CEC विवाद पर तेजस्वी यादव का बड़ा हमला, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग

पटना, बिहार। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राजद नेता तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। पटना में बयान देते हुए तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि जिस तरह से चुनाव कराए जा रहे हैं, उसमें चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि हाल में सामने आई रिपोर्ट और दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों के बाद पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल लोकतंत्र के लिए गंभीर विषय हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ-साथ उनकी गिरफ्तारी की मांग भी की। राजद नेता ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। यह विवाद उन मीडिया रिपोर्टों के बाद तेज हुआ है, जिनमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्टों में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग सुझाव, टिप्पणियां और आपत्तियां आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, अंतिम फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए और प्रमुख निर्णयों पर आयोग की सहमति रही है। तेजस्वी यादव ने कहा कि राजद इस मुद्दे को लेकर बिहार के कई जिलों में प्रदर्शन कर चुका है और यह आंदोलन अभी शुरुआत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी ओर से उठाई गई मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी आगे भी आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि राजद लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के मुद्दे पर अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

जमुई पीड़िता की तस्वीर को लेकर तेजस्वी का हमला, सम्राट चौधरी पर POCSO के तहत कार्रवाई की मांग

जमुई की नाबालिग पीड़िता और उसके परिजनों की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर POCSO एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए बिहार पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से साझा की गई तस्वीर को बाद में हटा दिया गया। तेजस्वी यादव ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। उनके मुताबिक, गरीब हो या अमीर, नेता हो या अधिकारी और मुख्यमंत्री हो या कोई आम नागरिक—कानून के दायरे में सभी बराबर होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जमुई मामले में नाबालिग पीड़िता की पहचान से जुड़ी तस्वीर सार्वजनिक किए जाने से POCSO कानून के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। तेजस्वी ने बिहार पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जमुई और दूसरे मामलों में POCSO के तहत बड़ी संख्या में लोगों पर कार्रवाई की गई है। ऐसे में उनका सवाल है कि यदि किसी आम व्यक्ति पर कानून लागू होता है तो संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के मामले में भी समान प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं करती है तो वे इस मामले को अदालत में ले जाएंगे और बिहार पुलिस को भी पक्षकार बनाएंगे। तेजस्वी ने यह भी कहा कि कानून से ऊपर कोई व्यक्ति नहीं हो सकता और कानून लागू करने में दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। दरअसल, जमुई में 19 सितंबर को एक नाबालिग लड़की और उसके साथ मौजूद किशोर के साथ कथित बदसलूकी और मारपीट का मामला सामने आया था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने POCSO के तहत मामला दर्ज किया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। वीडियो साझा करने वाले कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी पुलिस ने कार्रवाई की है। इस पूरे मामले में अब जांच और कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ नाबालिग पीड़िता की पहचान की गोपनीयता को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। तेजस्वी यादव की मांग है कि इस मामले में कानून के अनुसार समान कार्रवाई की जाए।

परीक्षा रद्द हुई तो छात्रों का खर्च उठाए सरकार, चिराग पासवान ने कानूनी अधिकार बनाने की रखी मांग

पटना में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों की परेशानियों को लेकर एक अहम मांग रखी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी परीक्षा को रद्द किया जाता है, तो उसका आर्थिक बोझ छात्रों पर नहीं पड़ना चाहिए। चिराग पासवान के मुताबिक, ऐसी स्थिति में अभ्यर्थियों के आने-जाने, रहने और खाने का खर्च उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए। परीक्षा रद्द होने पर छात्रों को मिले खर्च की सुविधा: चिराग पासवान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि इस व्यवस्था को केवल घोषणा या सरकारी निर्देश तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे कानूनी अधिकार का स्वरूप दिया जाए। उनका कहना है कि परीक्षा की तैयारी में युवा लंबे समय तक मेहनत करते हैं और कई बार परीक्षा केंद्र उनके गृह जिले या राज्य से काफी दूर होता है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने की स्थिति में दोबारा परीक्षा के लिए यात्रा और अन्य खर्च उठाना अभ्यर्थियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक परेशानी बन जाता है। चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी ने इस मुद्दे को मजबूती के साथ सदन में भी उठाया है। उन्होंने युवाओं से जुड़े विषयों, खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली परेशानियों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। हाल ही में पटना में आयोजित एक युवा संवाद कार्यक्रम में भी प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार, कौशल विकास और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। दरअसल, प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी चिंताओं में परीक्षा स्थगित या रद्द होने से होने वाला अतिरिक्त खर्च भी शामिल रहता है। कई उम्मीदवार दूसरे शहरों में जाकर परीक्षा देते हैं। परीक्षा रद्द होने पर उन्हें दोबारा यात्रा, ठहरने और भोजन का खर्च उठाना पड़ सकता है। ऐसे में चिराग पासवान की मांग परीक्षा रद्द होने की स्थिति में अभ्यर्थियों को आर्थिक राहत देने के प्रस्ताव पर केंद्रित है। यदि ऐसी व्यवस्था को कानूनी रूप दिया जाता है, तो परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी और छात्रों के अधिकारों को स्पष्ट किया जा सकता है। परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने को लेकर केंद्र स्तर पर भी कदम उठाए जा रहे हैं। लोक परीक्षा प्रणाली में अनुचित साधनों और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर नियंत्रण के लिए 2026 में संशोधन विधेयक भी पेश किया गया है। फिलहाल चिराग पासवान की मांग का केंद्र यही है कि परीक्षा रद्द होने की स्थिति में छात्रों को दोबारा परीक्षा देने के लिए होने वाले आर्थिक खर्च से राहत मिले और इसे भविष्य में एक स्पष्ट कानूनी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए।

