श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में युवाओं के रोजगार और सरकारी नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है। भाजपा नेता और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी की चिंता को प्रमुख मुद्दा बताते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या युवा आबादी की है और रोजगार से जुड़ी समस्याएं सीधे तौर पर इस वर्ग को प्रभावित कर रही हैं।
सुनील शर्मा ने अपने बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर में युवा आबादी का करीब 32 प्रतिशत हिस्सा है। उनके मुताबिक, रोजगार की पर्याप्त संभावनाएं नहीं मिलने से युवाओं के बीच चिंता और असंतोष की स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर युवाओं के भविष्य और उनके परिवारों पर भी पड़ता है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार बेरोजगार युवाओं के लिए पर्याप्त स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के बजाय आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियां करने पर अधिक निर्भर है। उन्होंने सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग के जरिए होने वाली नियुक्तियों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
सुनील शर्मा ने अपने बयान में भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार संबंधी आरोप राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और इस बयान के आधार पर उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती है। ऐसे आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित जांच, सरकारी रिकॉर्ड और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकती है।
भाजपा नेता ने जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना जरूरी है। उनका कहना है कि युवाओं को केवल अस्थायी या आउटसोर्सिंग आधारित काम तक सीमित रखने के बजाय रोजगार की स्थायी संभावनाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर में रोजगार और सरकारी भर्तियां लंबे समय से महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे रहे हैं। ऐसे में विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों के बीच भर्ती प्रक्रिया, आउटसोर्सिंग व्यवस्था और युवाओं के लिए रोजगार नीति पर सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी।