SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, राहुल गांधी की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट SIR विवाद नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और संबंधित चुनाव अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह मामला लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने किन अधिकारियों से मांगा जवाब? मिली जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित पक्षों से याचिका में उठाए गए मुद्दों पर जवाब मांगा है। इस घटनाक्रम के बाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में आ गई है। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। क्या है SIR विवाद? SIR यानी Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण) मतदाता सूची की विस्तृत समीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और पात्र मतदाताओं से संबंधित विवरणों की जांच करना होता है। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान नामों को हटाने, जोड़ने या विवरणों में बदलाव को लेकर सवाल उठ सकते हैं। राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका में मतदाता सूची के पुनरीक्षण तथा कथित रूप से नाम हटाए जाने को लेकर आपत्ति जताई गई है। इस मामले में अब संबंधित चुनाव अधिकारियों का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किया जाना इस मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगने की न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। केवल नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने याचिका में लगाए गए आरोपों को सही मान लिया है या अंतिम फैसला सुना दिया है। अब मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत की सुनवाई पर निर्भर करेगी। इस प्रकरण पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ मतदाता सूची की पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल, मामले का अंतिम निष्कर्ष अदालत की आगे की सुनवाई और आदेशों के बाद ही स्पष्ट होगा।
UP Congress News: आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने संभाला प्रदेश अध्यक्ष का पद, 2027 में सरकार बनाने का लक्ष्य

आराधना मिश्रा मोना:लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने पदभार संभालने के बाद पार्टी की प्राथमिकताओं और आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनकी पहली जिम्मेदारी पार्टी कार्यकर्ताओं के विश्वास पर खरा उतरना और कांग्रेस नेतृत्व की उम्मीदों को पूरा करना है। इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को पार्टी के लिए अहम लक्ष्य बताया। आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार बनाकर उत्तर प्रदेश को नई दिशा देना है। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने पर जोर दिया। उनके बयान से साफ है कि पार्टी आने वाले समय में संगठनात्मक मजबूती के साथ चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाना चाहती है। 2027 के विधानसभा चुनाव पर कांग्रेस की नजर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सरकार बनाना कांग्रेस का प्रमुख लक्ष्य है। इसके लिए पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और कार्यकर्ताओं के भरोसे को कायम रखना जरूरी होगा। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए संगठन के विस्तार और जनसंपर्क पर ध्यान दे सकती है। आराधना मिश्रा ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं के विश्वास को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, पार्टी की जिम्मेदारी संभालने के बाद उनकी प्राथमिकता संगठन की अपेक्षाओं पर खरा उतरना और तय लक्ष्य की दिशा में काम करना है। इंडिया गठबंधन को मजबूत करने पर जोर आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि इंडिया गठबंधन को और मजबूत करना भी कांग्रेस की प्राथमिकताओं में शामिल है। विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल और एकजुटता को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। उनके बयान से संकेत मिलता है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी चुनावी रणनीति के साथ विपक्षी गठबंधन की मजबूती पर भी ध्यान देना चाहती है। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा को बताया अहम मुद्दा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा को देश के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी इस दिशा में संघर्ष कर रहे हैं और उनकी लड़ाई को ताकत देना पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल है। आराधना मिश्रा ‘मोना’ के मुताबिक, संगठन को मजबूत करने के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के मुद्दे पर भी काम करना जरूरी है। कुल मिलाकर, पदभार संभालने के बाद आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कांग्रेस के सामने तीन प्रमुख प्राथमिकताएं रखीं—कार्यकर्ताओं का विश्वास जीतना, इंडिया गठबंधन को मजबूत करना और 2027 के विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ना। अब इन लक्ष्यों को जमीन पर उतारने के लिए पार्टी संगठन किस तरह काम करता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।
भूपेश बघेल का BJP पर हमला, बोले- सरकार खुद कर रही चक्का जाम

