बीजेपी कार्यालय पहुंचे सीएम सम्राट चौधरी, कोर कमेटी की बैठक में कई मुद्दों पर होगी चर्चा

पटना: बिहार की सियासत से जुड़ी अहम गतिविधियों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार को बीजेपी कार्यालय पहुंचे। यहां पार्टी की कोर कमेटी की बैठक होनी है। बैठक में संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और आने वाले दिनों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा किए जाने की बात सामने आई है। पार्टी कार्यालय में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय समेत बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। संगठन से जुड़े अन्य पदाधिकारी और प्रमुख नेता भी बैठक में शामिल हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि बैठक में पार्टी संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा। बैठक के दौरान बिहार में होने वाले विधान परिषद चुनाव को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। चुनाव की तैयारियों, संगठन की भूमिका और पार्टी की आगामी रणनीति से जुड़े विषय बैठक के प्रमुख एजेंडों में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और उनके 25 वर्ष के राजनीतिक सफर से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर भी पार्टी स्तर पर चल रही तैयारियों पर चर्चा की जाएगी। बीजेपी के लिए संगठन को मजबूत करना भी बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय बताया जा रहा है। पार्टी के स्तर पर बूथ से लेकर जिला और राज्य तक संगठनात्मक गतिविधियों को और प्रभावी बनाने, कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा आगामी राजनीतिक गतिविधियों के लिए संगठन को तैयार रखने पर नेताओं के बीच विचार-विमर्श हो सकता है। बैठक में बिहार की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर भी नेताओं की नजर रहेगी। राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरण, विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष की सक्रियता और सरकार के स्तर पर चल रहे कामकाज से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है। पार्टी कार्यालय में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए बैठक को संगठन और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन मुद्दों पर क्या निर्णय लिया गया और पार्टी आगे की रणनीति को किस रूप में आगे बढ़ाएगी। इस बैठक के जरिए बीजेपी नेतृत्व राज्य में संगठनात्मक गतिविधियों और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर आपसी समन्वय मजबूत करने पर फोकस करता नजर आ रहा है।

उत्तराखंड में मौसम का असर, 27 सितंबर तक चार धाम यात्रा स्थगित

देहरादून: उत्तराखंड में लगातार बदल रहे मौसम और प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने चार धाम यात्रा को लेकर अहम निर्णय लिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 27 सितंबर तक चार धाम यात्रा स्थगित कर दी गई है। सरकार के इस फैसले के बाद बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की ओर जाने वाले यात्रियों को फिलहाल अपनी यात्रा रोकनी होगी। मौसम विभाग की ओर से राज्य के कई हिस्सों में खराब मौसम की संभावना जताई जा रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के कारण रास्तों पर फिसलन, भूस्खलन और अन्य चुनौतियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने का फैसला किया है। चार धाम यात्रा के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। यात्रा मार्ग पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरते हैं, इसलिए खराब मौसम के दौरान यात्रियों की सुरक्षा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए फिलहाल यात्रा स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन की ओर से यात्रियों से अपील की गई है कि वे मौसम की स्थिति सामान्य होने और आधिकारिक निर्देश मिलने तक चार धाम की ओर यात्रा शुरू न करें। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से जारी ताजा जानकारी जरूर जांच लें। यात्रा स्थगित किए जाने के फैसले का उद्देश्य किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचना और श्रद्धालुओं को सुरक्षित रखना है। मौसम में सुधार और परिस्थितियों की समीक्षा के बाद आगे यात्रा को लेकर निर्णय लिया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए यह भी जरूरी है कि वे बिना आधिकारिक अनुमति या अपडेट के यात्रा मार्ग पर जाने से बचें। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल 27 सितंबर तक चार धाम यात्रा स्थगित रहेगी। मौसम की स्थिति और प्रशासनिक समीक्षा के आधार पर इसके बाद यात्रा को दोबारा शुरू करने को लेकर फैसला लिया जा सकता है।

