बिहार बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए नितिन नबीन ने दान किया तीन महीने का वेतन, राहत कार्यों को लेकर दी जानकारी

पटना: बिहार में जारी बाढ़ की स्थिति के बीच भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने बाढ़ प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए अपने स्तर से आर्थिक सहयोग किया है। 18 सितंबर 2026 को जारी भाजपा के प्रेस नोट के अनुसार, राज्यसभा सांसद के रूप में नितिन नबीन ने अपने तीन महीने के वेतन की राशि 6.35 लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में दान की है। नितिन नबीन ने कहा कि बिहार के बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने के लिए सरकार पूरी तत्परता के साथ काम कर रही है। उन्होंने संकट की इस घड़ी में प्रभावित लोगों के साथ खड़े रहने की बात कही। प्रेस नोट में बताया गया है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए 550 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविरों के साथ-साथ कम्युनिटी किचन और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था किए जाने की जानकारी भी दी गई है। इसके अलावा एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बचाव एवं राहत कार्यों में लगातार तैनात हैं। सरकार की ओर से बाढ़ से प्रभावित किसानों की फसलों को हुए नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है। प्रेस नोट के मुताबिक, फसल क्षति का मूल्यांकन पूरा होने के बाद आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। नितिन नबीन ने बाढ़ की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और सहायता पहुंचाने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। उनके मुताबिक, सरकार का प्रयास है कि जरूरतमंद परिवारों तक समय पर जरूरी मदद पहुंच सके। प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों को प्रति परिवार 7 हजार रुपये की दर से कुल 550 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। राहत शिविरों, सामुदायिक रसोई, चिकित्सा सुविधाओं और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था किए जाने की भी जानकारी दी गई है। केंद्र सरकार के सहयोग का उल्लेख करते हुए बताया गया कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित लोगों से मुलाकात की। नितिन नबीन ने भरोसा जताया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत और जरूरी सहायता पहुंचाने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।

राजस्थान निकाय चुनाव 2026: डोटासरा का BJP पर बड़ा आरोप, बोले- हजारों चुने प्रतिनिधि होटलों में कैद

सीकर: राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव 2026 के बाद बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सीकर में एक कार्यक्रम के दौरान डोटासरा ने दावा किया कि बड़ी संख्या में चुने हुए प्रतिनिधियों को पिछले कई दिनों से होटलों में रखा गया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति बताया। डोटासरा ने आरोप लगाया कि भाजपा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास नहीं करती और सरकारी तंत्र तथा सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल करके सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में जनता के जनादेश के बाद अब बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक जोड़-तोड़ की कोशिशें की जा रही हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पिछले पांच दिनों से हजारों चुने हुए प्रतिनिधि होटलों में रहने को मजबूर हैं। उनके मुताबिक, चुनाव जीतने के बाद भी प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर नहीं मिल रहा है। हालांकि, ये आरोप डोटासरा की ओर से लगाए गए हैं और भाजपा की ओर से इन दावों पर अलग प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। डोटासरा ने आगामी पंचायत चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि वह लिखकर देने को तैयार हैं कि पंचायत चुनाव में भाजपा को 30 प्रतिशत वोट भी नहीं मिलेंगे। उनके इस बयान को आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और आत्मविश्वास से जोड़कर देखा जा रहा है। राजस्थान में हालिया निकाय चुनाव के बाद कई स्थानों पर बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी कई निकायों में महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में प्रमुख दल अपने पक्ष में बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। डोटासरा के आरोपों के बाद राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के संकेत हैं। अब निगाहें निकाय बोर्ड गठन और आने वाले पंचायत चुनावों पर टिकी हैं।

अनंत सिंह के आरोपों पर नीरज कुमार का पलटवार, बोले- अपराध और अपराधियों से समझौता नहीं

पटना: जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने अनंत सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों पर पलटवार करते हुए अपने रुख को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि वह अपराध और अपराधियों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकते। नीरज कुमार ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर कहा कि यदि किसी मामले में नार्को टेस्ट की बात सामने आती है, तो इसका अधिकार न्यायालय के पास है। नीरज कुमार ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए राजनीतिक और वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति के निजी आचरण या प्रतिष्ठा को निशाना बनाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने संकेत दिया कि यदि उनके खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी या चरित्र को धूमिल करने का प्रयास किया गया, तो वह उसका जवाब देने से पीछे नहीं हटेंगे। जेडीयू एमएलसी ने पार्टी के साथ अपने राजनीतिक सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें अवसर दिया और आगे बढ़ाया है। उनके मुताबिक, उनकी राजनीतिक पहचान किसी व्यक्ति विशेष की कृपा या अहसान पर आधारित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा के दौरान अपनी क्षमता के आधार पर चुनावी राजनीति में जगह बनाई है। नीरज कुमार ने बाहुबल के आरोपों से भी खुद को अलग करते हुए कहा कि उन्होंने कभी चुनाव जीतने या राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए बाहुबल का सहारा नहीं लिया। उनका कहना है कि वह लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ने और जीतने में सक्षम हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच आरोप-प्रत्यारोप को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है। दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ऐसे में नीरज कुमार का ताजा बयान इस विवाद को लेकर उनके रुख को स्पष्ट करता है। मामले में आगे दोनों नेताओं की ओर से आने वाली प्रतिक्रियाओं पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।

ममता बनर्जी की बनाई TMC में अब पहचान को लेकर बगावत, 28 साल बाद बदले हालात

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पहचान लंबे समय से ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर से जुड़ी रही है। कांग्रेस से अलग होकर ममता बनर्जी ने 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। अपने राजनीतिक संघर्ष और आंदोलनों के जरिए उन्होंने पार्टी को राज्य की प्रमुख राजनीतिक ताकतों में शामिल किया। हालांकि, करीब 28 साल बाद पार्टी के भीतर ही विरोध और बगावत का दौर उसकी पहचान से जुड़े सवाल तक पहुंच गया है। इस पूरे घटनाक्रम का ताजा केंद्र चुनाव आयोग का अंतरिम फैसला है। आयोग ने 6 अक्टूबर को होने वाले पश्चिम बंगाल उपचुनाव के लिए फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगाई है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब पार्टी की राजनीतिक विरासत और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर मतभेद सामने आए हैं। इस निर्णय ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक असामान्य स्थिति पैदा कर दी है। पहली बार ऐसा परिदृश्य सामने आया है, जिसमें ममता बनर्जी का गुट और पार्टी से अलग हुए या विरोध में खड़े नेता, दोनों ही आगामी चुनाव में उस नाम और चुनाव चिन्ह के बिना मैदान में उतरने की स्थिति में हैं, जिसके साथ तृणमूल कांग्रेस ने लगभग तीन दशकों तक चुनाव लड़ा है। ममता बनर्जी के राजनीतिक इतिहास में बगावत कोई नई बात नहीं रही है। कांग्रेस से अलग होने का उनका फैसला ही आगे चलकर TMC के गठन का आधार बना था। इसके बाद उन्होंने कई राजनीतिक चुनौतियों और पार्टी के भीतर उठे असंतोष का सामना करते हुए संगठन पर अपनी पकड़ बनाए रखी। अब परिस्थितियां कुछ अलग नजर आ रही हैं। जिस राजनीतिक संघर्ष और विद्रोह की राह से ममता ने अपनी पार्टी की नींव रखी थी, उसी पार्टी के भीतर विरोध की आवाजें उसकी पहचान और चुनावी विरासत को लेकर चुनौती बनकर सामने आई हैं। चुनाव आयोग का अंतरिम फैसला आगे किस दिशा में जाता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल यह विवाद केवल नाम और चुनाव चिन्ह तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक पहचान और राजनीतिक विरासत को लेकर चल रही खींचतान भी सामने आ गई है।

