भारत में तेजी से मजबूत हो रहा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, Tata Electronics ने बताई सरकार के सहयोग की अहमियत

नई दिल्ली: भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को लेकर देश में तेजी से गतिविधियां बढ़ रही हैं। सरकार की नीतियों और निवेश के चलते सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियां भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। Tata Electronics के Foundry और OSAT कारोबार से जुड़े Senior Director of Sales and Business Development डॉ. बोरा बालोग्लू ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को लेकर महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं।

डॉ. बालोग्लू के मुताबिक, भारत के लिए सेमीकंडक्टर उद्योग में प्रवेश करना और देश के भीतर इससे जुड़ी पूरी सप्लाई चेन तैयार करना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार की ओर से मिल रहा समर्थन उद्योग के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने बताया कि सरकारी सहयोग और अनुकूल माहौल के कारण कई कंपनियां भारत में आने और निवेश करने के लिए आगे बढ़ रही हैं। उनका मानना है कि जैसे-जैसे सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के अलग-अलग हिस्से भारत में स्थापित होते जाएंगे, वैसे-वैसे देश में इस क्षेत्र की क्षमताओं को विकसित करना भी आसान होगा।

सप्लाई चेन मजबूत होने से बढ़ेगी क्षमता

Tata Electronics के अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि सेमीकंडक्टर उद्योग सिर्फ चिप निर्माण तक सीमित नहीं है। इसके लिए एक मजबूत और व्यापक सप्लाई चेन की जरूरत होती है। भारत में यदि इस पूरी व्यवस्था के अलग-अलग हिस्से विकसित होते हैं, तो कंपनियों के लिए यहां अपनी सेमीकंडक्टर क्षमताओं को बढ़ाना अधिक सुगम होगा।

क्या भारत को चिप निर्माण के लिए विदेशी साझेदारी की जरूरत है?

जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत को चिप निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक साझेदारियों की आवश्यकता होगी, तो डॉ. बालोग्लू ने कहा कि भारत के पास अपनी क्षमताओं को विकसित करने की क्षमता मौजूद है। उनके अनुसार, भारत का उद्देश्य देश के भीतर ही एक मजबूत सेमीकंडक्टर उद्योग खड़ा करना है।

उन्होंने संकेत दिया कि इस क्षेत्र का विकास मुख्य रूप से सप्लाई चेन से जुड़ी साझेदारियों के जरिए आगे बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, इसके लिए जरूरी नहीं कि भारत को हर स्तर पर दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़े।

भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विस्तार को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में सप्लाई चेन, मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग से जुड़ी क्षमताओं के विस्तार से इस क्षेत्र में भारत की भूमिका और बढ़ सकती है।

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