ECI की अहम बैठक में कई बड़े फैसले, आयोग ने जारी किया प्रेस नोट

नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग की 26 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में अहम बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने की। इस दौरान चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी मौजूद रहे। भारत निर्वाचन आयोग के महानिदेशक (मीडिया) आशीष गोयल ने बताया कि बैठक में आयोग ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की और सर्वसम्मति से कई फैसले लिए। आयोग की ओर से इन निर्णयों की जानकारी आधिकारिक प्रेस नोट के माध्यम से साझा की गई है। निर्वाचन आयोग के मुताबिक बैठक दोपहर 3 बजे आयोजित की गई थी। बैठक में लिए गए फैसलों को लेकर आयोग ने विस्तृत जानकारी जारी करने की बात कही है। चुनाव प्रक्रिया से जुड़े इन निर्णयों पर अब आधिकारिक प्रेस नोट के जरिए स्थिति स्पष्ट होगी।

ममता बनर्जी का बड़ा आरोप विपक्ष का गला क्यों घोंट रहे हैं?

कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम को लेकर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। ममता ने कहा कि कार्यक्रम के लिए 15 दिन पहले ही अदालत से अनुमति ली गई थी, इसके बावजूद उन्हें घर से बाहर निकलने में बाधा डाली जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों को रोका गया और पुलिस मौके पर दिखाई नहीं दी। ममता ने TMC नेता कुणाल घोष की कार में कथित तोड़फोड़ और उन पर हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार को जनता का जनादेश मिला है, तो विपक्ष को अपनी बात रखने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए तीखी टिप्पणी की। हालांकि, ममता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती। रिपोर्टों के अनुसार, कुणाल घोष की कार पर पथराव और अंडे फेंके जाने की घटना सामने आई है। वहीं, कलकत्ता हाईकोर्ट ने 26 सितंबर को सेरामपुर कोर्ट मैदान में ममता बनर्जी की सभा की अनुमति दी थी और भीड़ को 1,000 लोगों तक सीमित रखने सहित कुछ शर्तें लगाई थीं।

केरल से सहकारिता क्षेत्र में नई पहल की शुरुआत, अमित शाह बोले- ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा

कोल्लम, केरल: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने केरल के कोल्लम में सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी नई पहल की शुरुआत को महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से ही देश के किसान और सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोग केंद्र स्तर पर अलग मंत्रालय की मांग करते रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सहकारिता मंत्रालय का गठन कर इस लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा किया। अमित शाह ने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि, रोजगार और महिला सशक्तिकरण से भी है। उनके मुताबिक, देश के गांवों में सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने से स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ सकती है और विकास की प्रक्रिया को नई गति मिल सकती है। केंद्रीय मंत्री ने केरल की सहकारिता परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में आजादी से पहले से ही कई क्षेत्रों में सहकारी अभियान व्यवस्थित तरीके से संचालित होता रहा है। ऐसे में सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी नई पहल की शुरुआत केरल से होना विशेष महत्व रखता है। अमित शाह ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा पहले घोषित सहकारिता क्षेत्र की नई शुरुआत को अब केरल से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने इस अवसर पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इससे सहकारी क्षेत्र को नई दिशा देने और इसे आधुनिक जरूरतों के अनुरूप मजबूत करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने सहकारिता को देश के ग्रामीण विकास और कृषि व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि मजबूत सहकारी संस्थाएं किसानों और ग्रामीण समुदायों को सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर दे सकती हैं। साथ ही, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में भी सहकारिता क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने सहकारिता आंदोलन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने और अधिक लोगों को इससे जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई पहल के माध्यम से सहकारी क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

पटना में ‘शौर्य सम्मान समारोह 2026’ की तैयारी तेज, देशभर के कर्मयोगियों को मिलेगा सम्मान

