बाढ़ राहत के लिए आगे आए जनप्रतिनिधि, CM सम्राट चौधरी ने जताया आभार

 पटना। बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने की कोशिशें लगातार जारी हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री राहत कोष में जनप्रतिनिधियों की ओर से आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राहत कोष में योगदान देने वाले विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के प्रति आभार जताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए सभी का सहयोग महत्वपूर्ण है। उन्होंने राहत कोष में राशि देने वाले जनप्रतिनिधियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह सहयोग बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने में उपयोगी साबित होगा। बिहार के कई जिलों में बाढ़ की वजह से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। ऐसे में सरकार की ओर से राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रभावित इलाकों में भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य जरूरी सहायता पहुंचाने का काम चल रहा है। सरकार की ओर से बाढ़ पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद भी दी जा रही है। राहत कार्यों के लिए राजनीतिक दलों और उनके जनप्रतिनिधियों की ओर से भी सहायता का सिलसिला शुरू हुआ है। भाजपा की बिहार इकाई ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 लाख रुपये की सहायता राशि दी है। इसके अलावा पार्टी के सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों की ओर से एक महीने का वेतन राहत कोष में देने की घोषणा की गई है। वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद भी बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए अपने एक महीने का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट के समय सरकार के साथ समाज और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से राहत अभियान को और मजबूती मिलती है। उन्होंने सभी सहयोगकर्ताओं से इसी तरह जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए आगे आने की अपील की। फिलहाल बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन की टीमें प्रभावित इलाकों में लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने में जुटी हैं।

अनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद पर ललन सिंह ने साधी चुप्पी, बोले- JDU में कोई मतभेद नहीं

पटना: अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रहे विवाद को लेकर जब JDU के वरिष्ठ नेता ललन सिंह से सवाल किया गया, तो उन्होंने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। ललन सिंह ने कहा कि यह दोनों नेताओं से जुड़ा मामला है और इस पर वह क्या बोलें। ललन सिंह ने कहा कि अगर किसी को ऐसा लगता है कि उनके बोलने से अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रहा विवाद खत्म हो जाएगा, तो यह मीडिया की अपनी सोच है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि कुछ लोग अपने एजेंडे के हिसाब से इस मामले को ज्यादा तूल दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि JDU की स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है। पार्टी के भीतर किसी तरह का मतभेद नहीं है और संगठन आपसी विचार-विमर्श तथा सहमति के साथ आगे बढ़ रहा है। ललन सिंह ने दोहराया कि JDU पूरी तरह एकजुट है और नेताओं के बीच किसी तरह की अंदरूनी खींचतान की बात सही नहीं है। विवाद को ज्यादा तूल देने की बात अनंत सिंह और नीरज कुमार से जुड़े विवाद पर ललन सिंह ने इसे लेकर चल रही चर्चाओं को ज्यादा महत्व नहीं देने की बात कही। उनका कहना था कि ऐसी बातों को जरूरत से ज्यादा बढ़ाया जा रहा है, जबकि पार्टी की स्थिति स्पष्ट है। ललन सिंह के बयान से यह संकेत मिला कि JDU नेतृत्व इस पूरे मामले को व्यक्तिगत स्तर पर चल रहे विवाद के रूप में देख रहा है और इसे पार्टी के अंदर मतभेद के तौर पर स्वीकार नहीं कर रहा है। फिलहाल अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच हुई बयानबाजी को लेकर बिहार की राजनीति में चर्चा जारी है। वहीं, JDU की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि पार्टी संगठन के भीतर आपसी समन्वय और सहमति बनी हुई है।

पश्चिम बंगाल में सियासी बयानबाजी तेज, लॉकेट चटर्जी ने TMC-कांग्रेस पर साधा निशाना

