तेज प्रताप यादव ने सरकार से फिर मांगी सुरक्षा, बोले- मेरी और सुरक्षाकर्मी की जान को खतरा

तेज प्रताप यादव सुरक्षा; तेज प्रताप ने फिर मांगी सुरक्षा, सरकार से जल्द कदम उठाने की अपील बिहार की राजनीति में एक बार फिर तेज प्रताप यादव ने अपनी सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने केंद्र सरकार और बिहार सरकार से पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने की मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि रियलिटी शो ‘Rise and Fall 2’ में काम करके लौटने के बाद उनकी लोकप्रियता में काफी इजाफा हुआ है। अब जहां भी वह जाते हैं, वहां उनसे मिलने और तस्वीर खिंचवाने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुट जाते हैं। तेज प्रताप यादव के मुताबिक, कई बार सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ उन्हें चारों तरफ से घेर लेती है। ऐसी स्थिति में उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं। केवल एक सुरक्षाकर्मी मिलने पर जताई चिंता तेज प्रताप यादव ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान में बिहार सरकार की ओर से उन्हें केवल एक सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराया गया है। उनके अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए यह सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि भीड़ के बीच उनके साथ तैनात सुरक्षाकर्मी की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। यहां तक कि भीड़ द्वारा सुरक्षाकर्मी को घेरने या उसका सरकारी हथियार छीनने जैसी गंभीर घटना की आशंका से भी उन्होंने इनकार नहीं किया। सरकार से पूछा- किसी अनहोनी का इंतजार क्यों? तेज प्रताप यादव ने बताया कि वह अपनी सुरक्षा को लेकर केंद्र और बिहार सरकार को कई बार मौखिक रूप से जानकारी दे चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने पत्र लिखकर भी सुरक्षा बढ़ाने का अनुरोध किया है। हालांकि, उनके मुताबिक अब तक सुरक्षा व्यवस्था में कोई जरूरी बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि अगर भविष्य में उनके साथ या उनके सुरक्षाकर्मी के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या सरकार किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है? तत्काल सुरक्षा बढ़ाने की मांग जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने केंद्र सरकार और बिहार सरकार से मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी और अपने सुरक्षाकर्मी की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं। तेज प्रताप यादव की इस मांग के बाद अब देखना होगा कि केंद्र और बिहार सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाती हैं।

विदेशी निवेशकों को LTCG टैक्स से राहत देने की तैयारी, SEBI ने दिया बड़ा प्रस्ताव

SEBI LTCG Tax Proposal: SEBI का प्रस्ताव, पुराने निवेश से नए निवेश पर मिल सकती है टैक्स छूट! भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक अहम प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत विदेशी निवेशकों को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स से राहत देने पर विचार किया जा रहा है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो भारतीय बाजार में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को बड़ी टैक्स राहत मिल सकती है। SEBI का प्रस्ताव क्या है? SEBI के प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश को अधिक आकर्षक बनाना है। इसके तहत विदेशी निवेशकों को अपने मौजूदा निवेश (Existing Holdings) को बेचकर उससे प्राप्त रकम को नए निवेश में लगाने पर टैक्स छूट देने का प्रस्ताव शामिल है। यानी अगर कोई विदेशी निवेशक अपने पुराने शेयर या अन्य निवेश बेचता है और बिक्री से मिली रकम को दोबारा नए शेयरों या दूसरी पात्र निवेश परिसंपत्तियों में लगाता है, तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिल सकती है। हालांकि, यह प्रस्ताव है और इसकी अंतिम शर्तें तथा पात्रता संबंधित सरकारी निर्णयों पर निर्भर करेंगी। विदेशी निवेशकों को कैसे मिलेगा फायदा? इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि विदेशी निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करने में अधिक सुविधा मिलेगी। फिलहाल निवेश बेचने पर होने वाले मुनाफे पर लागू टैक्स निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकता है। प्रस्तावित छूट से निवेशक बिना तत्काल LTCG टैक्स के बोझ के अपने निवेश को नए अवसरों की ओर स्थानांतरित कर सकेंगे। भारतीय शेयर बाजार पर क्या होगा असर? SEBI की इस पहल का उद्देश्य भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य बनाना है। टैक्स संबंधी राहत मिलने से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा बाजार में निवेश की तरलता और पूंजी प्रवाह को भी समर्थन मिल सकता है। फिलहाल प्रस्ताव पर नजर हालांकि, अभी इसे अंतिम टैक्स छूट या लागू नियम नहीं माना जाना चाहिए। SEBI के प्रस्ताव पर आगे होने वाले फैसले और सरकार की मंजूरी अहम होगी। विदेशी निवेशकों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार के लिए भी इस प्रस्ताव का संभावित असर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