पटना। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में प्रस्तावित ‘शौर्य सम्मान समारोह 2026’ को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। आयोजन का उद्देश्य देशभर में अपने-अपने क्षेत्रों में सेवा, साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक योगदान देने वाले लोगों को एक मंच पर सम्मानित करना है। समारोह की जानकारी छत्रपति शिवाजी महाराज हेल्पिंग कमेटी (ट्रस्ट) के अध्यक्ष एवं मुख्य संयोजक डॉ. सुधीर पटेल और ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव इंटेलेक्चुअल एसोसिएशन के चीफ कन्वेनर डॉ. एस. मधुप ने दी। आयोजकों के मुताबिक, यह आयोजन केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगा। देश के अलग-अलग राज्यों से ऐसे अधिकारियों, कर्मचारियों, सैन्यकर्मियों, चिकित्सकों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों को शामिल करने की योजना है, जिन्होंने अपने कार्यों के जरिए समाज और राष्ट्र के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है। सेना और पुलिसकर्मियों के योगदान को भी मिलेगा सम्मान समारोह में भारतीय सेना के जवानों और अधिकारियों को विशेष रूप से सम्मानित करने की योजना है। देश की सुरक्षा, सीमाओं की रक्षा और कठिन परिस्थितियों में सेवा देने वाले सैन्यकर्मियों के योगदान को मंच के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। इसी तरह पुलिस विभाग से जुड़े कर्मियों को भी समारोह में सम्मानित करने का प्रस्ताव है। ‘खाकी मेरा अभिमान’ अभियान के जरिए पुलिस और आम लोगों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय का संदेश देने की बात कही गई है। डायल-112 सेवा, महिला पुलिस, यातायात व्यवस्था तथा ड्यूटी के दौरान उल्लेखनीय कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मान देने की योजना है। समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की होगी भागीदारी आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम में प्रशासन, पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा, कानून, सामाजिक सेवा और अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों को शामिल किया जाएगा। जरूरतमंद और वंचित वर्गों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किए जाने की योजना है। इसके अलावा शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों, स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिजनों के सम्मान का भी प्रस्ताव रखा गया है। माता-पिता के सम्मान, सड़क सुरक्षा, सामाजिक जागरूकता और वृद्धाश्रम से जुड़े अभियानों को भी समारोह के साथ जोड़ने की योजना बताई गई है। 38 जिलों और देशभर से भागीदारी का लक्ष्य आयोजकों के अनुसार, बिहार के सभी 38 जिलों के साथ देश के विभिन्न राज्यों से लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत एक लाख कृतज्ञता पत्र एकत्र कर राज्यपाल को सौंपने की योजना भी बताई गई है। आयोजकों ने इसे विश्व रिकॉर्ड प्रयास के रूप में प्रस्तावित किया है। डॉ. सुधीर पटेल और डॉ. एस. मधुप के अनुसार, ‘शौर्य सम्मान समारोह 2026’ का मकसद किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। इसके जरिए सेवा, साहस, कर्तव्य और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े लोगों को पहचान देने का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि समारोह के माध्यम से युवाओं और समाज के बीच यह संदेश पहुंचाने की कोशिश होगी कि राष्ट्र निर्माण में हर जिम्मेदार नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। नोट: समारोह की तारीख और अन्य विस्तृत कार्यक्रम संबंधी जानकारी आयोजकों की ओर से आगे साझा किए जाने की बात कही गई है।

एशियाई खेल 2026: भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने जीता गोल्ड, फाइनल में ईरान को 40-34 से हराया