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी नेता लॉकेट चटर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC), कांग्रेस और विपक्षी गठजोड़ को लेकर कई तीखी टिप्पणियां की हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य की राजनीति में TMC का प्रभाव लगातार कमजोर हुआ है और बीजेपी आगामी चुनाव में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में जनता के बीच जाएगी। लॉकेट चटर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को लेकर बीजेपी को किसी तरह की चिंता नहीं है। उन्होंने पश्चिम बंगाल को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि उनकी पार्टी सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। उन्होंने जनता से समर्थन मिलने की उम्मीद भी जताई। नंदीग्राम मामले पर क्या बोलीं लॉकेट? नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी को लेकर पूछे गए सवाल पर बीजेपी नेता ने कहा कि इस कार्रवाई का चुनाव से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना था कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ गलत काम करने का मामला दर्ज हुआ है और जांच के बाद गिरफ्तारी हुई है, तो इसे राजनीतिक चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और सीपीएम एक ही राजनीतिक मंच पर नजर आते थे और उस समय TMC के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी की सरकार में किसी भी तरह के अन्याय को स्वीकार नहीं किया जाएगा। लॉकेट चटर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल की वास्तविक राजनीतिक परिस्थितियों की जानकारी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का फोकस TMC के साथ राजनीतिक तालमेल पर है। TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर भी टिप्पणी चुनाव आयोग के फैसले को लेकर लॉकेट चटर्जी ने TMC पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पार्टी के राजनीतिक भविष्य को लेकर दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव खत्म हो चुका है। ‘खेला होबे’ के नारे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस नारे का परिणाम TMC के लिए ही नुकसानदायक रहा और पार्टी के भीतर के लोगों ने ही उसके खिलाफ राजनीतिक खेल खेल दिया। बीजेपी नेता के इन बयानों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने के संकेत हैं।

हेमंत सोरेन की मां की तबीयत बिगड़ी, रांची के अस्पताल में भर्ती

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें रांची के हिल व्यू अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि शनिवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। झारखंड सरकार में मंत्री इरफान अंसारी ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर जानकारी दी है। मंत्री इरफान अंसारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां पहले भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के चलते हैदराबाद में इलाज करा चुकी हैं। वहां इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी और वह रांची लौट आई थीं। हालांकि, शुक्रवार को उनकी तबीयत एक बार फिर खराब हो गई। इरफान अंसारी ने बताया कि उन्हें सीने में दर्द के साथ सांस लेने में परेशानी महसूस हुई। स्थिति को देखते हुए परिवार की ओर से तत्काल चिकित्सकीय मदद ली गई और उन्हें रांची स्थित हिल व्यू अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है। मंत्री ने कहा कि फिलहाल उनकी स्थिति को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। डॉक्टरों की कई टीमें इलाज और स्वास्थ्य की निगरानी में लगी हुई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं अस्पताल में मौजूद हैं और अपनी मां के स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे हैं। परिवार और समर्थकों के बीच उनकी तबीयत को लेकर चिंता जरूर है, लेकिन मंत्री के बयान के अनुसार फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। अस्पताल की ओर से विस्तृत मेडिकल बुलेटिन सामने आने के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर और जानकारी स्पष्ट हो सकती है। मुख्यमंत्री की मां के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लोगों की ओर से भी उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की जा रही है। फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।

रोजगार मेले में गिरिराज सिंह का बड़ा दावा, बोले- अब 3-4 महीने में मिल रहा नियुक्ति पत्र

पटना: रोजगार मेले में नियुक्ति पत्र वितरण को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की रोजगार व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार सिर्फ युवाओं को नियुक्ति पत्र देने तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और तेज बनाने की दिशा में काम किया गया है। गिरिराज सिंह ने कहा कि बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, पहले कई मामलों में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने और अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलने में काफी लंबा समय लग जाता था। उन्होंने दावा किया कि अब कई भर्तियों में यह प्रक्रिया कुछ महीनों के भीतर पूरी की जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रोजगार मेले के माध्यम से युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपना सरकार की उस पहल का हिस्सा है, जिसके तहत अलग-अलग विभागों और संस्थानों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जा रही है। उन्होंने इसे युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ सरकारी भर्ती प्रक्रिया में तेजी से जोड़कर देखा। अपने बयान में गिरिराज सिंह ने पिछली कांग्रेस सरकार के समय की भर्ती प्रक्रिया पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए युवाओं को लंबा इंतजार करना पड़ता था और व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी थी। हालांकि, ये राजनीतिक दावे हैं और इन पर संबंधित दलों का अलग दृष्टिकोण हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार के रोजगार संबंधी दावों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन लोगों को देश में रोजगार सृजन दिखाई नहीं देता, उन्हें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के आंकड़ों पर भी नजर डालनी चाहिए। उनके अनुसार, EPFO से जुड़े आंकड़े औपचारिक रोजगार की स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण आधार हैं। रोजगार मेले में नियुक्ति पत्र पाने वाले युवाओं के लिए यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण अवसर रहा। सरकार की ओर से ऐसे आयोजनों के जरिए चयनित अभ्यर्थियों को औपचारिक रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाते हैं। रोजगार और सरकारी भर्ती से जुड़े इन दावों के बीच युवाओं के लिए वास्तविक रोजगार के अवसर, भर्ती प्रक्रिया की गति और औपचारिक रोजगार के आंकड़े आने वाले समय में चर्चा का प्रमुख विषय बने रह सकते हैं।

DUSU चुनाव में बढ़त के बाद दीपांशु शोकीन बोले- छात्रों की आवाज बनेगा जवाबदेह DUSU

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने बढ़त मिलने के बाद छात्रों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि छात्रों ने जिस भरोसे के साथ उनका समर्थन किया, उससे उन्हें बेहद खुशी महसूस हो रही है। शोकीन के मुताबिक, उनके चुनाव अभियान में छात्रों की भूमिका सबसे अहम रही और विद्यार्थियों ने खुद आगे बढ़कर उनके लिए प्रचार किया। दीपांशु शोकीन ने कहा कि चुनाव के दौरान उनका मुख्य उद्देश्य खुद को छात्रों के वास्तविक प्रतिनिधि के तौर पर साबित करना था। उन्होंने कहा कि वे जिस लड़ाई को लेकर चुनाव मैदान में उतरे थे, उसमें छात्रों की समस्याओं और उनकी आवाज को प्रमुखता देना सबसे महत्वपूर्ण था। उनके अनुसार, चुनाव के दौरान छात्रों का लगातार समर्थन इस बात का संकेत है कि उनकी बातों और मुद्दों को विद्यार्थियों के बीच जगह मिली। उन्होंने अपने चुनाव अभियान के दौरान नंगे पैर चलने के अनुभव का भी जिक्र किया। शोकीन ने कहा कि यह शारीरिक असुविधा उनके लिए लगातार एक याद दिलाने वाली बात रही कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले करीब डेढ़ लाख छात्रों को भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसी अनुभव ने उन्हें छात्रों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए काम करने का संकल्प मजबूत किया। दीपांशु शोकीन ने कहा कि चुनाव के दौरान छात्रों से किए गए वादों और उनके सामने मौजूद समस्याओं को वे आगे भी प्राथमिकता देंगे। उनका कहना है कि DUSU को ऐसा मंच बनाया जाना चाहिए जहां विद्यार्थियों की समस्याएं मजबूती से उठाई जा सकें और छात्रों को अपनी बात रखने का प्रभावी अवसर मिले। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में उनकी कोशिश छात्रों की आवाज को विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने की होगी। साथ ही उन्होंने एक ऐसे DUSU की बात कही, जिसमें कामकाज को लेकर जवाबदेही और छात्रों के प्रति जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

महिलाओं के हुनर और उद्यमिता को बाजार से जोड़ने पर सीएम धामी का जोर, बोले- सरकार हर कदम पर साथ

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को महिलाओं के हुनर, स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल महिलाओं को प्रशिक्षण या योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि उनके द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी है, ताकि उनकी मेहनत को उचित पहचान और आर्थिक मजबूती मिल सके। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘मातृशक्ति संवाद एवं सम्मान समारोह’ में सीएम धामी ने प्रदेश की महिलाओं से सीधे संवाद किया। इस दौरान महिलाओं ने विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और योजनाओं को लेकर सुझाव भी दिए। मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को सुना और महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। सीएम धामी ने महिलाओं से कहा कि वे सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्यों पर लगातार ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके प्रयासों में मजबूती से उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, महिलाओं की प्रतिभा और मेहनत को आर्थिक अवसरों से जोड़ना राज्य के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, स्वरोजगार और छोटे उद्यमों के माध्यम से महिलाएं परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं। ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया। सरकार की कोशिश है कि महिलाओं के कौशल को रोजगार और कारोबार के अवसरों में बदला जा सके। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के योगदान और उपलब्धियों को सम्मानित भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने महिलाओं से अपने हुनर को आगे बढ़ाने और नए अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।

जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी का मुद्दा गरमाया, सुनील शर्मा ने सरकार पर उठाए सवाल

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में युवाओं के रोजगार और सरकारी नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है। भाजपा नेता और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी की चिंता को प्रमुख मुद्दा बताते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या युवा आबादी की है और रोजगार से जुड़ी समस्याएं सीधे तौर पर इस वर्ग को प्रभावित कर रही हैं। सुनील शर्मा ने अपने बयान में कहा कि जम्मू-कश्मीर में युवा आबादी का करीब 32 प्रतिशत हिस्सा है। उनके मुताबिक, रोजगार की पर्याप्त संभावनाएं नहीं मिलने से युवाओं के बीच चिंता और असंतोष की स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर युवाओं के भविष्य और उनके परिवारों पर भी पड़ता है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार बेरोजगार युवाओं के लिए पर्याप्त स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के बजाय आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियां करने पर अधिक निर्भर है। उन्होंने सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग के जरिए होने वाली नियुक्तियों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। सुनील शर्मा ने अपने बयान में भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार संबंधी आरोप राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और इस बयान के आधार पर उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती है। ऐसे आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित जांच, सरकारी रिकॉर्ड और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकती है। भाजपा नेता ने जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना जरूरी है। उनका कहना है कि युवाओं को केवल अस्थायी या आउटसोर्सिंग आधारित काम तक सीमित रखने के बजाय रोजगार की स्थायी संभावनाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर में रोजगार और सरकारी भर्तियां लंबे समय से महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे रहे हैं। ऐसे में विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों के बीच भर्ती प्रक्रिया, आउटसोर्सिंग व्यवस्था और युवाओं के लिए रोजगार नीति पर सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी।

