UTAR PRADESH NEWS:स्मृति ईरानी का राहुल गांधी पर हमला, बोलीं- अमेठी में खुद चुनाव नहीं लड़ सकते, दिल्ली में 14 दलों को कर रहे एकजुट

स्मृति ईरानी का राहुल गांधी पर हमला,अमेठी, उत्तर प्रदेश: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता स्मृति ईरानी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनके राजनीतिक रुख और विपक्षी दलों की एकजुटता को लेकर सवाल उठाए हैं। अमेठी में दिए गए अपने बयान में स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि जो व्यक्ति अमेठी में अपने दम पर चुनाव नहीं लड़ सकते, वे आज दिल्ली में 14 राजनीतिक दलों को एकजुट कर खुद को शहंशाह बनाने का आह्वान कर रहे हैं। राहुल गांधी पर स्मृति ईरानी का तीखा बयान स्मृति ईरानी ने अपने बयान में राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश संविधान और चुनाव आयोग के खिलाफ किए जा रहे ऐसे दुस्साहस को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने विपक्षी दलों की राजनीतिक गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया का भी जिक्र किया। स्मृति ईरानी के इस बयान को कांग्रेस और विपक्षी दलों की राजनीति पर भाजपा के हमले के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से इस विशेष बयान पर प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है। उत्तर प्रदेश के तीन नेताओं के भाजपा में शामिल होने का जिक्र अपने संबोधन के दौरान स्मृति ईरानी ने उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख नेताओं के भाजपा में शामिल होने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि तीनों नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है और भाजपा कार्यकर्ता उनका स्वागत करते हैं। उनके मुताबिक, पार्टी में नए नेताओं का शामिल होना संगठन से जुड़ी गतिविधियों का हिस्सा है। हालांकि, उपलब्ध बयान में इन तीनों नेताओं के नाम और उनके राजनीतिक पृष्ठभूमि का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी हलचल स्मृति ईरानी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक मुद्दों को लेकर बयानबाजी जारी है। एक ओर भाजपा नेता विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल विभिन्न मुद्दों पर अपनी राजनीतिक भूमिका को सामने रख रहे हैं। फिलहाल, स्मृति ईरानी के बयान का मुख्य केंद्र राहुल गांधी, 14 राजनीतिक दलों की एकजुटता और चुनाव आयोग से जुड़ा मुद्दा रहा। इस बयान पर आगे कांग्रेस या अन्य विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया आती है, तो राजनीतिक बहस को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

चुनाव आयोग के मुद्दे पर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक हलचल तेज

**नई दिल्ली:** चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की चर्चा है। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की भूमिका जैसे विषयों पर राजनीतिक दलों के बीच बहस लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। इसी पृष्ठभूमि में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और संबंधित कानूनी मामलों पर लोगों की नजर बनी हुई है। ## चुनाव आयोग की भूमिका पर उठ रहे सवाल चुनाव आयोग देश में स्वतंत्र और  निष्पक्ष चुनाव कराने वाली संवैधानिक संस्था है। ऐसे में आयोग के फैसलों, मतदाता सूची में संशोधन और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है। विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही को लेकर चर्चा भी तेज होती है। **इस पूरे विवाद का प्रमुख मुद्दा चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा बनाए रखना है।** राजनीतिक दलों की मांगों और आयोग के पक्ष को समझना इस मामले में जरूरी होगा। ## प्रदर्शन स्थलों पर प्रतिबंध भी चर्चा में दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थानों और सार्वजनिक सभाओं से जुड़े प्रतिबंधों का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से कुछ स्थानों पर प्रदर्शन को लेकर नियम लागू किए जाते हैं। हालांकि, इन नियमों के बीच राजनीतिक दलों और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों को लेकर सवाल उठ सकते हैं। प्रदर्शन की अनुमति, निर्धारित स्थलों के इस्तेमाल और प्रशासनिक पाबंदियों से जुड़े मामलों में संबंधित आदेशों और आधिकारिक जानकारी की भूमिका अहम रहती है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रशासन के निर्देशों और संबंधित पक्षों के बयान देखना जरूरी है। ## सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर भी नजर चुनाव आयोग से जुड़े विवादों और मतदाता सूची संबंधी मुद्दों पर न्यायिक कार्यवाही को लेकर भी 관심 बना हुआ है। यदि संबंधित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं, तो अदालत की सुनवाई, याचिकाकर्ताओं की दलीलें और न्यायालय के आदेश इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। **फिलहाल इस विषय में आगे की स्थिति समझने के लिए आधिकारिक बयान, प्रशासनिक आदेश और अदालत की नवीनतम कार्यवाही पर नजर रखना जरूरी है।** किसी भी राजनीतिक दावे या प्रदर्शन से जुड़ी खबर की पुष्टि विश्वसनीय स्रोतों से करना पाठकों के लिए उपयोगी रहेगा।