New Honda Elevate: दमदार SUV डिजाइन, शानदार कम्फर्ट और एडवांस फीचर्स के साथ हुई पेश

New Honda Elevate: बोल्ड डिजाइन और एडवांस फीचर्स के साथ नई Honda Elevate पेश! भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में Honda ने अपनी लोकप्रिय SUV Honda Elevate को नए अंदाज और आकर्षक पहचान के साथ पेश किया है। कंपनी की ओर से जारी संदेश में नई Honda Elevate को बोल्ड डिजाइन, शानदार कम्फर्ट और एडवांस फीचर्स का बेहतरीन मेल बताया गया है। यह SUV उन ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जो अपने सफर में स्टाइल, आराम और दमदार परफॉर्मेंस को प्राथमिकता देते हैं। नई Honda Elevate का डिजाइन बना खास आकर्षण नई Honda Elevate का सबसे बड़ा आकर्षण इसका रग्ड और बोल्ड एक्सटीरियर डिजाइन है। SUV का मजबूत लुक इसे सड़क पर एक अलग पहचान देने में मदद करता है। इसका डिजाइन खास तौर पर उन लोगों को पसंद आ सकता है, जो अपनी गाड़ी में प्रीमियम स्टाइल के साथ दमदार SUV वाली मौजूदगी चाहते हैं। लंबे सफर में मिलेगा बेहतर कम्फर्ट Honda ने नई Elevate में रिफाइंड कम्फर्ट पर भी जोर दिया है। कंपनी का उद्देश्य ड्राइवर और यात्रियों को आरामदायक सफर का अनुभव देना है। चाहे रोजाना शहर में ड्राइविंग करनी हो या परिवार के साथ लंबी दूरी की यात्रा, SUV का कम्फर्ट इसे एक आकर्षक विकल्प बनाता है। एडवांस फीचर्स से मिलेगी आधुनिक ड्राइविंग की सुविधा नई Honda Elevate में एडवांस फीचर्स को भी खास महत्व दिया गया है। आधुनिक ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने इसे बेहतर ड्राइविंग अनुभव और सुविधाजनक सफर के कॉन्सेप्ट के साथ पेश किया है। हालांकि, कंपनी के इस प्रमोशनल संदेश में सभी नए फीचर्स और तकनीकी बदलावों की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। SUV सेगमेंट में Honda की मजबूत दावेदारी भारतीय बाजार में SUV की मांग लगातार बनी हुई है। ऐसे में Honda Elevate का नया बोल्ड अंदाज ग्राहकों का ध्यान आकर्षित कर सकता है। आकर्षक डिजाइन, रिफाइंड कम्फर्ट और आधुनिक फीचर्स के साथ यह SUV अपने सेगमेंट में कंपनी की मौजूदगी को और मजबूत करने की कोशिश करेगी। Honda का संदेश साफ है – All New. All Bold. यानी नई पहचान, दमदार अंदाज और रोमांचक सफर का अनुभव। अब ग्राहकों की नजरें इसके नए अपडेट, फीचर्स, कीमत और उपलब्धता से जुड़ी आधिकारिक जानकारी पर रहेंगी।

दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों को लेकर CAIT की LG से मांग, बाहरी इलाकों में तय हों विरोध स्थल

