रायबरेली में शिव महापुराण कथा के बाद केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान, काशी-मथुरा को लेकर कही यह बात

रायबरेली, उत्तर प्रदेश। रायबरेली में आयोजित सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा में शामिल होने पहुंचे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने धार्मिक आयोजनों और प्रदेश की पिछली सरकारों को लेकर कई राजनीतिक टिप्पणियां कीं। कथा कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस तरह के धार्मिक आयोजनों का आयोजन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में संभव हो पा रहा है। केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उस समय कांवड़ यात्रा और राम भक्तों से जुड़े मामलों में सरकार का रवैया अलग था। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन सरकार के दौरान शिव भक्त कांवड़ियों पर लाठीचार्ज किया गया और उन्हें जेल भेजने की कार्रवाई हुई। इसके साथ ही उन्होंने राम भक्तों पर गोली चलाने का आरोप भी लगाया। उपमुख्यमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि रामलला का भव्य मंदिर अब बनकर तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के बाद काशी और मथुरा से जुड़े धार्मिक स्थलों को लेकर भी न्याय की लड़ाई जारी है। मौर्य ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि आने वाले समय में काशी में भगवान भोलेनाथ का मंदिर और मथुरा में भगवान कन्हैया का मंदिर भी बनेगा। हालांकि, काशी और मथुरा से जुड़े धार्मिक स्थलों के मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का हिस्सा रहे हैं। रायबरेली में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। धार्मिक आयोजन के बीच उपमुख्यमंत्री के बयान ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर अयोध्या, काशी और मथुरा से जुड़े मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। केशव प्रसाद मौर्य के बयान में भाजपा सरकार की नीतियों और पिछली सपा सरकार के कार्यकाल की तुलना देखने को मिली। वहीं, उनके काशी और मथुरा को लेकर दिए गए बयान को आगामी राजनीतिक विमर्श के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
UPI MDR चार्ज पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का बयान, बोले- 2 हजार तक के ट्रांजैक्शन पर नहीं लगेगा शुल्क

नई दिल्ली: UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने सरकार का पक्ष सामने रखा। उन्होंने UPI को भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सिस्टम देश के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुका है। सिंधिया के मुताबिक, UPI के जरिए हर महीने करीब 30 लाख करोड़ रुपये के भुगतान प्रोसेस किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई तकनीक या पेमेंट सिस्टम बड़े स्तर पर स्थापित हो जाता है, तो उसके संचालन और भविष्य की स्थिरता को लेकर भी व्यवस्था तैयार करनी पड़ती है। इसी संदर्भ में उन्होंने UPI के लिए 0.4 प्रतिशत MDR की व्यवस्था का उल्लेख किया। केंद्रीय मंत्री ने क्रेडिट और डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान की लागत का भी उदाहरण दिया। उनके अनुसार, क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर लागत आम तौर पर 1.5 से 2.5 प्रतिशत के बीच होती है, जबकि डेबिट कार्ड के मामले में यह करीब 0.9 प्रतिशत बताई गई है। इसके मुकाबले UPI के लिए सरकार और RBI की ओर से तय लागत संरचना 0.4 प्रतिशत बताई गई है। हालांकि, सिंधिया ने स्पष्ट किया कि आम ग्राहकों के छोटे डिजिटल भुगतानों पर MDR का असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR शून्य प्रतिशत रहेगा। यानी इस सीमा तक भुगतान करने वाले ग्राहकों के लिए MDR के नाम पर कोई शुल्क नहीं होगा। मंत्री ने यह भी दावा किया कि मौजूदा UPI लेनदेन में करीब 96 प्रतिशत ट्रांजैक्शन 2,000 रुपये से कम राशि के होते हैं। उनके मुताबिक, इस आधार पर प्रस्तावित लागत व्यवस्था का दायरा कुल ट्रांजैक्शन के लगभग 4 प्रतिशत हिस्से तक सीमित रहेगा। UPI MDR को लेकर सिंधिया का यह बयान ऐसे समय आया है जब डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उसके संचालन, लागत और पेमेंट इकोसिस्टम की आर्थिक स्थिरता पर चर्चा जारी है। सरकार की ओर से छोटे भुगतानों को शुल्क-मुक्त रखने पर जोर दिया गया है, जबकि बड़े ट्रांजैक्शन से जुड़े लागत ढांचे को लेकर अलग व्यवस्था की बात कही जा रही है।
EPFO वेज सीलिंग बढ़कर 25 हजार रुपये, करोड़ों कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने का दावा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े कर्मचारियों के लिए एक अहम फैसला लिया है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि EPFO की वेतन सीमा को 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। सरकार के मुताबिक, इस बदलाव का उद्देश्य अधिक संख्या में कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यह फैसला लिया है। उनके अनुसार, पहले EPFO में 15,000 रुपये मासिक वेतन तक की सीमा लागू थी। ऐसे में जिन कर्मचारियों का वेतन इससे अधिक था, उनके लिए EPFO की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू नहीं होती थी और वे अपनी इच्छा के अनुसार योगदान कर सकते थे। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद 25,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी EPFO के दायरे में आ सकेंगे। इससे बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारियों को भविष्य निधि और उससे जुड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है, जो अब तक इस दायरे से बाहर थे। मनसुख मंडाविया के मुताबिक, इस फैसले से करीब 50 लाख से लेकर 1 करोड़ तक नए लाभार्थी EPFO से जुड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस बदलाव को जल्द लागू करने की दिशा में काम करेगी और इसे अगले दिन से प्रभावी किए जाने की बात कही गई है। EPFO में शामिल होने का सीधा संबंध कर्मचारियों की भविष्य की आर्थिक सुरक्षा से है। नौकरी के दौरान नियमित योगदान के जरिए कर्मचारी अपने भविष्य के लिए एक वित्तीय आधार तैयार कर सकते हैं। ऐसे में वेतन सीमा बढ़ने से उन कर्मचारियों को भी बचत और सामाजिक सुरक्षा की औपचारिक व्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिल सकता है, जिनकी आय पहले निर्धारित सीमा से अधिक होने के कारण वे अनिवार्य दायरे में नहीं आते थे। हालांकि, नई व्यवस्था के वास्तविक प्रभाव और पात्रता से जुड़ी विस्तृत जानकारी संबंधित सरकारी अधिसूचना और EPFO के लागू नियमों के आधार पर स्पष्ट होगी।
₹35 किलो प्याज की बिक्री शुरू, मंत्री अशोक चौधरी ने वाहनों को दिखाई हरी झंडी