मतदाता सूची विवाद: राहुल गांधी समेत विपक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, याचिका पर सुनवाई अटकी

मतदाता सूची विवाद; नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के 11 नेताओं ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए हैं। मतदाता सूची विवाद क्या हैं विपक्ष के आरोप?   विपक्ष की याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता और उचित सुरक्षा उपायों की कमी हो सकती है। याचिकाकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निर्णय प्रक्रिया, मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में कथित बदलाव और चुनावी डेटाबेस के संचालन पर भी सवाल उठाए हैं।   विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े फैसलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि किसी भी योग्य नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो। हालांकि, ये याचिकाकर्ताओं के आरोप हैं और इन पर अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है।   सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई?   याचिका में मतदाता सूची में हुए बदलावों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की गई है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। विपक्ष ने बूथवार हटाए गए नामों और उनके कारणों को सार्वजनिक करने तथा गलत तरीके से नाम हटाए जाने की स्थिति में उन्हें बहाल करने की प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की है। फिलहाल क्यों अटकी सुनवाई?   13 अक्टूबर को याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने दाखिले से जुड़ी 14 प्रक्रियागत कमियां बताई हैं। इनमें कुछ वकालतनामों का नहीं होना, दस्तावेजों की अस्पष्ट प्रतियां और 220 रुपये की कोर्ट फीस कम जमा होना शामिल है। ये आपत्तियां याचिका की प्रक्रिया से संबंधित हैं, न कि उसके आरोपों पर अदालत का फैसला।   अब इन कमियों को दूर कर याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने की कोशिश की जाएगी। इस मामले में आगे की कार्रवाई पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजर बनी हुई है।

राहुल गांधी का CEC ज्ञानेश कुमार पर बड़ा हमला, बोले- इस्तीफा देना पड़ेगा

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर INDIA गठबंधन के सांसदों के विरोध प्रदर्शन पर केंद्र सरकार और चुनाव व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद चुनाव आयुक्त से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन उन्हें मिलने का अवसर नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयुक्त से मिलने की कोशिश की थी, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन करने से भी रोक दिया। राहुल गांधी के मुताबिक, विपक्ष अब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर जनता के सामने अपनी बात रखने की तैयारी में है। 🔴 राहुल गांधी ने CEC की वैधता पर उठाया सवाल राहुल गांधी ने अपने बयान में ज्ञानेश कुमार की चुनाव आयुक्त के रूप में वैधता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, RSS प्रमुख मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार की भूमिका से देश के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा है। राहुल गांधी ने कहा कि जिन लोगों पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। 🔴 FIR को लेकर भी दिया बड़ा बयान विपक्ष के नेता ने अपने खिलाफ दर्ज FIR का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ अब तक 45 FIR दर्ज हैं और उनका लक्ष्य 100 FIR तक पहुंचने का है। राहुल गांधी ने कहा कि उनके लिए प्रत्येक FIR एक तरह का “मेडल” है। राहुल गांधी के इन बयानों से साफ है कि चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। हालांकि, राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।