शाहजहांपुर में संविधान संवाद और OBC हक हुंकार सम्मेलन, अजय राय ने सामाजिक न्याय के मुद्दे पर उठाई आवाज

शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने शाहजहांपुर में आयोजित ‘संविधान संवाद एवं ओबीसी हक हुंकार सम्मेलन’ में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन तिलहर चौराहा स्थित सहाद उल्ला खान फार्म हाउस के पास किया गया, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों की बड़ी मौजूदगी देखने को मिली। सम्मेलन में सीतापुर से सांसद राकेश राठौर समेत कांग्रेस से जुड़े कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। शाहजहांपुर पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अजय राय का स्वागत फूल-मालाओं और स्मृति चिह्न देकर किया। इस दौरान भगवान गणेश और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर से जुड़े स्मृति चिह्न भी भेंट किए गए। अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के पदाधिकारियों ने भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का स्वागत और सम्मान किया। कार्यक्रम में महिला कार्यकर्ताओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। सम्मेलन को संबोधित करते हुए अजय राय ने संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा को कांग्रेस की प्राथमिकताओं में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग, वंचित तबकों, किसानों और अन्य सामाजिक समूहों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा। उनके मुताबिक, ओबीसी समाज के अधिकार, सामाजिक न्याय और हिस्सेदारी से जुड़े विषयों को लेकर कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक अपनी आवाज उठाती रहेगी। अजय राय ने कहा कि संविधान नागरिकों को अधिकार, सम्मान और समानता की गारंटी देता है और इसकी रक्षा के लिए राजनीतिक एवं सामाजिक स्तर पर लगातार संवाद जरूरी है। बरेली में हाल के संविधान संवाद कार्यक्रमों में भी उन्होंने संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। कार्यक्रम में सांसद राकेश राठौर की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। वहीं, कांग्रेस में हाल ही में शामिल हुए हीरा ठाकुर का भी उल्लेख किया गया। सम्मेलन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ओबीसी अधिकार, सामाजिक समानता और संविधान से जुड़े मुद्दों को आगे भी जनता के बीच उठाया जाएगा। कार्यक्रम में जुटी भीड़ और कार्यकर्ताओं की भागीदारी को पार्टी ने अपने अभियान के प्रति समर्थन के रूप में प्रस्तुत किया।

महिला अधिकारों की आवाज को मजबूत करने में महिला आयोग की अहम भूमिका: स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार

पटना: बिहार राज्य महिला आयोग के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने महिलाओं को शुभकामनाएं दीं और आयोग के कामकाज की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला आयोग लंबे समय से महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनकी समस्याओं को सामने लाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बिहार में महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके सामाजिक एवं आर्थिक विकास को लेकर सरकार की ओर से कई योजनाएं और पहल संचालित की गई हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना भी है। निशांत कुमार ने कहा कि बिहार राज्य महिला आयोग ने अपने 25 वर्षों के सफर में महिलाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। घरेलू हिंसा, महिला सुरक्षा, अधिकारों से जुड़े मामलों और अन्य सामाजिक चुनौतियों के बीच आयोग महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करता रहा है। कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अपने परिवार से जुड़े राजनीतिक संदर्भ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब उनके पिता सत्ता में आए, तब महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। उनके अनुसार, महिला केंद्रित नीतियों और योजनाओं से समाज में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा मिला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बिहार राज्य महिला आयोग आने वाले वर्षों में भी महिलाओं के हितों के लिए प्रभावी ढंग से काम करता रहेगा और नई ऊंचाइयों को हासिल करेगा। मंत्री ने कहा कि महिलाओं को समान अवसर, सम्मान और अधिकार दिलाने के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है। महिला आयोग के स्थापना दिवस के इस अवसर पर महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर आगे भी निरंतर प्रयास जारी रखने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में महिला आयोग से जुड़े पदाधिकारियों और अन्य लोगों की मौजूदगी रही।