रांची, झारखंड: कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने INDIA गठबंधन और CJP के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर भाजपा की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने इन आरोपों को मिथ्या बताते हुए कहा कि पहले आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारी रेल, बसें रोकते थे और चक्का जाम करते थे, लेकिन अब सरकार खुद ही यातायात बाधित करने का काम कर रही है। बघेल ने सड़क पर कीलें बिछाने और मेट्रो, ट्रेन तथा बसों की आवाजाही रोकने जैसे कदमों पर भी सवाल उठाए। भूपेश बघेल ने भाजपा के आरोपों को बताया गलत कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने कहा कि INDIA गठबंधन और CJP के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर भाजपा जो आरोप लगा रही है, वे सही नहीं हैं। उनके मुताबिक, विरोध-प्रदर्शन के दौरान सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों को भी समझने की जरूरत है। बघेल ने अपने बयान में पुराने आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले आंदोलनकारी रेल और बसें रोककर विरोध दर्ज कराते थे। कई बार चक्का जाम भी किया जाता था। हालांकि, मौजूदा हालात में सरकार की ओर से उठाए जा रहे सुरक्षा और यातायात संबंधी कदमों पर उन्होंने सवाल खड़े किए। सड़कों पर कीलें बिछाने और यातायात रोकने पर उठाए सवाल भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि अब सड़कों पर कीलें बिछाई जा रही हैं और मेट्रो, ट्रेन तथा बसों की आवाजाही भी प्रभावित की जा रही है। उन्होंने इसे सरकार की चिंता और डर से जोड़ते हुए कहा कि सरकार डरी हुई है और यह डर अच्छा है। उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर भाजपा की तरफ से विरोध-प्रदर्शनों को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं कांग्रेस नेता इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। विरोध-प्रदर्शन और सरकारी व्यवस्था पर छिड़ी बहस विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आम लोगों की आवाजाही सुचारु रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होती है। वहीं, राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप से सियासी माहौल गरमा सकता है। भूपेश बघेल का बयान इसी राजनीतिक टकराव के बीच सामने आया है। उन्होंने अपने वक्तव्य के जरिए भाजपा के आरोपों का जवाब देने के साथ-साथ सरकार की ओर से किए जा रहे इंतजामों पर भी निशाना साधा। फिलहाल, इस मामले में अलग-अलग राजनीतिक दलों के बयानों के बीच विरोध-प्रदर्शनों और यातायात व्यवस्था को लेकर बहस जारी है।
चुनाव आयोग पर आनंद दुबे का सवाल, SIR पर चर्चा की मांग; बोले- यह देश का मुद्दा