UPITS 2026: छोटे कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का बड़ा मंच, नंद गोपाल गुप्ता ने गिनाई उपलब्धियां

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS 2026) का शुभारंभ हो गया है। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट मिनिस्टर नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने ट्रेड शो के महत्व और पिछले संस्करणों से मिली उपलब्धियों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तैयार होने वाले उत्पादों और स्थानीय हुनर को देश-दुनिया के बड़े बाजारों तक पहुंचाने का अवसर देना है। नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि जब यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का पहला संस्करण आयोजित किया गया था, तब इसकी तारीखों और आयोजन की व्यवस्था से दुनिया भर के खरीदारों को सुविधा मिली। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में काम करने वाले छोटे कारोबारियों, कारीगरों और हुनरमंद लोगों को अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रदर्शित करने के लिए एक बड़ा मंच मिला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में ट्रेड शो की समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई विक्रेताओं को लंबे समय तक के ऑर्डर मिले हैं। उनके मुताबिक, कुछ कारोबारियों को वर्ष 2029 तक के ऑर्डर मिलने की जानकारी सामने आई, जो इस आयोजन की कारोबारी उपयोगिता को दर्शाता है। मंत्री ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रदेश के छोटे और मध्यम कारोबारियों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ कारोबारियों को संभावित खरीदारों और नए बाजारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल रहा है। नंद गोपाल गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और संघर्ष का माहौल है, इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यापारिक आयोजन का होना महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के नेतृत्व को श्रेय देते हुए कहा कि सरकार की नीतियों और कूटनीतिक प्रयासों से ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए बेहतर वातावरण तैयार हुआ है। UPITS 2026 के जरिए उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों, उद्योगों और कारीगरों को वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलने की उम्मीद है।

ओडिशा में कांग्रेस का प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग

भुवनेश्वर: मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में प्रदर्शन किया। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग उठाई। कांग्रेस की ओर से यह प्रदर्शन देशभर में किए जा रहे विरोध कार्यक्रमों के तहत आयोजित किया गया। प्रदर्शन के दौरान ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष संतोष सिंह सलूजा ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी लंबे समय से मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते रहे हैं। सलूजा के मुताबिक, पहले इन दावों को चुनावी हार के बाद की राजनीतिक बयानबाजी माना जाता था, लेकिन हाल में सामने आई एक रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने इन सवालों को फिर प्रमुखता से उठाया है। संतोष सिंह सलूजा ने दावा किया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और इसके लिए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। हालांकि, इन दावों पर चुनाव आयोग का पक्ष अलग है। हालिया रिपोर्टिंग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 27.16 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। इनमें से 22.21 लाख लोगों ने अपने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए अपील दायर की है। सलूजा ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का चुनावी परिणामों पर असर पड़ा। इन दावों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को प्रक्रिया के तहत लिया गया बताया है, जबकि विपक्षी दल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि भुवनेश्वर में पार्टी की बैठक के बाद ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी जाएगी। देशभर में कांग्रेस की ओर से 25 सितंबर को राज्य निर्वाचन कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। पार्टी ने मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग भी उठाई है।

