भारत का निर्यात बढ़ा, लेकिन रोजगार और आयात की तस्वीर पर बहस तेज

नई दिल्ली। भारत के विदेश व्यापार से जुड़े ताजा आंकड़ों में निर्यात के मोर्चे पर मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान भारत का वस्तु निर्यात करीब 17.85 प्रतिशत बढ़कर 215.91 अरब डॉलर पहुंच गया। हालांकि, इस वृद्धि के साथ आयात और व्यापार घाटे को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

अगस्त 2026 में इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली। इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात सालाना आधार पर करीब 89.82 प्रतिशत बढ़कर 5.55 अरब डॉलर रहा, जबकि पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 63.27 प्रतिशत बढ़कर 6.81 अरब डॉलर पहुंच गया। इंजीनियरिंग सामान के निर्यात में भी करीब 24.86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं, श्रम-प्रधान क्षेत्रों की स्थिति को लेकर उद्योग जगत और विशेषज्ञों के बीच चर्चा बनी हुई है। खासतौर पर कपड़ा, परिधान और चमड़ा जैसे क्षेत्रों का प्रदर्शन रोजगार के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जाता है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में टेक्सटाइल और अपैरल समेत हस्तशिल्प निर्यात 3.25 लाख करोड़ रुपये रहा था। चमड़ा और फुटवियर क्षेत्र को भी सरकार रोजगार और निर्यात दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र मानती है।

आयात के आंकड़े भी इस तस्वीर का दूसरा पहलू सामने रखते हैं। अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान रूस से आयात में 56.69 प्रतिशत और चीन से आयात में 27.01 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे भारत के व्यापार संतुलन और आयात पर निर्भरता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ऐसे में निर्यात वृद्धि को केवल कुल डॉलर मूल्य से देखने के बजाय यह भी देखना जरूरी है कि अलग-अलग क्षेत्रों में घरेलू वैल्यू एडिशन, छोटे उद्योगों की भागीदारी और रोजगार पर इसका क्या असर पड़ रहा है। निर्यात में लगातार वृद्धि के साथ यदि श्रम-प्रधान विनिर्माण और MSME क्षेत्र भी मजबूत होते हैं, तो इसका लाभ व्यापक स्तर पर पहुंच सकता है।

फिलहाल सरकारी आंकड़े निर्यात में मजबूत वृद्धि दिखा रहे हैं, जबकि आयात की तेज रफ्तार और अलग-अलग निर्यात क्षेत्रों के प्रदर्शन को लेकर आर्थिक बहस जारी है।

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