पटना नवरात्रि पंडाल सुरक्षा: नवरात्रि के दौरान दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अग्निशमन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पूजा पंडालों में आग लगने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में पंडाल संचालकों को आग से बचाव के लिए जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।
फायर विभाग के DIG मनोज कुमार नट ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि सभी संबंधित पंडालों में दो ड्रम पानी और रेत रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य आग लगने जैसी आपात स्थिति में शुरुआती स्तर पर ही बचाव के उपाय सुनिश्चित करना है, ताकि आग को फैलने से रोकने में मदद मिल सके।
पंडालों में आग से बचाव के लिए विशेष निर्देश
नवरात्रि के दौरान पटना के विभिन्न इलाकों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में पंडालों में सुरक्षा इंतजामों का दुरुस्त होना बेहद जरूरी है। बिजली की सजावट, अस्थायी निर्माण और लोगों की भीड़ के बीच आग से जुड़ी किसी भी घटना को रोकने के लिए सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
फायर विभाग की ओर से दिए गए निर्देशों के तहत पानी और रेत की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इन संसाधनों से छोटी आग की स्थिति में शुरुआती मदद मिल सकती है। हालांकि, आग की गंभीर स्थिति में दमकल विभाग की सहायता लेना जरूरी होगा।
पंडालों के आसपास से हटाए जा रहे ठेले
सुरक्षा व्यवस्था के तहत पंडालों के आसपास मौजूद ठेलों को भी हटाया जा रहा है। इसका उद्देश्य संभावित फायरिंग के खतरे को ध्यान में रखते हुए आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित रखना और आपात स्थिति में आवाजाही के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना है।
पंडालों के आसपास अनावश्यक भीड़ और अस्थायी दुकानों की मौजूदगी से रास्ते बाधित हो सकते हैं। ऐसे में ठेलों को हटाने से श्रद्धालुओं की आवाजाही और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्य में सुविधा मिल सकती है।
श्रद्धालुओं से सतर्क रहने की अपील
नवरात्रि के दौरान पूजा पंडालों में आने वाले श्रद्धालुओं को भी सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए। पंडालों में ज्वलनशील सामग्री के इस्तेमाल से बचना, बिजली के तारों के पास सावधानी बरतना और आपातकालीन रास्तों को खाली रखना महत्वपूर्ण है।
पटना में नवरात्रि पंडालों की सुरक्षा को लेकर अग्निशमन विभाग की तैयारियों का मुख्य उद्देश्य आग की घटनाओं को रोकना और आपात स्थिति में त्वरित बचाव सुनिश्चित करना है। पंडाल संचालकों और श्रद्धालुओं की सतर्कता से त्योहार को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।