मुंबई: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आनंद दुबे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर चर्चा की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों से INDIA गठबंधन राहुल गांधी के नेतृत्व में लगातार आंदोलन कर रहा है। विपक्ष की मांग है कि चुनाव आयोग उसकी बात सुने और उठाए जा रहे सवालों पर गंभीरता से विचार करे। आनंद दुबे के मुताबिक, लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका केवल सरकार की आलोचना करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को संबंधित संस्थाओं के सामने रखना भी उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को केवल 10 मिनट का समय देकर उनकी बात नहीं सुन सकता? चुनाव आयोग से मुलाकात के लिए आंदोलन क्यों? आनंद दुबे ने कहा कि विपक्ष को अपनी बात रखने के लिए आंदोलन का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए चुनाव आयोग से अपने रवैये पर विचार करने की अपील की। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद का रास्ता खुला रहना चाहिए, ताकि अलग-अलग पक्षों की चिंताओं को सुना जा सके। शिवसेना (UBT) नेता ने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि वह विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज करने के बजाय उनसे जुड़े सवालों पर चर्चा करे। उनके अनुसार, किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे का समाधान बातचीत और विचार-विमर्श के जरिए निकाला जाना चाहिए। SIR पर चर्चा को बताया जरूरी आनंद दुबे ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के मुद्दे को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए और इसे केवल विपक्ष की राजनीतिक मांग के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह देश से जुड़ा मुद्दा है, इसलिए इस पर व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों को सुनना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था से भी अपेक्षा की जाती है कि वह संबंधित पक्षों की चिंताओं पर विचार करे। लोकतंत्र में संवाद पर जोर आनंद दुबे के बयान से स्पष्ट है कि INDIA गठबंधन SIR के मुद्दे पर अपनी बात चुनाव आयोग तक पहुंचाना चाहता है। विपक्ष की मांग है कि आयोग उसके प्रतिनिधियों को समय दे और इस विषय पर चर्चा का अवसर उपलब्ध कराए। हालांकि, चुनाव आयोग का पक्ष और SIR को लेकर उठाए गए विभिन्न सवालों पर उसका आधिकारिक जवाब इस बयान में शामिल नहीं है। ऐसे में पूरे मामले की तस्वीर समझने के लिए आयोग की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। मुख्य बात: आनंद दुबे ने चुनाव आयोग से संवाद स्थापित करने, राहुल गांधी की बात सुनने और SIR के मुद्दे पर चर्चा करने की मांग की है।
दिल्ली रवाना होने से पहले ममता बनर्जी का बड़ा बयान, बोलीं- आंदोलन के समय साथ खड़ा होना जरूरी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली दौरे के लिए रवाना हो गई हैं। दिल्ली जाने से पहले उन्होंने अपने दौरे की वजह और विपक्षी नेताओं के साथ प्रस्तावित बैठक को लेकर अपनी बात रखी। ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें दिल्ली आने के लिए कहा गया है, इसलिए वह जा रही हैं। उन्होंने बताया कि INDIA गठबंधन के नेताओं की ओर से राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए 8 या 9 अक्टूबर का समय मांगा गया है। इस संभावित मुलाकात में शामिल नेताओं की सूची में उनका नाम भी रखा गया है। ममता बनर्जी के मुताबिक, शुरुआत में उनका दिल्ली जाने का इरादा नहीं था। उन्होंने सोचा था कि उनकी जगह अभिषेक बनर्जी दिल्ली चले जाएंगे। हालांकि, गठबंधन के नेताओं ने उनसे स्वयं आने का आग्रह किया और सूची में उनका नाम भी शामिल कर दिया। आंदोलन के बीच साथ खड़ा होना जरूरी पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक आंदोलन के दौरान उनके लिए पीछे रहना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता भी चाहती है कि वह इस समय दिल्ली जाएं और संबंधित नेताओं के साथ खड़ी हों। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि फिलहाल पूजा का मौसम चल रहा है और लोग अपने-अपने कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। इसके बावजूद उन्हें दिल्ली का यह दौरा करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर राष्ट्रपति की ओर से मुलाकात के लिए समय मिलता है तो वह बैठक में शामिल होंगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद दिल्ली में आगे कौन-कौन से कार्यक्रम होंगे, इसकी उन्हें अभी जानकारी नहीं है। ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। उनके दिल्ली दौरे को विपक्षी एकजुटता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राहुल गांधी का CEC ज्ञानेश कुमार पर बड़ा हमला, बोले- इस्तीफा देना पड़ेगा

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर INDIA गठबंधन के सांसदों के विरोध प्रदर्शन पर केंद्र सरकार और चुनाव व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद चुनाव आयुक्त से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन उन्हें मिलने का अवसर नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयुक्त से मिलने की कोशिश की थी, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन करने से भी रोक दिया। राहुल गांधी के मुताबिक, विपक्ष अब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर जनता के सामने अपनी बात रखने की तैयारी में है। 🔴 राहुल गांधी ने CEC की वैधता पर उठाया सवाल राहुल गांधी ने अपने बयान में ज्ञानेश कुमार की चुनाव आयुक्त के रूप में वैधता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, RSS प्रमुख मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार की भूमिका से देश के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा है। राहुल गांधी ने कहा कि जिन लोगों पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। 🔴 FIR को लेकर भी दिया बड़ा बयान विपक्ष के नेता ने अपने खिलाफ दर्ज FIR का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ अब तक 45 FIR दर्ज हैं और उनका लक्ष्य 100 FIR तक पहुंचने का है। राहुल गांधी ने कहा कि उनके लिए प्रत्येक FIR एक तरह का “मेडल” है। राहुल गांधी के इन बयानों से साफ है कि चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। हालांकि, राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
ECI के खिलाफ विपक्ष के मार्च पर महुआ माजी का बयान, बोलीं- सवाल उठे हैं तो जवाब भी जरूरी