रूस में फंसा OIL का 300 मिलियन डॉलर डिविडेंड, भारत लाने की तैयारी तेज

नोएडा, उत्तर प्रदेश: रूस में जमा ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) के डिविडेंड से जुड़ी राशि को भारत लाने की प्रक्रिया को लेकर कंपनी के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) रणजीत रथ ने अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कंपनी का करीब 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर का डिविडेंड मॉस्को स्थित SBI की शाखा में है। फिलहाल यह रकम भारत वापस नहीं लाई जा सकी है, लेकिन कंपनी इस मामले को लेकर चिंतित नहीं है। रणजीत रथ के मुताबिक, इस राशि को वापस लाने को लेकर संबंधित स्तर पर बातचीत चल रही है। कंपनी इस बात की संभावनाएं तलाश रही है कि डिविडेंड की रकम को सिंगापुर या भारत में किस तरह स्थानांतरित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया अभी जारी है और संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के जरिए आगे का रास्ता निकाला जा रहा है। CMD ने बताया कि ऑयल इंडिया ने सिंगापुर में अपनी एक सब्सिडियरी के जरिए निवेश की संरचना तैयार की है। इसी वजह से कंपनी के सामने यह विकल्प भी मौजूद है कि रूस से संबंधित डिविडेंड की राशि को पहले सिंगापुर तक लाया जाए। हालांकि, अंतिम व्यवस्था किस रूप में होगी, इस पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। कंपनी के अनुसार, रूस में मौजूद इस राशि को लेकर कामकाज जारी है। मौजूदा स्थिति में रकम की वापसी में समय लग रहा है, लेकिन OIL प्रबंधन इसे नियमित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ा रहा है। कंपनी का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि उपलब्ध नियमों और वित्तीय व्यवस्थाओं के तहत राशि को सुरक्षित तरीके से निर्धारित गंतव्य तक लाया जा सके। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय कंपनियों के रूस से जुड़े निवेश और वहां से होने वाले वित्तीय लेनदेन पर लगातार नजर बनी हुई है। रूस में भारतीय कंपनियों की कारोबारी मौजूदगी के चलते डिविडेंड, भुगतान और फंड ट्रांसफर से जुड़े मामलों में विभिन्न वित्तीय व्यवस्थाओं और नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। रणजीत रथ के बयान से संकेत मिलता है कि 300 मिलियन डॉलर की राशि को लेकर OIL सक्रिय रूप से समाधान तलाश रही है और सिंगापुर अथवा भारत में धनराशि लाने के विकल्पों पर चर्चा जारी है।

JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के समर्थन में सरकार ने गिनाए 10 प्रमुख आधार

रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा को रद्द करने के फैसले को लेकर सरकार ने अपने शपथ पत्र में कई महत्वपूर्ण आधार सामने रखे हैं। सरकार का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए। इसी आधार पर परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने का निर्णय लिया गया। सरकार की ओर से शपथ पत्र में मुख्य रूप से 10 बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। 1. पूरी प्रक्रिया प्रभावित होने का दावा सरकार के अनुसार परीक्षा प्रक्रिया इस स्तर तक प्रभावित हो चुकी थी कि निष्पक्ष तरीके से सफल अभ्यर्थियों और कथित गड़बड़ी के जरिए सफल हुए उम्मीदवारों को अलग करना मुश्किल था। 2. सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का हवाला शपथ पत्र में कहा गया कि जब परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो जाए, तो न्यायालय द्वारा तय सिद्धांतों के आधार पर पूरी परीक्षा रद्द की जा सकती है। 3. वानशिखा बनाम केंद्र सरकार मामले का उल्लेख सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के संबंधित फैसले का हवाला देते हुए कहा कि व्यापक स्तर पर परीक्षा प्रक्रिया दूषित पाए जाने की स्थिति में पूरी परीक्षा निरस्त करने का आधार बन सकता है। 4. CID जांच के निष्कर्ष सरकार ने CID की जांच में सामने आए तथ्यों को परीक्षा रद्द करने के प्रमुख आधारों में शामिल किया है। 5. ICN टेक्नोलॉजी की भूमिका पर सवाल प्रश्नपत्र की छपाई और उसे परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने जैसे गोपनीय कार्यों से जुड़ी ICN टेक्नोलॉजी की भूमिका में कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। 6. गिरफ्तारियां और नोटिस सरकार के मुताबिक मामले में ICN टेक्नोलॉजी के CEO सोमांश प्रकाश समेत 28 लोगों की गिरफ्तारी हुई, जबकि 265 लोगों को नोटिस जारी किए गए। 7. पैसे लेकर जवाब रटाने का आरोप शपथ पत्र में परीक्षा से पहले पैसे लेकर अभ्यर्थियों को सवालों के जवाब उपलब्ध कराने और रटाने का आरोप दर्ज होने की बात कही गई है। 8. कई शहरों में कथित गड़बड़ी जांच में नेपाल के अलावा आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया और बोकारो से जुड़े केंद्रों का भी उल्लेख किया गया है। 9. लेन-देन के सबूत और 10 सफल अभ्यर्थी सरकार ने कथित आर्थिक लेन-देन के साक्ष्य मिलने का दावा किया है। शपथ पत्र के अनुसार नेपाल में जवाब रटाए गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 CGL परीक्षा में सफल हुए। 10. नियुक्ति पत्र में CID जांच की शर्त सरकार के अनुसार सफल अभ्यर्थियों के नियुक्ति पत्र में पहले ही उल्लेख था कि नियुक्ति CID जांच के परिणाम से प्रभावित हो सकती है। जांच में प्रक्रिया के व्यापक रूप से प्रभावित होने की बात सामने आने के बाद कैबिनेट ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। सरकार के इन तर्कों का अंतिम कानूनी मूल्यांकन संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में होना है।

