UTAR PRADESH NEWS;योगी आदित्यनाथ ने की रामनाथ कोविन्द के संघर्ष की सराहना, बोले- अभावों से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे

रामनाथ कोविन्द का जीवन संघर्ष; लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के जीवन संघर्ष, सादगी और सार्वजनिक सेवा के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविन्द ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी मेहनत, शिक्षा और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर तय किया। उनका जीवन समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कोविन्द के शुरुआती जीवन से लेकर राष्ट्रपति पद तक पहुंचने की यात्रा का उल्लेख किया।

गरीब परिवार में जन्म, संघर्षों से बनाई पहचान

योगी आदित्यनाथ ने बताया कि रामनाथ कोविन्द का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के परौंख गांव में एक अत्यंत गरीब परिवार में हुआ था। बचपन में ही उनके सिर से मां का साया उठ गया, लेकिन इन कठिन परिस्थितियों ने उनके हौसले को कमजोर नहीं किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविन्द ने अभावों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी परिस्थितियों को जीवन में आगे बढ़ने की राह में बाधा बनाने के बजाय मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का रास्ता चुना।

शिक्षा से वकालत और फिर सार्वजनिक जीवन तक का सफर

रामनाथ कोविन्द ने गांव के स्कूल से शुरुआती शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर उच्च शिक्षा हासिल की। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई। योगी आदित्यनाथ के अनुसार, वकालत के दौरान उन्होंने गरीबों और वंचित वर्गों की आवाज बनने का प्रयास किया।

उनका सार्वजनिक जीवन भी लगातार आगे बढ़ता गया। वह भारतीय जनता पार्टी में सदस्य और पदाधिकारी रहे। इसके बाद राज्यसभा के सांसद बने और फिर बिहार के राज्यपाल की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2017 में वह भारत के 14वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए और 2022 तक इस पद पर रहे।

युवाओं के लिए प्रेरणा है रामनाथ कोविन्द का जीवन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामनाथ कोविन्द की यात्रा का उल्लेख करते हुए उनके संघर्ष, सादगी और संवैधानिक जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक सामान्य ग्रामीण परिवेश से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना उनकी मेहनत और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा उनके जीवन के अनुभवों, संघर्षों और सार्वजनिक यात्रा को समझने का अवसर देती है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के सहारे आगे बढ़ा जा सकता है।

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