दिल्ली में प्रदर्शन स्थल: दिल्ली के बाहरी इलाकों में तय हों प्रदर्शन स्थल नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन और धरना स्थलों को लेकर एक बार फिर नई मांग सामने आई है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को पत्र लिखकर शहर के बाहरी इलाकों में निर्धारित प्रदर्शन स्थलों को अधिसूचित करने का अनुरोध किया है। संगठन का मानना है कि प्रदर्शन के लिए निश्चित स्थान तय होने से राजधानी में यातायात और आम लोगों की आवाजाही से जुड़ी परेशानियों को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। CAIT ने LG को पत्र लिखकर रखी मांग CAIT ने अपने पत्र में दिल्ली के उपराज्यपाल से आग्रह किया है कि राजधानी के बाहरी क्षेत्रों में विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान कर उन्हें आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया जाए। संगठन चाहता है कि प्रदर्शनकारियों को अपनी मांग रखने के लिए निर्धारित जगह उपलब्ध हो, ताकि शहर के प्रमुख और व्यस्त इलाकों में होने वाले प्रदर्शनों को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सके। व्यापारियों और आम लोगों को मिल सकती है राहत दिल्ली देश की प्रमुख व्यापारिक और प्रशासनिक राजधानी है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग कामकाज, कारोबार और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं। ऐसे में प्रमुख सड़कों और बाजारों के आसपास होने वाले धरना-प्रदर्शनों का असर यातायात और व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। CAIT की इस मांग का मुख्य उद्देश्य प्रदर्शन के लिए अलग और निर्धारित स्थानों की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इससे प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा और दूसरी तरफ आम नागरिकों तथा व्यापारियों की रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित होने से बचाने में मदद मिल सकती है। प्रदर्शन और यातायात के बीच संतुलन बनाने की पहल लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार है। वहीं, सार्वजनिक स्थानों, यातायात और आम लोगों की सुविधाओं का ध्यान रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की अधिसूचना से इन दोनों पहलुओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की संभावना है। अब देखना होगा कि दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और संबंधित प्रशासन CAIT की इस मांग पर क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, संगठन ने पत्र के माध्यम से अपनी मांग प्रशासन के सामने रख दी है। दिल्ली में प्रदर्शन स्थलों को लेकर CAIT की यह मांग आने वाले दिनों में चर्चा का विषय बन सकती है।

बेगूसराय में NDA की पदयात्रा, राम कृपाल यादव बोले- कांग्रेस लोकतंत्र की हत्यारी

बेगूसराय NDA पदयात्रा: पदयात्रा के जरिए NDA ने दर्ज कराया विरोध बेगूसराय: बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। बेगूसराय में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से पदयात्रा का आयोजन किया गया। इस पदयात्रा में NDA के विभिन्न घटक दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। बिहार सरकार के मंत्री राम कृपाल यादव ने भी इसमें हिस्सा लिया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र की हत्यारी है और इसी के विरोध में NDA आज सड़क पर उतरकर पदयात्रा कर रहा है। गिरिराज सिंह के नेतृत्व में निकलेगी पदयात्रा मंत्री राम कृपाल यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि बेगूसराय में आयोजित इस पदयात्रा में NDA के सभी दलों के नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के नेतृत्व में यह मार्च निकाला जाएगा। इस कार्यक्रम के जरिए गठबंधन अपनी राजनीतिक एकजुटता और विरोध दर्ज करा रहा है। कांग्रेस पर राम कृपाल यादव का हमला राम कृपाल यादव ने कांग्रेस पार्टी को निशाने पर लेते हुए कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र की हत्यारी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विरोध में ही NDA के नेता और कार्यकर्ता पदयात्रा कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस और NDA के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा चर्चा में आ गया है। NDA के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी बेगूसराय में आयोजित इस पदयात्रा में NDA के विभिन्न सहयोगी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस मार्च को लेकर गठबंधन के नेताओं ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। इस कार्यक्रम के माध्यम से NDA नेताओं ने कांग्रेस के खिलाफ अपना राजनीतिक विरोध दर्ज कराया। वहीं, राम कृपाल यादव के बयान ने इस पदयात्रा को सियासी चर्चा का विषय बना दिया है। फिलहाल बेगूसराय की यह पदयात्रा बिहार की राजनीति में NDA और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक बयानबाजी को लेकर चर्चा में है।