एशियाई खेल 2026 में भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में भारत का सामना मजबूत ईरानी टीम से हुआ, जहां दोनों टीमों के बीच शुरुआत से ही कड़ा मुकाबला देखने को मिला। रोमांच से भरे इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव के बीच बेहतरीन खेल दिखाया और आखिरकार ईरान को 40-34 के अंतर से मात देकर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमा लिया। फाइनल में भारतीय टीम ने आक्रामक खेल के साथ-साथ डिफेंस में भी शानदार तालमेल दिखाया। ईरान ने कई मौकों पर वापसी की कोशिश की और भारतीय खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दी, लेकिन टीम इंडिया ने महत्वपूर्ण क्षणों में धैर्य बनाए रखा। रेडिंग और डिफेंस के बीच बेहतर तालमेल भारतीय टीम की जीत में अहम साबित हुआ। मुकाबले के दौरान स्कोर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और दोनों टीमों के खिलाड़ी एक-एक अंक के लिए पूरी ताकत लगाते नजर आए। जैसे-जैसे मुकाबला निर्णायक दौर में पहुंचा, भारतीय खिलाड़ियों ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए बढ़त को मजबूत किया। अंतिम क्षणों में भारत ने ईरान पर अपनी पकड़ बनाए रखी और 40-34 के स्कोर के साथ मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने एशियाई खेलों में अपने मजबूत प्रदर्शन की परंपरा को आगे बढ़ाया है। कबड्डी भारत के पारंपरिक खेलों में शामिल है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारतीय टीम का प्रदर्शन लंबे समय से चर्चा में रहा है। ऐसे में एशियाई खेलों के फाइनल में गोल्ड मेडल जीतना भारतीय खेल प्रेमियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। भारत की इस जीत के बाद खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और समर्थकों के बीच खुशी का माहौल है। फाइनल में टीम के सामूहिक प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि दबाव वाले मुकाबलों में रणनीति, संयम और टीमवर्क कितना महत्वपूर्ण होता है। एशियाई खेल 2026 में भारतीय पुरुष कबड्डी टीम की यह स्वर्णिम जीत देश के लिए गौरव का क्षण है। ईरान के खिलाफ 40-34 की जीत के साथ भारत ने कबड्डी के मैदान पर अपना दबदबा कायम रखते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया।

यूपी चुनाव को लेकर सपा की तैयारी तेज, जिया उर रहमान बर्क बोले- गठबंधन पर फैसला अखिलेश यादव करेंगे

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान बर्क ने चुनावी रणनीति और विपक्षी गठबंधन को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रही है और आगे भी मजबूती से अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी। जिया उर रहमान बर्क ने कहा कि SIR के मुद्दे, चुनाव में कथित अनियमितताओं और दूसरे जनसरोकार से जुड़े विषयों को लेकर समाजवादी पार्टी ने सड़क से लेकर विधानसभा तक आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि पार्टी का फोकस जनता से जुड़े मुद्दों पर है और इन्हें राजनीतिक स्तर पर मजबूती से उठाया जाता रहेगा। गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर पूछे गए सवाल पर सपा सांसद ने कहा कि इस संबंध में अंतिम फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नेता अखिलेश यादव करेंगे। वहीं, कांग्रेस की ओर से गठबंधन से जुड़े फैसले राहुल गांधी करेंगे। उन्होंने दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं से ऐसे बयानों से बचने की अपील की, जिससे विपक्षी एकता प्रभावित हो और भाजपा को राजनीतिक फायदा उठाने का मौका मिले। बर्क ने कहा कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। पार्टी की इच्छा है कि विपक्षी दल गठबंधन के तहत मिलकर चुनाव लड़ें और सरकार बनाने की दिशा में काम करें। उन्होंने कहा कि गठबंधन के माध्यम से चुनाव लड़ने को लेकर समाजवादी पार्टी सकारात्मक रुख रखती है। सपा सांसद ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति में भी अपनी राजनीतिक ताकत के साथ मैदान में उतर सकती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की प्राथमिकता गठबंधन के तहत मिलकर चुनाव लड़ना है। उनके बयान से साफ है कि उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन, सीटों के बंटवारे और नेताओं के बीच समन्वय का मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहने वाला है। हालांकि, गठबंधन का अंतिम स्वरूप और सीट बंटवारे पर फैसला संबंधित दलों के नेतृत्व की बातचीत के बाद ही सामने आएगा।

