CWC बैठक में नीतीश कुमार पर चर्चा, दिग्विजय सिंह बोले- साथ रहते तो हालात अलग होते

नई दिल्ली: कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता नीतीश कुमार को लेकर भी चर्चा हुई। बैठक के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने INDIA गठबंधन से नीतीश कुमार के अलग होने को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार गठबंधन में बने रहते तो राजनीतिक परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने बैठक में इस बात पर जोर दिया कि नीतीश कुमार को INDIA गठबंधन से अलग होने से रोकने की कोशिश की जानी चाहिए थी। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्षी गठबंधन के स्तर पर नीतीश कुमार के साथ बेहतर राजनीतिक तालमेल बनाए रखने की कोशिश होती तो परिस्थितियां अलग दिशा में जा सकती थीं। 🔴 नीतीश के जाने पर कांग्रेस में उठा सवाल दरअसल, नीतीश कुमार ने जनवरी 2024 में बिहार में महागठबंधन से अलग होकर एक बार फिर बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के साथ सरकार बनाई थी। इससे पहले वह विपक्षी दलों को एक साथ लाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके थे और INDIA गठबंधन के शुरुआती दौर में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही थी। CWC की बैठक में दिग्विजय सिंह की टिप्पणी के बाद पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आने की बात रिपोर्टों में कही गई है। कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस आकलन से असहमति जताई। रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि नीतीश कुमार के गठबंधन से अलग होने को केवल उन्हें रोकने की कोशिश के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। 🔴 सोनिया गांधी ने भी रखी अपनी बात बैठक में सोनिया गांधी की ओर से भी नीतीश कुमार को लेकर प्रतिक्रिया सामने आने की खबर है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार गठबंधन में लंबे समय तक बने रहने के इच्छुक नहीं थे और उनके अलग होने की स्थिति पहले से बन रही थी। यानी बैठक में नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से बाहर होने को लेकर कांग्रेस नेताओं के बीच अलग-अलग राजनीतिक आकलन सामने आए। 🔴 गठबंधन की राजनीति पर फिर चर्चा दिग्विजय सिंह की टिप्पणी ने एक बार फिर विपक्षी गठबंधन में सहयोगी दलों के साथ तालमेल और नेतृत्व से जुड़े पुराने सवालों को चर्चा में ला दिया है। नीतीश कुमार का INDIA गठबंधन से अलग होना 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना गया था। अब CWC की बैठक में इस घटनाक्रम पर हुई चर्चा ने कांग्रेस के भीतर उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर बहस को फिर सामने ला दिया है। हालांकि, दिग्विजय सिंह की टिप्पणी को उनका व्यक्तिगत राजनीतिक आकलन माना जाना चाहिए। यह कहना कि नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन में बने रहने से चुनावी या राजनीतिक परिणाम निश्चित रूप से अलग होते, एक संभावित राजनीतिक आकलन है, स्थापित तथ्य नहीं।

खरगे के बयान पर विजय शर्मा का पलटवार, बोले- जनता ने PM मोदी को तीसरी बार चुना

रायपुर: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों को लेकर अपनी बात रखी। विजय शर्मा ने कहा कि देश की जनता ने नरेंद्र मोदी को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री चुना है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री को देश की जनता से मिला जनादेश प्राप्त है और किसी नेता के कहने पर उनसे इस्तीफा देने या कोई निर्णय लेने की उम्मीद नहीं की जा सकती। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों को लोकतंत्र में अपनी बात रखने और अपनी मांगें सामने रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कांग्रेस से अपनी मांगों और मुद्दों को स्पष्ट रूप से सामने रखने की बात कही। INDIA गठबंधन की बैठक पर भी बोले विजय शर्मा INDIA गठबंधन की बैठक को लेकर भी विजय शर्मा ने विपक्षी गठबंधन के नेतृत्व पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन के लिए नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार, यदि नेतृत्व स्पष्ट दिशा के साथ आगे बढ़ता है तो संगठन को आगे बढ़ने में मदद मिलती है। वहीं, नेतृत्व में दिशा को लेकर असमंजस होने पर संगठन के सामने भी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। विजय शर्मा का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस और विपक्षी दल केंद्र सरकार तथा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा नेता विपक्ष की मांगों और राजनीतिक रुख को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। फिलहाल, खरगे के बयान और विजय शर्मा की प्रतिक्रिया के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं।