SIR पर संबित पात्रा का कांग्रेस पर हमला, बोले- कांग्रेस के समय 10 बार हुआ SIR

SIR पर संबित पात्रा का बयान: कांग्रेस के शासनकाल में 10 बार हुआ SIR: संबित पात्रा वाराणसी, उत्तर प्रदेश: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए SIR प्रक्रिया का बचाव किया। वाराणसी में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का समय-समय पर पुनरीक्षण करना एक सामान्य और जरूरी प्रक्रिया है। इसके जरिए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं और जिनके नाम हटाए जाने चाहिए, उन्हें सूची से हटाया जाता है। कांग्रेस के कार्यकाल में भी 10 बार हुआ SIR संबित पात्रा ने अपने बयान में कहा कि यह देश में होने वाला 12वां SIR है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में 10 बार विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया हुई, जबकि भाजपा सरकार के कार्यकाल में दो बार यह प्रक्रिया पूरी की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस की सरकार के समय SIR कराया गया, तब किसी को आपत्ति नहीं थी, लेकिन वर्तमान सरकार के दौरान यही प्रक्रिया होने पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं? मतदाता सूची के शुद्धीकरण को बताया जरूरी भाजपा सांसद ने कहा कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समय-समय पर इसमें बदलाव की जरूरत पड़ती है, ताकि सही मतदाताओं के नाम सूची में शामिल रहें। उन्होंने SIR को मतदाता सूची के शुद्धीकरण की प्रक्रिया बताते हुए कहा कि इस पर राजनीतिक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। 13 करोड़ वोट चोरी के आरोप पर उठाए सवाल संबित पात्रा ने विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे 13 करोड़ वोट चोरी के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि यदि वास्तव में इतने बड़े पैमाने पर वोट चोरी हुई होती, तो देश की स्थिति कैसी होती? उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सड़कों पर भारी संख्या में लोग दिखाई देते और देशभर में आंदोलन हो रहे होते। SIR को लेकर सियासी घमासान जारी SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है। विपक्ष जहां मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा इसे चुनावी व्यवस्था को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया बता रही है। फिलहाल SIR का मुद्दा राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना हुआ है। संबित पात्रा के इस बयान के बाद एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है।

BIHAR NEWS: भागलपुर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा, BJP अध्यक्ष नितिन नवीन हुए शामिल

भागलपुर पदयात्रा: भागलपुर में लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा का आयोजन भागलपुर (बिहार): बिहार के भागलपुर में सत्ता पक्ष की ओर से ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद हैं। उनकी मौजूदगी से इस पदयात्रा को राजनीतिक रूप से खास अहमियत मिल रही है। इस पदयात्रा के जरिए सत्ता पक्ष की ओर से लोकतंत्र की मजबूती, राजनीतिक व्यवस्था और प्रदेश में कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर अपनी बात रखी जा रही है। कार्यक्रम में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी देखने को मिल रही है। पदयात्रा के माध्यम से आम लोगों तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने और संगठन की सक्रियता प्रदर्शित करने की कोशिश की जा रही है। नितिन नवीन की मौजूदगी से कार्यक्रम को मिली अहमियत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की भागीदारी इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण है। उनके शामिल होने से स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल है। पार्टी नेतृत्व की मौजूदगी को संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ है पदयात्रा का संदेश इस पदयात्रा का नाम ही इसके मुख्य राजनीतिक संदेश को दर्शाता है। सत्ता पक्ष इस अभियान के जरिए लोकतंत्र और व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच उठाने का प्रयास कर रहा है। भागलपुर में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए राजनीतिक गतिविधियों को नई गति देने की कोशिश भी दिखाई दे रही है। बिहार की राजनीति में बढ़ेगी हलचल? बिहार में लगातार बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भागलपुर की यह पदयात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है। नितिन नवीन की मौजूदगी से कार्यक्रम को राज्य स्तर पर भी राजनीतिक महत्व मिल रहा है। अब देखना होगा कि इस पदयात्रा के दौरान भाजपा और सत्ता पक्ष के नेता जनता को क्या संदेश देते हैं और उनके संबोधन में किन मुद्दों को प्रमुखता दी जाती है। भागलपुर की यह पदयात्रा फिलहाल बिहार की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण आयोजन बनी हुई है।

