ओडिशा में बड़े स्तर पर ‘सागर कवच’ अभ्यास, तटीय सुरक्षा एजेंसियों ने दिखाया बेहतर तालमेल

भुवनेश्वर: ओडिशा में तटीय सुरक्षा को मजबूत करने और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘सागर कवच’ एक्सरसाइज का आयोजन किया गया। इस अभ्यास में समुद्र से जुड़े संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने की तैयारियों को परखा गया। बड़ी संख्या में सुरक्षा और संबंधित विभागों ने इसमें हिस्सा लिया।

रेलवे एवं तटीय सुरक्षा के ADGP अरुण बोथरा ने बताया कि ‘सागर कवच’ अभ्यास वर्ष में दो बार आयोजित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य तटीय इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के साथ-साथ अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल को मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि ओडिशा की तटीय सुरक्षा व्यवस्था में कई एजेंसियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना, इंडियन कोस्ट गार्ड, मरीन पुलिस और वन विभाग समेत संबंधित एजेंसियों ने भाग लिया। अभ्यास के दौरान विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और आपात स्थिति में उनकी प्रतिक्रिया क्षमता को परखा गया।

अरुण बोथरा के मुताबिक ओडिशा की तटरेखा करीब 575 किलोमीटर लंबी है। इतनी लंबी तटीय सीमा की निगरानी और सुरक्षा अपने आप में बड़ी चुनौती है। ऐसे में समुद्र से लेकर तटीय इलाकों तक सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच लगातार बेहतर तालमेल जरूरी है।

‘सागर कवच’ जैसे अभ्यासों के जरिए सुरक्षा एजेंसियां संभावित परिस्थितियों में अपनी तैयारियों का परीक्षण करती हैं। साथ ही, किसी आपात स्थिति के दौरान अलग-अलग विभाग किस तरह एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे, इसकी भी व्यावहारिक जांच की जाती है।

अधिकारियों का मानना है कि तटीय सुरक्षा केवल किसी एक एजेंसी की जिम्मेदारी नहीं है। समुद्री क्षेत्र की निगरानी, तटवर्ती इलाकों की सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विभिन्न विभागों के बीच सूचना साझा करना और त्वरित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है। ओडिशा में आयोजित इस बड़े अभ्यास को इसी समन्वित सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

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