ज्ञानेश कुमार को लेकर गौरव गोगोई का हमला, बोले- चुनाव आयोग में भी खुल गया ‘IT सेल’

नागांव, असम। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य द्वारा ज्ञानेश कुमार के समर्थन में दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गोगोई ने भाजपा पर तीखा निशाना साधा। गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि भाजपा ज्ञानेश कुमार को इतना समर्थन दे रही है कि भविष्य में उन्हें राष्ट्रपति पद तक पहुंचाने की बात भी कर सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा विवाद में ज्ञानेश कुमार ने भाजपा को राजनीतिक रूप से राहत पहुंचाई है। गोगोई ने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर मौजूद कुछ अधिकारियों ने CEC के फैसलों और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि जिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर आयोग में सामूहिक और बहुमत के आधार पर निर्णय होना चाहिए, वहां एकतरफा तरीके से फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए। गोगोई ने अपने बयान में भाजपा के ‘IT सेल’ का जिक्र करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि पहले भाजपा के IT सेल की चर्चा होती थी, लेकिन अब ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग में भी एक ‘IT सेल’ बन गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब यही व्यवस्था तय करेगी कि 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाला कोई नागरिक मतदाता सूची में शामिल होगा या नहीं। यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। इसी बीच पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने CEC ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए उन्हें कम से कम पद्म भूषण दिए जाने की बात कही थी। वहीं, विपक्षी दल SIR और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। चुनाव आयोग ने दूसरी ओर कहा है कि SIR से जुड़े फैसले आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं। ऐसे में ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

बिहार में हाईवे पेट्रोलिंग होगी मजबूत, CM सम्राट ने 58 वाहनों को दिखाई हरी झंडी

पटना: बिहार में सड़क सुरक्षा और हाईवे पर पुलिस की मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में गृह विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम के दौरान 58 हाईवे पेट्रोलिंग वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन वाहनों की तैनाती बिहार के अलग-अलग जिलों में प्रमुख राजमार्गों पर की जाएगी। सरकार के इस कदम का उद्देश्य हाईवे पर पुलिस पेट्रोलिंग को प्रभावी बनाना, सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराना और यातायात व्यवस्था को बेहतर करना है। नए पेट्रोलिंग वाहनों के सड़कों पर उतरने से प्रमुख मार्गों पर पुलिस की सक्रियता बढ़ने की उम्मीद है। बताया गया कि इन वाहनों को राज्य के विभिन्न जिलों में जरूरत के अनुसार तैनात किया जाएगा। हाईवे पर लगातार पेट्रोलिंग होने से दुर्घटना, जाम, वाहन खराब होने या किसी अन्य आपात स्थिति में पुलिस टीम को मौके तक पहुंचने में मदद मिलेगी। साथ ही, राजमार्गों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने में भी यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है। हाईवे पेट्रोलिंग व्यवस्था का सीधा संबंध सड़क सुरक्षा से भी है। प्रमुख मार्गों पर पुलिस की नियमित निगरानी से तेज गति, लापरवाही से वाहन चलाने और यातायात नियमों के उल्लंघन जैसी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। दुर्घटना होने की स्थिति में पेट्रोलिंग टीम शुरुआती स्तर पर आवश्यक सहायता और समन्वय उपलब्ध करा सकती है। बिहार में सड़क नेटवर्क के विस्तार और प्रमुख मार्गों पर बढ़ते यातायात के बीच हाईवे पेट्रोलिंग को मजबूत करना पुलिस व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 58 नए वाहनों की तैनाती के बाद जिलों में हाईवे निगरानी की क्षमता बढ़ाने पर जोर रहेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा वाहनों को रवाना किए जाने के साथ ही गृह विभाग की इस पहल को राज्य में सड़क सुरक्षा और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करने से जोड़कर देखा जा रहा है।