BIHAR NEWS: BJP ज्वाइन करने के बाद बंशीधर बृजवासी और राहुल राज की MLC सदस्यता पर संकट, सभापति से मिला जनसुराज का प्रतिनिधिमंडल

बंशीधर बृजवासी और राहुल राज की MLC सदस्यता: BJP में शामिल होने के बाद दोनों MLC की सदस्यता पर उठे सवाल, जनसुराज प्रतिनिधिमंडल ने सभापति से की मुलाकात। बिहार की राजनीति में एक बार फिर विधान परिषद की सदस्यता को लेकर हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद विधान परिषद सदस्य बंशीधर बृजवासी और राहुल राज की सदस्यता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। दोनों नेताओं के बीजेपी में जाने के बाद अब उनकी विधान परिषद सदस्यता को लेकर सियासी और कानूनी चर्चा शुरू हो गई है। इसी मामले को लेकर जनसुराज पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल बिहार विधान परिषद पहुंचा है। प्रतिनिधिमंडल ने विधान परिषद के सभापति से मुलाकात की है। फिलहाल सभापति के साथ प्रतिनिधिमंडल की बातचीत जारी है। इस मुलाकात को दोनों MLC की सदस्यता से जुड़े मामले में अहम माना जा रहा है। BJP में शामिल होने के बाद बढ़ी मुश्किलें बंशीधर बृजवासी और राहुल राज के बीजेपी में शामिल होने के बाद उनकी सदस्यता को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। जनसुराज की ओर से इस मामले को विधान परिषद के सभापति के समक्ष उठाया जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सभापति इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। सभापति से मुलाकात के बाद क्या होगा फैसला? जनसुराज का प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे पर अपनी बात रख रहा है। माना जा रहा है कि मुलाकात के दौरान दोनों MLC के दल बदल और उनकी सदस्यता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, इस मुलाकात के बाद किसी आधिकारिक फैसले की पुष्टि अभी नहीं हुई है। बिहार की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल बंशीधर बृजवासी और राहुल राज की विधान परिषद सदस्यता का मामला अब राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। यदि इस मामले में कोई बड़ा निर्णय आता है तो इसका असर बिहार की सियासत पर पड़ सकता है। फिलहाल पूरे मामले में विधान परिषद सभापति के रुख का इंतजार है। अब देखना होगा कि जनसुराज के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद दोनों MLC की सदस्यता को लेकर क्या फैसला सामने आता है। इस मामले से जुड़ी हर बड़ी अपडेट पर नजर बनी हुई है।

सोनिया गांधी ने आवास पहुंचकर जाना स्वास्थ्य का हाल, UPA सरकार के दिनों को किया याद

