विकसित भारत के लिए बैंकिंग सेक्टर में होंगे बड़े सुधार, निर्मला सीतारमण ने किया हाईलेवल कमेटी का ऐलान

बैंकिंग सेक्टर में सुधार: बैंकिंग सेक्टर को आधुनिक बनाने पर जोर

मुंबई: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय बैंकिंग सेक्टर को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित करने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि भारत के बैंक आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें, ताकि विकसित भारत (Viksit Bharat) के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

वित्त मंत्री ने मुंबई में बैंकिंग सेक्टर में सुधारों को लेकर अपनी बात रखते हुए बताया कि सरकार ने इस दिशा में एक हाईलेवल कमेटी गठित करने की घोषणा की है। यह कमेटी बैंकिंग उद्योग से जुड़े लोगों, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श करेगी। इसके बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसमें बताया जाएगा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए भारतीय बैंकिंग सिस्टम में किस तरह के बदलाव और सुधार जरूरी हैं।

बैंकिंग सेक्टर को आधुनिक बनाने पर जोर

निर्मला सीतारमण ने कहा कि आज भारत का बैंकिंग सेक्टर पहले की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में है। साल 2013, 2014 और 2015 के दौरान भारतीय बैंकों को कई तरह की वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि, अब बैंक उस दौर की मुश्किलों से बाहर निकल चुके हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा उपलब्धियों के बावजूद बैंकिंग सेक्टर को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से लगातार तैयार करना जरूरी है। बदलती अर्थव्यवस्था, आधुनिक तकनीक और वित्तीय जरूरतों के बीच भारतीय बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा।

विशेषज्ञों से सुझाव लेकर तैयार होगी रिपोर्ट

वित्त मंत्री के अनुसार, प्रस्तावित हाईलेवल कमेटी बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों से सुझाव लेगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बैंकिंग सिस्टम में किन बदलावों की आवश्यकता होगी।

कमेटी की रिपोर्ट में बैंकिंग सेक्टर के भविष्य, आधुनिक जरूरतों और विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर सुझाव दिए जाएंगे।

विकसित भारत के लक्ष्य में बैंकों की अहम भूमिका

भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। मजबूत बैंकिंग व्यवस्था से उद्योग, व्यापार, निवेश और आम लोगों तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

निर्मला सीतारमण के इस बयान से साफ है कि सरकार भारतीय बैंकों को केवल मौजूदा चुनौतियों से निपटने तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें भविष्य की आर्थिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर भी ध्यान दे रही है। अब सबकी नजरें प्रस्तावित कमेटी की रिपोर्ट और उसमें दिए जाने वाले सुझावों पर रहेंगी।

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