DUSU Election 2026: मतदान के बीच विनोद जाखड़ का बड़ा बयान, NSUI ने किया क्लीन स्वीप का दावा

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव को लेकर शुक्रवार को कैंपस में मतदान जारी है। चुनावी माहौल के बीच NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने संगठन के पक्ष में समर्थन का दावा करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। विनोद जाखड़ ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र इस बार अपने मुद्दों को ध्यान में रखते हुए मतदान कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि छात्रों में विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं और छात्र हितों से जुड़े विषयों को लेकर नाराजगी है। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। NSUI अध्यक्ष ने BJP, RSS और ABVP पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि BJP से जुड़े कई जनप्रतिनिधि और MCD से जुड़े लोग कैंपस में सक्रिय हैं। जाखड़ ने कहा कि DUSU चुनाव छात्रों का चुनाव है और इसमें बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने सत्य निकेतन की घटना का जिक्र करते हुए छात्र सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़े सवाल भी उठाए। जाखड़ ने आरोप लगाया कि NSUI को चुनाव प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों के दौरान कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। NSUI नेता ने यह भी दावा किया कि मतदान के दौरान उनके संगठन से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और कुछ के साथ मारपीट की गई। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों और प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है। सामाजिक न्याय को लेकर जाखड़ ने कहा कि NSUI ने अपने उम्मीदवारों के चयन में प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को महत्व दिया है। उन्होंने राहुल गांधी के सामाजिक न्याय से जुड़े संदेश का भी उल्लेख किया। वहीं, चुनाव परिणाम से पहले ही जाखड़ ने NSUI के चारों उम्मीदवारों की जीत का दावा करते हुए कहा कि संगठन DUSU की सभी चार प्रमुख सीटों पर जीत हासिल करेगा। दूसरी ओर, ABVP भी अपने उम्मीदवारों की जीत को लेकर आश्वस्त है। DUSU चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि छात्रों ने इस बार किस पैनल और उम्मीदवारों के पक्ष में अपना जनादेश दिया है।

Tata Group में नेतृत्व को लेकर घमासान, Tata Sons और Tata Trusts के बीच बढ़ी खींचतान

नई दिल्ली: टाटा समूह के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर एक अहम बोर्डरूम विवाद चर्चा में है। Tata Sons और Tata Trusts के बीच नेतृत्व की निरंतरता और समूह के संचालन से जुड़े मुद्दों को लेकर मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने देश के प्रमुख कारोबारी समूहों में शामिल टाटा समूह के प्रशासनिक ढांचे और भविष्य की नेतृत्व व्यवस्था पर ध्यान खींचा है। बोर्ड स्तर पर उठ रहे सवालों का केंद्र यह है कि समूह की कंपनियों का संचालन मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस और स्पष्ट नेतृत्व व्यवस्था के साथ किस तरह आगे बढ़ाया जाए। वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने इस संदर्भ में निदेशकों की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि कंपनियों के निदेशकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कंपनियों का संचालन और गवर्नेंस उचित तरीके से हो। उनके अनुसार, बोर्ड की भूमिका केवल नेतृत्व संबंधी फैसलों तक सीमित नहीं होती, बल्कि कंपनी के व्यापक हितों और प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखना भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इस बीच, पत्रकार आर. शिवशंकर ने हरीश साल्वे से टाटा समूह के भीतर चल रही बोर्डरूम खींचतान और नेतृत्व से जुड़े सवालों पर विशेष बातचीत की। इस बातचीत में टाटा Sons और Tata Trusts के बीच सामने आ रहे मतभेदों तथा नेतृत्व की निरंतरता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। टाटा समूह की संरचना में Tata Sons और Tata Trusts की महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण नेतृत्व और गवर्नेंस से जुड़े किसी भी घटनाक्रम पर कारोबारी जगत की नजर रहती है। फिलहाल इस विवाद से जुड़े विभिन्न पहलुओं और आगे की संभावित दिशा को लेकर चर्चाएं जारी हैं। नोट: इस खबर में लगाए गए तथ्य और टिप्पणियां उपलब्ध कराए गए इनपुट पर आधारित हैं। किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने पर खबर को उसके अनुसार अपडेट किया जा सकता है।