सोनिया गांधी की मुलाकात: सोनिया गांधी की मुलाकात, UPA सरकार के कामों की चर्चा आदरणीय श्रीमती सोनिया गांधी ने आवास पहुंचकर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त की। इस दौरान दोनों के बीच आत्मीय मुलाकात हुई और पुराने राजनीतिक दिनों की यादें भी ताजा हो गईं। मुलाकात के दौरान UPA सरकार के कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी चर्चा हुई। इस मुलाकात में खास तौर पर उन योजनाओं को याद किया गया, जिनका उद्देश्य देश के युवाओं, किसानों, जवानों और आम नागरिकों को अधिकार एवं सुविधाएं प्रदान करना था। बातचीत के दौरान बताया गया कि UPA सरकार के समय कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले लिए गए, जिनका प्रभाव देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे पर पड़ा। मनरेगा, RTI और RTE जैसे कानूनों का किया जिक्र पुराने दिनों को याद करते हुए मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम), सूचना का अधिकार (RTI) और शिक्षा का अधिकार (RTE) जैसे महत्वपूर्ण कानूनों का उल्लेख किया गया। इन कानूनों को आम जनता को सशक्त बनाने और उनके अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। मनरेगा: ग्रामीण परिवारों को रोजगार की कानूनी गारंटी देने की पहल। RTI: सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का कानून। RTE: बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देने की व्यवस्था। मनमोहन सिंह सरकार में बिहार को मिली आर्थिक मदद का जिक्र मुलाकात के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार के कार्यकाल को भी याद किया गया। विशेष रूप से बिहार के विकास के लिए किए गए आर्थिक सहयोग का उल्लेख किया गया। बातचीत में दावा किया गया कि UPA सरकार के दौरान बिहार को विकास कार्यों के लिए 1 लाख 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध कराई गई थी। इस राशि को राज्य के विकास और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के प्रयासों से जोड़कर देखा गया। पुराने रिश्तों और राजनीतिक सफर की यादें हुईं ताजा सोनिया गांधी की इस मुलाकात में केवल स्वास्थ्य संबंधी बातचीत ही नहीं हुई, बल्कि पुराने राजनीतिक अनुभवों और UPA सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियों पर भी चर्चा हुई। इस दौरान युवाओं, किसानों और आम लोगों के हित में किए गए कार्यों को याद किया गया। यह मुलाकात पुराने राजनीतिक रिश्तों, आपसी आत्मीयता और साझा अनुभवों को फिर से याद करने का एक खास अवसर बनी।

तेजस्वी यादव का बयान: विपक्षी एकजुटता पर दिया जोर, सोनिया गांधी ने लालू यादव से की मुलाकात

तेजस्वी यादव का बयान: सोनिया गांधी से लालू यादव की मुलाकात पर बोले तेजस्वी, कहा- देशभर में विपक्षी दलों को एकजुट होकर करना होगा मुकाबला। नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने विपक्षी एकजुटता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देशभर में विपक्षी दलों को एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करना होगा। जब तक विपक्ष के सभी दल एक साथ नहीं आएंगे, तब तक इस लड़ाई में सफलता हासिल करना मुश्किल होगा। तेजस्वी यादव का यह बयान INDIA ब्लॉक की एकजुटता को लेकर काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल, RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव अपने नियमित स्वास्थ्य जांच के सिलसिले में दिल्ली पहुंचे हुए हैं। इसी दौरान कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने उनसे मुलाकात की। तेजस्वी यादव ने मुलाकात की जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने एक दिन पहले ही सोनिया गांधी को लालू यादव के दिल्ली में होने की जानकारी दी थी। इसके बाद सोनिया गांधी आज उनसे मिलने पहुंचीं। लालू यादव और सोनिया गांधी के बीच पुराना राजनीतिक रिश्ता तेजस्वी यादव ने लालू प्रसाद यादव और सोनिया गांधी के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने विपरीत परिस्थितियों में एक-दूसरे का सहयोग किया है। उनके बीच काफी पुराना रिश्ता रहा है। यही वजह है कि दोनों नेताओं की मुलाकात को राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। INDIA ब्लॉक की एकजुटता पर तेजस्वी यादव का जोर INDIA ब्लॉक को लेकर पूछे गए सवाल पर तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनौती केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में विपक्षी दलों को मिलकर इसका सामना करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष के सभी नेताओं और दलों को मजबूती के साथ एक मंच पर आना होगा। तेजस्वी यादव ने कहा कि जब तक विपक्षी दल एकजुट नहीं होंगे, तब तक अपनी लड़ाई जीतना संभव नहीं है। उनके इस बयान से विपक्षी एकता और INDIA ब्लॉक को मजबूत करने की जरूरत पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल, दिल्ली में लालू यादव और सोनिया गांधी की मुलाकात के साथ तेजस्वी यादव का यह बयान बिहार समेत राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।