रक्षा निर्यात से टेक्नोलॉजी, रणनीतिक साझेदारी और रोजगार को बढ़ावा: रक्षा सचिव

नई दिल्ली: भारत के रक्षा निर्यात को लेकर रक्षा सचिव राजेश सिंह ने इसके व्यापक आर्थिक और रणनीतिक महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में निर्यात केवल हथियार और सैन्य उपकरण बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश की तकनीकी क्षमता, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलती है। राजेश सिंह के मुताबिक, किसी देश की रक्षा तकनीक और उपकरणों का दूसरे देशों तक पहुंचना इस बात का संकेत होता है कि संबंधित देश प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपयोगी और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। रक्षा निर्यात के जरिए भारत अपने मित्र देशों की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में भी योगदान दे सकता है। उन्होंने बताया कि रक्षा उपकरणों की आपूर्ति के साथ लंबे समय तक चलने वाली सेवाओं की जरूरत भी बनी रहती है। इनमें स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति, रखरखाव, तकनीकी सहायता और जरूरत के मुताबिक विशेषज्ञ टीमों की तैनाती शामिल है। इस तरह रक्षा निर्यात के माध्यम से दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग का आधार तैयार हो सकता है। रक्षा सचिव ने यह भी रेखांकित किया कि रक्षा क्षेत्र में निर्यात बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इससे भारत को विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिलती है। साथ ही रक्षा उत्पादन बढ़ने से विनिर्माण क्षेत्र में गतिविधियां तेज होती हैं और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उनके बयान के अनुसार, रक्षा निर्यात भारत के लिए तकनीकी क्षमता और औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाने के साथ-साथ मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करने का माध्यम भी है। निर्यात के साथ जुड़े रखरखाव और सहायता संबंधी काम लंबे समय तक चल सकते हैं, जिससे रक्षा उद्योग के लिए निरंतर मांग और सेवा संबंधी अवसर बने रहते हैं। भारत में घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ाने और रक्षा उपकरणों के निर्यात को विस्तार देने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। ऐसे में रक्षा सचिव का यह बयान रक्षा निर्यात को आर्थिक गतिविधि, तकनीकी क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के व्यापक संदर्भ में देखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

झारखंड में बारिश का दौर जारी, कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

रांची। झारखंड में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदला हुआ है। राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है, वहीं मौसम विभाग ने कुछ जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के मुताबिक, आज राज्य के पश्चिमी हिस्सों में मौसम ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना है। इन इलाकों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, पश्चिमी जिलों के कुछ हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा पश्चिमी इलाकों से सटे रांची, खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम में भी भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इन जिलों में रहने वाले लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और जरूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। कल भी कई जिलों में बारिश का असर मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि शुक्रवार की तुलना में शनिवार को बारिश की स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है, हालांकि उत्तरी-पश्चिमी झारखंड के कई इलाकों में बारिश का असर बना रहेगा। खास तौर पर गढ़वा, पलामू, चतरा और लातेहार जिलों में भारी बारिश की संभावना है। राज्य के बाकी हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। कुछ स्थानों पर बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने की स्थिति बन सकती है। मौसम के इस बदलाव का असर स्थानीय जनजीवन और आवागमन पर भी पड़ सकता है। 27 सितंबर से मौसम में ज्यादा सुधार मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, 26 सितंबर को बारिश की स्थिति में कुछ कमी आने की उम्मीद है, जबकि 27 सितंबर से राज्य में मौसम में अपेक्षाकृत ज्यादा सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि कुछ इलाकों में हल्की बारिश जारी रह सकती है। वहीं, 28 सितंबर से मौजूदा मौसम प्रणाली का झारखंड पर प्रभाव लगभग समाप्त होने की संभावना है। इसके बाद राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में कमी आने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए लोगों से अपील है कि वे तेज बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें और स्थानीय प्रशासन तथा मौसम विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

पटना में राजद का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन

पटना में शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े विवादों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने राजधानी की सड़कों पर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने आयकर गोलंबर के पास ज्ञानेश कुमार का पुतला भी दहन किया। राजद की ओर से यह प्रदर्शन बिहार में चुनाव प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के बीच किया गया। पार्टी ने पहले ही 25 सितंबर को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन और पुतला दहन का कार्यक्रम घोषित किया था। प्रदर्शन में शामिल राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित किया गया है। कार्यकर्ताओं ने बिहार और पश्चिम बंगाल में हुए चुनावों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए और पूरे मामले की जांच की मांग की। राजद नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों की ओर से यह भी मांग उठाई गई कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। हालांकि, ये आरोप राजद और प्रदर्शनकारियों के राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की जा रही है। दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों का विरोध पिछले कुछ दिनों में तेज हुआ है। मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों को लेकर अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र हुआ है। विपक्षी दल इन्हीं घटनाक्रमों को आधार बनाकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। राजद नेता तेजस्वी यादव भी चुनाव आयोग और SIR को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों को लेकर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग तक की है। पटना में हुए इस प्रदर्शन के दौरान राजद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया को लेकर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।

जोधपुर अग्निकांड: घायल दमकलकर्मियों का हाल जानने SMS अस्पताल पहुंचे अशोक गहलोत

जयपुर/जोधपुर। जोधपुर में हुए अग्निकांड के दौरान घायल हुए अग्निशमन कर्मियों का इलाज जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में चल रहा है। शुक्रवार को राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत अस्पताल पहुंचे और घायल दमकलकर्मियों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों से उपचार की स्थिति को लेकर भी बातचीत की। अस्पताल में घायलों से मुलाकात और चिकित्सकों से जानकारी लेने के बाद अशोक गहलोत ने कहा कि सभी घायलों का इलाज बेहतर तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में भर्ती घायलों में एक अग्निशमन कर्मी करीब 20 प्रतिशत तक झुलसा है, जबकि बाकी घायलों के करीब 50 प्रतिशत तक जलने की जानकारी दी गई है। गहलोत ने कहा कि अधिक प्रतिशत बर्न होने की स्थिति में मरीज की हालत गंभीर बनी रहती है, लेकिन डॉक्टरों ने उपचार में किसी तरह की कमी नहीं होने देने का भरोसा दिया है। अशोक गहलोत ने अग्निशमन विभाग के अधिकारियों और पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि दमकलकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाने का काम किया। ऐसे कर्मचारियों के साहस और जिम्मेदारी को देखते हुए उन्हें हर संभव सहयोग मिलना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल में घायलों की देखभाल में किसी तरह की कमी नहीं है। डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और उपचार जारी है। उन्होंने चिकित्सकों द्वारा दिए गए आश्वासन का भी उल्लेख किया और कहा कि घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। गहलोत ने इस दौरान दमकल विभाग के कार्यों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हादसे के दौरान अग्निशमन कर्मियों ने जिस तरह लोगों की मदद की, वह सराहनीय है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और सरकार से घायल कर्मचारियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। जोधपुर अग्निकांड के बाद घायलों के इलाज और राहत व्यवस्था को लेकर प्रशासन की ओर से भी लगातार निगरानी की जा रही है। फिलहाल घायल दमकलकर्मियों का SMS अस्पताल में उपचार जारी है।

पंजाब में नशे के खिलाफ BJP का जन आंदोलन, तरुण चुघ ने सरकार पर साधा निशाना

होशियारपुर, पंजाब: पंजाब में नशे की समस्या को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। होशियारपुर में भाजपा सांसद तरुण चुघ ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी नशे के खिलाफ पूरे पंजाब में जन आंदोलन खड़ा करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से शुरू की गई यात्राएं गांव-गांव तक पहुंच रही हैं और लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। तरुण चुघ ने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह पंजाब के परिवारों और समाज को प्रभावित करने वाला गंभीर मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान के दौरान उनकी मुलाकात उन माताओं से भी हुई, जिन्होंने नशे के कारण अपने बेटों को खोया है। चुघ ने इसे पंजाब का दर्द बताते हुए राज्य सरकार पर भी सवाल उठाए। भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार के पास नशे की समस्या से निपटने के लिए स्पष्ट योजना, विजन और प्रभावी नीति नहीं है। हालांकि, ये आरोप भाजपा नेता की ओर से लगाए गए हैं और राज्य सरकार का पक्ष इस बयान में शामिल नहीं है। तरुण चुघ ने बताया कि भाजपा ने नशे के खिलाफ अभियान को पांच प्रमुख संकल्पों के साथ आगे बढ़ाने की बात कही है। पहला संकल्प नशे के तस्करों के नेटवर्क को खत्म करना है। दूसरा, नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन को तोड़ने पर जोर दिया जाएगा। तीसरे संकल्प के तहत ड्रग मनी के प्रवाह को रोकने की बात कही गई है। चौथे संकल्प में नशे की गिरफ्त में आए युवाओं और बच्चों को इस दलदल से बाहर निकालकर उनके पुनर्वास पर ध्यान देने की बात कही गई है। वहीं, पांचवें संकल्प के तहत नशे के खिलाफ अभियान को व्यापक जन आंदोलन का रूप देने की बात कही गई है। भाजपा का कहना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार या किसी एक राजनीतिक दल की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसके लिए समाज, परिवार, युवाओं और प्रशासन की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। अब देखना होगा कि पंजाब में नशे के मुद्दे पर चलाया जा रहा यह राजनीतिक और सामाजिक अभियान आने वाले समय में किस तरह आगे बढ़ता है।