टोर पहुंचकर अपनी पसंद का मॉडल खरीदते नजर आए। Apple Store से सामने आए वीडियो में भी नए आईफोन को लेकर ग्राहकों की उत्सुकता दिखाई दे रही है। एक ग्राहक ने बताया कि वह पिछले करीब चार वर्षों से iPhone का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका पहला नया खरीदा गया iPhone 14 Pro Max था। अब उन्होंने iPhone 18 सीरीज में Burgundy कलर का विकल्प चुना है। ग्राहक के मुताबिक, वह अब तक कुल चार iPhone खरीद चुके हैं। ग्राहक की यह प्रतिक्रिया बताती है कि Apple के नए मॉडल को लेकर उसके नियमित यूजर्स में किस तरह की रुचि बनी हुई है। खास तौर पर नए रंग और अपग्रेडेड मॉडल ग्राहकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। iPhone सीरीज की नई पीढ़ी की बिक्री शुरू होने के साथ ही आने वाले दिनों में इसके बाजार प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। Apple के नए स्मार्टफोन आमतौर पर प्रीमियम सेगमेंट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराते हैं और नए मॉडल के साथ कंपनी के प्रशंसकों के बीच खरीदारी को लेकर उत्साह देखने को मिलता है। फिलहाल, बेंगलुरु के हेब्बाल स्थित Apple Store से सामने आई तस्वीरें और वीडियो नए iPhone को लेकर ग्राहकों की दिलचस्पी को दिखा रहे हैं। आने वाले दिनों में अलग-अलग शहरों में भी नए मॉडल की बिक्री और ग्राहकों की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले TMC को बड़ा झटका, नाम और चुनाव चिन्ह पर EC का बड़ा फैसला

पटना/कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर बड़ा अंतरिम फैसला लिया है। आयोग ने आगामी विधानसभा उपचुनाव में TMC के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक दोनों गुटों को उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प देने होंगे। दोनों पक्षों से 18 सितंबर की सुबह 11 बजे तक तीन-तीन नाम और तीन-तीन मुक्त चुनाव चिन्ह प्राथमिकता के क्रम में सुझाने को कहा गया है। इसके बाद आयोग प्रत्येक गुट के लिए नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित करेगा। यह विवाद पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले सामने आया है। दोनों गुट पार्टी की आधिकारिक पहचान और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा कर रहे हैं। आयोग ने फिलहाल अंतिम तौर पर यह तय नहीं किया है कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार किस पक्ष का होगा। अंतिम निर्णय चुनाव चिन्ह संबंधी नियमों के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा। इस फैसले पर बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने प्रतिक्रिया देते हुए TMC के भीतर हुई टूट का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के कई सांसद और विधायक दूसरे दलों में चले गए हैं और मौजूदा राजनीतिक स्थिति में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के सामने संगठनात्मक चुनौती है। सरावगी ने कहा कि चुनाव आयोग को नियमों के तहत नाम और चुनाव चिन्ह पर फैसला लेने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि जो पक्ष पुराने चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव मैदान में उतरने की कोशिश करेगा, उसके लिए राजनीतिक स्थिति चुनौतीपूर्ण होगी। हालांकि, यह सरावगी का राजनीतिक आकलन है। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद अब दोनों गुटों की नजर नए नाम और चुनाव चिन्ह के आवंटन पर है। आगामी उपचुनावों में दोनों पक्ष किस पहचान के साथ मैदान में उतरेंगे, यह आयोग के अगले फैसले से स्पष्ट होगा।