नितिन नबीन के बंगाल दौरे पर सौगत रॉय का तंज, SIR को लेकर भी उठाए सवाल

कोलकाता, पश्चिम बंगाल: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के पश्चिम बंगाल दौरे को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नबीन के दौरे को लेकर कहा कि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर वे अभी बंगाल में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सौगत रॉय के मुताबिक, नितिन नबीन ने राज्य में कुछ बैठकें की हैं, लेकिन इसका तत्काल कोई बड़ा असर दिखाई नहीं देगा। सौगत रॉय ने भाजपा के संगठनात्मक ढांचे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी के कामकाज में RSS की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनका यह बयान नितिन नबीन के हालिया बंगाल दौरे के बीच सामने आया है। नबीन ने अपने दौरे के दौरान प्रदेश भाजपा के नेताओं, सांसदों और विधायकों के साथ संगठन से जुड़े मुद्दों पर बैठकें की थीं। वहीं, चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े विवाद पर भी सौगत रॉय ने विपक्ष के विरोध का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में बदलाव को लेकर ममता बनर्जी द्वारा उठाए गए सवालों पर देशभर में आवाज उठाई जा रही है। हालांकि, मतदाता सूची में नाम हटाए जाने के आंकड़ों और प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग तथा विपक्ष के बीच अलग-अलग दावे सामने आए हैं। चुनाव आयोग की ओर से प्रक्रिया को नियमों के तहत बताया गया है, जबकि विपक्षी दलों ने पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए हैं। सौगत रॉय ने आगामी INDIA गठबंधन की बैठक को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ अभिषेक बनर्जी भी बैठक में शामिल होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि बैठक सकारात्मक रहेगी और विपक्षी दलों के बीच महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।

30 सितंबर की INDI गठबंधन बैठक पर संजय सरावगी का बड़ा बयान, बोले- ‘यह स्वार्थ का गठबंधन है’

पटना: 30 सितंबर को प्रस्तावित INDI गठबंधन की बैठक को लेकर बिहार की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने विपक्षी गठबंधन की बैठक को लेकर निशाना साधते हुए इसे स्वार्थ पर आधारित गठबंधन बताया है। उन्होंने कहा कि INDI गठबंधन के नेता चाहे जितनी बैठकें करें, इससे NDA की एकजुटता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। संजय सरावगी ने कहा कि NDA पूरी तरह एकजुट है और अपने राजनीतिक एजेंडे के साथ मजबूती से आगे बढ़ रहा है। उनके मुताबिक विपक्षी दलों के बीच होने वाली बैठकों से जनता के बीच कोई अलग संदेश नहीं जाने वाला है। उन्होंने दावा किया कि देश की जनता विपक्षी गठबंधन की राजनीति और उसके उद्देश्यों को समझ रही है। बीजेपी अध्यक्ष ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि INDI गठबंधन अलग-अलग राजनीतिक दलों के हितों को साधने के लिए साथ आया है। उन्होंने इसे ‘स्वार्थ का गठबंधन’ बताते हुए कहा कि केवल बैठकें करने से राजनीतिक समीकरण नहीं बदलते। उनके अनुसार NDA के घटक दलों के बीच बेहतर समन्वय और एकजुटता बनी हुई है। 30 सितंबर की बैठक पर टिकी नजर 30 सितंबर को होने वाली INDI गठबंधन की बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। विपक्षी दलों की बैठक में आगामी राजनीतिक रणनीति, आपसी समन्वय और दूसरे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में बीजेपी नेताओं की ओर से लगातार विपक्षी गठबंधन पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, संजय सरावगी के बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर गठबंधन की राजनीति को लेकर बहस तेज हो गई है। एक तरफ विपक्षी दल बैठक के जरिए अपनी रणनीति को मजबूत करने की कोशिश में हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी और NDA की ओर से अपनी एकजुटता को प्रमुखता से सामने रखा जा रहा है। हालांकि, 30 सितंबर की बैठक के बाद INDI गठबंधन की ओर से क्या रणनीति सामने आती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। राजनीतिक दलों के बयानों के बीच आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में गठबंधन और सीटों से जुड़े समीकरणों को लेकर गतिविधियां और बढ़ सकती हैं। नोट: संजय सरावगी द्वारा दिए गए बयान में INDI गठबंधन को लेकर लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक मत हैं।