प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर रक्तदान शिविर, मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया सेवा का दिन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर देशभर में अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में दिल्ली में भी रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर रक्तदान किया। कार्यक्रम के दौरान दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और कार्यशैली का उल्लेख किया।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर देशभर से उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रति लोगों की भावनाओं को देखते हुए कई स्थानों पर सेवा और सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में रक्तदान शिविर भी लगाया गया है, जिसमें लोग स्वेच्छा से हिस्सा ले रहे हैं।

सिरसा ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में लंबे सार्वजनिक जीवन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी ने लंबे समय तक लगातार काम करने पर जोर दिया है और इसी वजह से उनके समर्थक उनके जन्मदिन को सेवा भाव से जोड़कर देख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर कई लोग अपने तरीके से शुभकामनाएं दे रहे हैं। कहीं सेवा कार्य किए जा रहे हैं तो कहीं जरूरतमंदों की मदद के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दिल्ली में आयोजित रक्तदान शिविर को भी इसी भावना से जोड़कर देखा जा रहा है।

सिरसा ने कहा कि रक्तदान ऐसा सामाजिक कार्य है, जिसका लाभ जरूरत के समय किसी मरीज या उसके परिवार को मिल सकता है। उन्होंने लोगों से ऐसे सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने की अपील की।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को लेकर आयोजित विभिन्न सेवा कार्यक्रमों की भी चर्चा हुई। समर्थकों और कार्यकर्ताओं की ओर से प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की गई। रक्तदान शिविर में शामिल लोगों ने भी सेवा कार्य को महत्व देते हुए अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

नोट: प्रधानमंत्री के 25 वर्षों तक लगातार प्रधानमंत्री रहने संबंधी दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है; मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 2001–2014 और प्रधानमंत्री के रूप में 2014 से सेवा की है। इसलिए ऊपर खबर में इसे सीधे तथ्य के रूप में नहीं लिखा गया है।

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