पटना: बिहार में प्याज की कीमतों को लेकर आम लोगों को राहत देने की दिशा में सरकार ने कदम उठाया है। मंत्री अशोक चौधरी ने NCCF आउटलेट्स के जरिए ₹35 प्रति किलो की दर से प्याज की बिक्री के लिए भेजे जा रहे वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल का उद्देश्य उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर प्याज उपलब्ध कराना और बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करना है। प्याज ऐसी सब्जी है, जिसका इस्तेमाल लगभग हर घर की रसोई में रोजाना होता है। कीमत बढ़ने पर इसका सीधा असर परिवार के मासिक बजट पर पड़ता है। ऐसे में कम कीमत पर प्याज उपलब्ध कराने की पहल से आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। मंत्री अशोक चौधरी ने इस दौरान कहा कि सरकार उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्याज समेत आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी करने के लिए जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बाजार में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। मिलावटखोरी की शिकायत मिलने पर उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े कानूनों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का जोर इस बात पर है कि लोगों को उचित कीमत पर गुणवत्तापूर्ण सामान मिल सके। NCCF आउटलेट्स के माध्यम से प्याज की बिक्री शुरू होने से उपभोक्ताओं को निर्धारित दर पर प्याज खरीदने का विकल्प मिलेगा। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्धता और बिक्री व्यवस्था के आधार पर स्थिति में अंतर हो सकता है। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे खरीदारी के दौरान निर्धारित कीमत और उपलब्धता की जानकारी स्थानीय स्तर पर जरूर जांच लें। सरकार की इस पहल को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों पर लोगों की नजर बनी रहती है। प्याज की आपूर्ति बढ़ाने और उचित दर पर बिक्री की व्यवस्था से बाजार में कीमतों पर दबाव कम करने की कोशिश की जा रही है। सरकार का संदेश साफ है कि आम उपभोक्ता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और आवश्यक वस्तुओं की बिक्री में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गोरखपुर में विकास परियोजनाओं का लोकार्पण, सीएम योगी ने बदलाव को लेकर कही बड़ी बात

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान 119 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के साथ कल्याण मण्डपम् का उद्घाटन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में हुए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी स्थान की तस्वीर बदलने के लिए इच्छाशक्ति और सही प्रयास जरूरी होते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि जब अच्छे लोगों का चयन होता है तो उसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आते हैं। उन्होंने कार्यक्रम स्थल का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ महीने पहले तक जिस जगह पर गड्ढा, कूड़ा और गंदगी दिखाई देती थी, आज वही स्थान बेहतर सुविधाओं और व्यवस्थित निर्माण के साथ नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले इस स्थान पर करीब डेढ़ से दो मीटर तक का गड्ढा रहा होगा और आसपास गंदगी भी रही होगी। अब वहां शानदार बाउंड्री तैयार हो चुकी है और उसके ऊपर कल्याण मण्डपम् का निर्माण भी पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री ने इसे विकास और बदलाव का उदाहरण बताते हुए कहा कि स्थान वही है, लेकिन परिस्थितियों में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उर्वरक नगर मंडल में हुए इस बदलाव से यह समझा जा सकता है कि योजनाबद्ध तरीके से किए गए विकास कार्य किसी क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं। उन्होंने विकास परियोजनाओं को जनता के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इनसे स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम के दौरान 119 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। इन परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं, सार्वजनिक उपयोग की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री के संबोधन में विकास कार्यों के साथ स्थानीय स्तर पर बदलाव का मुद्दा प्रमुख रहा। उन्होंने कल्याण मण्डपम् के निर्माण को एक ऐसे उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया, जहां पहले उपेक्षित नजर आने वाली जगह को विकसित कर उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में तैयार किया गया है। गोरखपुर में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए सरकार ने क्षेत्र में जारी विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं को भी सामने रखा।
भारत का निर्यात बढ़ा, लेकिन रोजगार और आयात की तस्वीर पर बहस तेज

नई दिल्ली। भारत के विदेश व्यापार से जुड़े ताजा आंकड़ों में निर्यात के मोर्चे पर मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान भारत का वस्तु निर्यात करीब 17.85 प्रतिशत बढ़कर 215.91 अरब डॉलर पहुंच गया। हालांकि, इस वृद्धि के साथ आयात और व्यापार घाटे को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। अगस्त 2026 में इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली। इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात सालाना आधार पर करीब 89.82 प्रतिशत बढ़कर 5.55 अरब डॉलर रहा, जबकि पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 63.27 प्रतिशत बढ़कर 6.81 अरब डॉलर पहुंच गया। इंजीनियरिंग सामान के निर्यात में भी करीब 24.86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, श्रम-प्रधान क्षेत्रों की स्थिति को लेकर उद्योग जगत और विशेषज्ञों के बीच चर्चा बनी हुई है। खासतौर पर कपड़ा, परिधान और चमड़ा जैसे क्षेत्रों का प्रदर्शन रोजगार के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जाता है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में टेक्सटाइल और अपैरल समेत हस्तशिल्प निर्यात 3.25 लाख करोड़ रुपये रहा था। चमड़ा और फुटवियर क्षेत्र को भी सरकार रोजगार और निर्यात दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र मानती है। आयात के आंकड़े भी इस तस्वीर का दूसरा पहलू सामने रखते हैं। अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान रूस से आयात में 56.69 प्रतिशत और चीन से आयात में 27.01 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे भारत के व्यापार संतुलन और आयात पर निर्भरता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसे में निर्यात वृद्धि को केवल कुल डॉलर मूल्य से देखने के बजाय यह भी देखना जरूरी है कि अलग-अलग क्षेत्रों में घरेलू वैल्यू एडिशन, छोटे उद्योगों की भागीदारी और रोजगार पर इसका क्या असर पड़ रहा है। निर्यात में लगातार वृद्धि के साथ यदि श्रम-प्रधान विनिर्माण और MSME क्षेत्र भी मजबूत होते हैं, तो इसका लाभ व्यापक स्तर पर पहुंच सकता है। फिलहाल सरकारी आंकड़े निर्यात में मजबूत वृद्धि दिखा रहे हैं, जबकि आयात की तेज रफ्तार और अलग-अलग निर्यात क्षेत्रों के प्रदर्शन को लेकर आर्थिक बहस जारी है।
राजनाथ सिंह पहुंचे कोलकाता, शुभेंदु अधिकारी ने किया स्वागत

कोलकाता, पश्चिम बंगाल: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंचे। उनके कोलकाता पहुंचने पर राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उनका स्वागत किया। राजनाथ सिंह के आगमन को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से भी आवश्यक तैयारियां की गई थीं। कोलकाता पहुंचने के बाद रक्षा मंत्री का स्वागत औपचारिक मुलाकात और शिष्टाचार के साथ किया गया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। हालांकि, मुलाकात के दौरान किन विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आना अभी बाकी है। राजनाथ सिंह के पश्चिम बंगाल दौरे को रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रक्षा मंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए संबंधित स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। अधिकारियों की ओर से आवाजाही और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। राजनाथ सिंह केंद्र सरकार में रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और देश की रक्षा तैयारियों, सैन्य आधुनिकीकरण तथा सुरक्षा से जुड़े मामलों पर लगातार बैठकों और कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहे हैं। उनके कोलकाता दौरे के दौरान स्थानीय स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, शुभेंदु अधिकारी की ओर से रक्षा मंत्री का स्वागत किए जाने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस मुलाकात को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दोनों नेताओं की मुलाकात से जुड़े आधिकारिक कार्यक्रम और आगे की जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल कोलकाता में राजनाथ सिंह के आगमन के बाद उनके निर्धारित कार्यक्रमों पर सभी की नजर बनी हुई है। रक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार की ओर से जारी होने वाली आधिकारिक जानकारी के आधार पर दौरे से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
उमर खालिद मामले पर इमरान मसूद बोले- न्याय व्यवस्था पर सवाल उठें तो सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए

सहारनपुर, उत्तर प्रदेश। उमर खालिद से जुड़े मामले को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने न्याय व्यवस्था और मौलिक अधिकारों का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी मामले में देश की न्यायिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो सुप्रीम कोर्ट को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। इमरान मसूद के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति के साथ केवल धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को समानता और निष्पक्ष न्याय की उम्मीद रहती है। उनका कहना है कि न्यायपालिका से लोगों की सबसे बड़ी अपेक्षा निष्पक्ष न्याय की होती है और यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके साथ न्याय नहीं हो रहा है, तो उच्चतम न्यायालय इस विषय पर विचार कर सकता है। उमर खालिद से जुड़ा मामला दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के आरोपों से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में उमर खालिद की जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए राहत देने से इनकार किया था। अदालत के फैसले में UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत के कानूनी मानदंडों पर विचार किया गया था। इसके बाद जुलाई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट में भी उमर खालिद की ओर से नियमित जमानत से जुड़े मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए और आगे की सुनवाई के लिए तारीख तय की थी। इमरान मसूद का ताजा बयान इसी व्यापक कानूनी और राजनीतिक बहस के बीच सामने आया है। उन्होंने न्यायपालिका से हस्तक्षेप की उम्मीद जताते हुए कहा कि यदि किसी नागरिक के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, तो संवैधानिक संस्थाओं को इस पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, किसी व्यक्ति के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव हुआ है या नहीं, यह एक तथ्यात्मक और कानूनी प्रश्न है, जिसका निर्धारण संबंधित न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।
3 डिसमिल जमीन के इंतजार में आधी रात से मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंचीं हजारों महिलाएं, गोद में बच्चे लेकर गर्मी में लगीं लाइन

पटना: गरीब और जरूरतमंद परिवारों को 3 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं राजधानी पटना में मुख्यमंत्री सचिवालय के बाहर पहुंचीं। बताया जा रहा है कि कई महिलाएं आधी रात से ही सचिवालय पहुंचने लगी थीं। सुबह होते-होते यहां लोगों की भीड़ बढ़ गई और महिलाओं की लंबी कतार दिखाई देने लगी। इन महिलाओं में कई ऐसी भी थीं, जो अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर घंटों तक इंतजार करती रहीं। तेज गर्मी और उमस के बावजूद महिलाएं अपनी मांग को लेकर कतार में डटी रहीं। उनका कहना है कि जमीन मिलने की उम्मीद में वे काफी समय से सरकारी स्तर पर कार्रवाई का इंतजार कर रही हैं। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना है कि गरीब परिवारों के पास अपना घर बनाने के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है। ऐसे में सरकार की ओर से 3 डिसमिल जमीन दिए जाने की व्यवस्था उनके लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। महिलाओं ने प्रशासन और सरकार से मांग की कि पात्र परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री सचिवालय के आसपास महिलाओं की बढ़ती भीड़ के कारण प्रशासन को भी व्यवस्था संभालने के लिए सतर्क रहना पड़ा। इस दौरान लोगों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। महिलाओं का कहना है कि वे किसी राजनीतिक विवाद के लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार के भविष्य और रहने के लिए जमीन की मांग को लेकर यहां पहुंची हैं। कई महिलाओं ने बताया कि गर्मी में बच्चों के साथ घंटों इंतजार करना आसान नहीं है, लेकिन जमीन मिलने की उम्मीद उन्हें यहां खींच लाई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और प्रशासन की ओर से इन महिलाओं की मांग पर क्या कदम उठाया जाता है। यदि पात्र लाभार्थियों को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो लंबे समय से इंतजार कर रहे गरीब परिवारों को अपने घर का सपना पूरा करने में मदद मिल सकती है।
पटना में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 27 किलो गांजा बरामद; तीन आरोपी गिरफ्तार

पटना: राजधानी पटना में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने एक अभियान के दौरान करीब 27 किलो गांजा बरामद किया है। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। बरामद गांजे की खेप को लेकर पुलिस अब इसके स्रोत और सप्लाई नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिलने के बाद संबंधित पुलिस टीम ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को गांजा की खेप के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से करीब 27 किलो गांजा बरामद होने की बात सामने आई। गिरफ्तारी के बाद पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गांजा कहां से लाया गया था और इसे पटना या आसपास के इलाकों में किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भी जानकारी जुटा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जा रही है। बरामद गांजे की कीमत और मामले से जुड़े अन्य विवरणों की जांच भी की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि शहर में मादक पदार्थों की अवैध बिक्री और तस्करी पर रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है।