हैदराबाद/कोलकाता: नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मिलन प्रधान को पश्चिम बंगाल पुलिस ने 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े पुराने हत्या के मामले में गिरफ्तार किया है। उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई, जब ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया था।
कांग्रेस और उसके नेताओं ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया है। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि चुनाव के बीच उम्मीदवार की गिरफ्तारी विपक्ष को चुनावी मैदान से प्रभावित करने की कोशिश है। राहुल गांधी ने भी गिरफ्तारी को लेकर सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है।
वहीं, बीजेपी नेता करुणासागर ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मिलन प्रधान की गिरफ्तारी किसी राजनीतिक बदले की कार्रवाई नहीं, बल्कि लंबित कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है। उनके मुताबिक, प्रधान के खिलाफ कई गैर-जमानती वारंट लंबित थे और अदालत में पेश नहीं होने के बाद पुलिस ने वारंट को अमल में लाते हुए गिरफ्तारी की।
करुणासागर ने कहा कि किसी व्यक्ति के चुनाव लड़ने से उसे लंबित कानूनी कार्रवाई से स्वतः छूट नहीं मिल जाती। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी से अपील की कि वे पूरे तथ्यों के साथ जनता के सामने अपना पक्ष रखें।
इस मामले में गिरफ्तारी के समय को लेकर राजनीतिक सवाल जरूर उठ रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस कार्रवाई पुराने मामले और लंबित वारंट से जुड़ी बताई गई है, जबकि कांग्रेस ने इसके समय पर आपत्ति जताई है। यानी फिलहाल विवाद का मुख्य केंद्र यही है कि कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया और चुनावी घटनाक्रम का आपसी संबंध क्या है।
नंदीग्राम में 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होना है और मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने चुनावी माहौल को और चर्चा में ला दिया है।