पटना में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों की परेशानियों को लेकर एक अहम मांग रखी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी परीक्षा को रद्द किया जाता है, तो उसका आर्थिक बोझ छात्रों पर नहीं पड़ना चाहिए। चिराग पासवान के मुताबिक, ऐसी स्थिति में अभ्यर्थियों के आने-जाने, रहने और खाने का खर्च उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।
परीक्षा रद्द होने पर छात्रों को मिले खर्च की सुविधा: चिराग पासवान
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि इस व्यवस्था को केवल घोषणा या सरकारी निर्देश तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे कानूनी अधिकार का स्वरूप दिया जाए। उनका कहना है कि परीक्षा की तैयारी में युवा लंबे समय तक मेहनत करते हैं और कई बार परीक्षा केंद्र उनके गृह जिले या राज्य से काफी दूर होता है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने की स्थिति में दोबारा परीक्षा के लिए यात्रा और अन्य खर्च उठाना अभ्यर्थियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक परेशानी बन जाता है।
चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी ने इस मुद्दे को मजबूती के साथ सदन में भी उठाया है। उन्होंने युवाओं से जुड़े विषयों, खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली परेशानियों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। हाल ही में पटना में आयोजित एक युवा संवाद कार्यक्रम में भी प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार, कौशल विकास और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
दरअसल, प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी चिंताओं में परीक्षा स्थगित या रद्द होने से होने वाला अतिरिक्त खर्च भी शामिल रहता है। कई उम्मीदवार दूसरे शहरों में जाकर परीक्षा देते हैं। परीक्षा रद्द होने पर उन्हें दोबारा यात्रा, ठहरने और भोजन का खर्च उठाना पड़ सकता है।
ऐसे में चिराग पासवान की मांग परीक्षा रद्द होने की स्थिति में अभ्यर्थियों को आर्थिक राहत देने के प्रस्ताव पर केंद्रित है। यदि ऐसी व्यवस्था को कानूनी रूप दिया जाता है, तो परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी और छात्रों के अधिकारों को स्पष्ट किया जा सकता है।
परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने को लेकर केंद्र स्तर पर भी कदम उठाए जा रहे हैं। लोक परीक्षा प्रणाली में अनुचित साधनों और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर नियंत्रण के लिए 2026 में संशोधन विधेयक भी पेश किया गया है।
फिलहाल चिराग पासवान की मांग का केंद्र यही है कि परीक्षा रद्द होने की स्थिति में छात्रों को दोबारा परीक्षा देने के लिए होने वाले आर्थिक खर्च से राहत मिले और इसे भविष्य में एक स्पष्ट कानूनी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए।