नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र में आयोजित हाई-लेवल मीटिंग के दौरान भारत ने WHO के महामारी समझौते को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि मई 2025 में अपनाया गया WHO Pandemic Agreement वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस समझौते की विश्वसनीयता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि पैथोजन एक्सेस और बेनिफिट-शेयरिंग यानी Pathogen Access and Benefit-Sharing (PABS) की व्यवस्था कितनी निष्पक्ष और प्रभावी होती है।
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि महामारी के दौरान जिन देशों की ओर से पैथोजन और जैविक संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, उन्हें उनके योगदान के अनुरूप समय पर लाभ मिलना जरूरी है। इसमें वैक्सीन, डायग्नोस्टिक्स, उपचार, तकनीक और अन्य जरूरी स्वास्थ्य संसाधनों तक पहुंच शामिल है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता और परिस्थितियों का सम्मान किए जाने पर भी जोर दिया।
पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि PABS एनेक्स को लेकर अभी बातचीत और वार्ता की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में राजनीतिक घोषणा को इन आगामी वार्ताओं के नतीजे को पहले से तय करने वाला नहीं माना जाना चाहिए। भारत का कहना है कि घोषणा में PABS एनेक्स से संबंधित भविष्य की बातचीत के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनी रहनी चाहिए।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस राजनीतिक घोषणा को गैर-बाध्यकारी (non-binding) मानता है। इसका क्रियान्वयन प्रत्येक देश की अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों, प्राथमिकताओं और क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।
WHO महामारी समझौते का उद्देश्य भविष्य में संभावित महामारियों से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। इसमें महामारी की तैयारी, प्रतिक्रिया, स्वास्थ्य संसाधनों की उपलब्धता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग जैसे मुद्दे शामिल हैं। भारत ने UN की बैठक में अपने बयान के जरिए इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग के साथ-साथ संसाधनों और तकनीक तक समान एवं समयबद्ध पहुंच भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
भारत का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब WHO Pandemic Agreement के विभिन्न प्रावधानों को लागू करने के लिए आगे की प्रक्रियाओं पर देशों के बीच बातचीत जारी है। PABS व्यवस्था इसी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।