भारत का सेमीकंडक्टर सेक्टर बना ग्लोबल प्रतिस्पर्धी, अश्विनी वैष्णव ने Semicon 2.0 को लेकर बताया प्लान

नई दिल्ली: भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को लेकर केंद्र सरकार का फोकस लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि देश में शुरू हुई सेमीकंडक्टर उत्पादन की प्रक्रिया अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि भारत में स्थापित पांचों सेमीकंडक्टर प्लांट में उत्पादन शुरू हो चुका है और यहां तैयार होने वाले उत्पाद गुणवत्ता और लागत, दोनों स्तरों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं। अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को लेकर अब तक की प्रगति देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनका कहना है कि भारतीय कंपनियों और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से निकलने वाले उत्पाद निर्यात के लिहाज से भी प्रतिस्पर्धी हैं। इससे आने वाले समय में भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत जगह बनाने में मदद मिल सकती है। केंद्रीय मंत्री ने भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को दो चरणों में समझाया। उन्होंने कहा कि Semicon 1.0 का मुख्य उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए जरूरी आधार तैयार करना था। इसके तहत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने, निवेश आकर्षित करने और जरूरी इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दिया गया। अब सरकार Semicon 2.0 के जरिए इसी आधार को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य देश में विकसित हो रही सेमीकंडक्टर क्षमता को और मजबूत करना तथा भारत को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना है। सेमीकंडक्टर आज मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कई आधुनिक तकनीकों का अहम हिस्सा है। ऐसे में घरेलू स्तर पर चिप निर्माण की क्षमता बढ़ने से भारत की तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री के बयान से संकेत मिलता है कि भारत अब केवल सेमीकंडक्टर निर्माण की नींव रखने के चरण से आगे बढ़कर उत्पादन, गुणवत्ता, लागत और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

एशियन गेम्स में खिलाड़ियों की सुविधाओं को लेकर बोले शेफ डी मिशन सहदेव यादव, कहा- कुछ दिक्कतें थीं, अपने स्तर पर किए इंतजाम

आइची-नागोया | जापान में होने वाले एशियन गेम्स को लेकर भारतीय दल की तैयारियों के बीच खिलाड़ियों के ठहरने और परिवहन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर चर्चा तेज हो गई है। भारतीय दल के शेफ डी मिशन सहदेव यादव ने बताया कि खिलाड़ियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए कई व्यवस्थाएं अपने स्तर पर की गई हैं। सहदेव यादव के मुताबिक भारतीय खिलाड़ियों के लिए ठहरने की व्यवस्था की गई है। शुरुआत में कुछ समस्याएं सामने आई थीं, जिसके बाद अतिरिक्त होटल की व्यवस्था करने का फैसला लिया गया। उन्होंने बताया कि भारतीय टीम की ओर से अब तक 18 कमरों की बुकिंग की जा चुकी है, जबकि खिलाड़ियों की जरूरत को देखते हुए 10 और कमरे बुक किए जाने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि आयोजन स्थल पर आवास की उपलब्धता को लेकर कमी जरूर है। इसी वजह से भारतीय दल को अपने स्तर पर अतिरिक्त इंतजाम करने पड़े हैं। खिलाड़ियों के आने-जाने से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए भी टीम ने वैकल्पिक व्यवस्था की है। सहदेव यादव ने बताया कि खिलाड़ियों के लिए कार और होटल की व्यवस्था भारतीय दल की ओर से की जा रही है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। शेफ डी मिशन ने accreditation यानी खिलाड़ियों और अधिकारियों की मान्यता प्रक्रिया को भी समय लेने वाला बताया। उनके अनुसार यह प्रक्रिया क्रूज पर की जा रही है और इसमें अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। इसके अलावा परिवहन व्यवस्था से संबंधित कुछ समस्याएं भी सामने आई हैं। सहदेव यादव ने आयोजन की व्यवस्थाओं में शुरुआती स्तर पर कुछ अव्यवस्था होने की बात भी कही। हालांकि उन्होंने इस समय किसी व्यक्ति या संस्था को जिम्मेदार ठहराने के बजाय खिलाड़ियों की सुविधा पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं। भारतीय दल की प्राथमिकता खिलाड़ियों की समस्याओं को दूर करना और उन्हें आरामदायक माहौल उपलब्ध कराना है। उनका कहना है कि खिलाड़ी बिना किसी अतिरिक्त परेशानी के अपनी तैयारियों और प्रदर्शन पर ध्यान दें, पदक जीतें और इसके बाद आराम कर सकें—यही भारतीय दल की कोशिश है।