रांची, झारखंड: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ न्यायिक जांच या स्वतंत्र SIT की मांग को लेकर चल रहे विवाद के बीच भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में पार्टी के पुराने रिकॉर्ड का उल्लेख किया।
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि संसद में भी हर मुद्दे पर सभी सदस्य एकमत नहीं होते हैं। जब किसी विषय पर मतदान की स्थिति आती है तो वोटिंग या डिवीजन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं है कि किसी चुनाव आयुक्त ने औपचारिक तौर पर मतदान की मांग की थी या लिखित अनुरोध दिया था। हालांकि, उनके मुताबिक इस मुद्दे पर आपसी चर्चा हुई हो सकती है।
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस के मौजूदा आरोपों पर सवाल उठाते हुए पार्टी के पुराने फैसलों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 1980 के दशक में कांग्रेस सरकार ने तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त आर.वी.एस. शास्त्री की शक्तियों को सीमित करने के उद्देश्य से दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्त नियुक्त किए थे। शाहदेव ने यह भी आरोप लगाया कि हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर तत्कालीन चुनाव आयोग की स्थिति के बावजूद चुनाव कराने का दबाव बनाया गया था।
उन्होंने आगे कांग्रेस के कार्यकाल में नवीन चावला की नियुक्ति का उल्लेख किया और उनके कार्यकाल के दौरान सामने आए कथित हितों के टकराव के सवालों को उठाया। शाहदेव ने दावा किया कि 2006 में नवीन चावला की पत्नी द्वारा संचालित एक ट्रस्ट को दो कांग्रेस सांसदों की ओर से कथित तौर पर 85 लाख रुपये की राशि मिली थी। उन्होंने इसे संभावित हितों के टकराव का मामला बताया।
भाजपा नेता ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में चुनाव आयोग से जुड़े कुछ पूर्व अधिकारियों को बाद में राजनीतिक पदों पर नियुक्त किए जाने के उदाहरण भी सामने आए हैं। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एम.एस. गिल का उदाहरण देते हुए कांग्रेस के चुनाव आयोग संबंधी रिकॉर्ड पर सवाल खड़े किए।
हालांकि, प्रतुल शाहदेव द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया इस बयान में शामिल नहीं है। विवाद के बीच CEC के खिलाफ न्यायिक जांच या स्वतंत्र SIT की मांग को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।