रांची, झारखंड: चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी सांसदों के विरोध मार्च को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी ने विपक्ष के रुख का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन का प्रदर्शन चुनाव आयोग के मुख्यालय तक पहुंचने के उद्देश्य से किया गया था। विपक्ष की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, क्योंकि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। महुआ माजी ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को अपनी बात रखने और सरकार या संवैधानिक संस्थाओं से सवाल पूछने का अधिकार है। उनके मुताबिक, जब चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, तो उन सवालों का जवाब भी सामने आना चाहिए। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल का दावा JMM सांसद ने अपने बयान में SIR यानी Special Intensive Revision से जुड़े फैसलों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्यों की ओर से यह बात सामने आई है कि उनकी अनुमति के बिना करीब 10 महीने के दौरान SIR से संबंधित 14 फैसले लिए गए। महुआ माजी के अनुसार, अगर चुनाव आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्था की निर्णय प्रक्रिया को लेकर ही सवाल खड़े हो रहे हैं, तो विपक्ष का विरोध करना स्वाभाविक है। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए दावों और फैसलों को लेकर संबंधित पक्षों की आधिकारिक स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। ‘लोकतांत्रिक तरीके से विरोध नहीं करेंगे तो क्या करेंगे?’ महुआ माजी ने कहा कि विपक्षी दल अगर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी असहमति दर्ज नहीं कराएंगे तो फिर उनके पास अपनी बात जनता और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाने का क्या रास्ता बचेगा। उन्होंने विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच ECI की विश्वसनीयता, SIR और चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, जबकि इन आरोपों और मांगों पर चुनाव आयोग का पक्ष भी इस विवाद में अहम रहेगा।
दिल्ली में CEC के खिलाफ INDIA गठबंधन का प्रदर्शन, आकाशवाणी भवन के आसपास भारी सुरक्षा

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ INDIA गठबंधन के विरोध-प्रदर्शन को लेकर राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रदर्शन को देखते हुए आकाशवाणी भवन के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर नजर बढ़ा दी है। जानकारी के मुताबिक, विरोध-प्रदर्शन के लिए इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) और NSUI के कई कार्यकर्ता आकाशवाणी भवन के आसपास पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस ने क्षेत्र में अतिरिक्त जवानों को तैनात किया है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत आने-जाने वाले लोगों और वाहनों पर भी निगरानी रखी जा रही है। आकाशवाणी भवन के आसपास निषेधाज्ञा लागू प्रशासन की ओर से आकाशवाणी भवन के आसपास के इलाके में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है। इसके तहत क्षेत्र में लोगों के एकत्र होने और सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर प्रतिबंध लागू रहते हैं। पुलिस का उद्देश्य किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोकना और इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। CEC के खिलाफ विपक्ष का विरोध CEC के खिलाफ INDIA गठबंधन से जुड़े दलों और कार्यकर्ताओं की ओर से विरोध जताया जा रहा है। प्रदर्शन के जरिए विपक्षी नेता और कार्यकर्ता चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। इसी क्रम में दिल्ली में प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा गया, जिसके मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। पुलिस और प्रशासन की ओर से प्रदर्शन वाले इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। फिलहाल आकाशवाणी भवन के आसपास का क्षेत्र सुरक्षा घेरे में है और पुलिस की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। मुख्य बिंदु:
दिल्ली में INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन पर अजय आलोक का तंज, बोले- ‘छुपन-छुपाई का खेल हो रहा’

नई दिल्ली: दिल्ली में INDIA ब्लॉक के नेताओं के विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता अजय आलोक ने विपक्ष के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए इसे आंदोलन के बजाय ‘छुपन-छुपाई का खेल’ करार दिया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन के तरीके पर तंज कसा। अजय आलोक ने आरोप लगाया कि विपक्ष की ओर से जिस तरह का प्रदर्शन किया जा रहा है, वह किसी गंभीर राजनीतिक आंदोलन की तरह नजर नहीं आ रहा है। उनके मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान नेताओं को जब बस में बैठाया गया, तो उनके कुछ सहयोगियों को आगे भेज दिया गया और बाद में राहुल गांधी बस से उतरकर वहां से चले गए। BJP नेता ने दावा किया कि राहुल गांधी इसके बाद आकाशवाणी की तरफ चले गए और फिर एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गए। इसी घटनाक्रम को लेकर उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पूरी स्थिति ‘छुपन-छुपाई’ के खेल जैसी दिखाई दे रही है। अजय आलोक ने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से दिल्ली के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस सांसदों के साथ सावधानी बरत रही है, क्योंकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। उनके अनुसार, पुलिस की जिम्मेदारी है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे और किसी सांसद के साथ कोई अप्रिय घटना न हो। उन्होंने विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ राजनीतिक दल जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग जगहों पर जाने से स्थिति उलझती दिखाई देती है। हालांकि, INDIA ब्लॉक की ओर से प्रदर्शन को लेकर अपने मुद्दों और राजनीतिक विरोध को लेकर अलग-अलग नेताओं द्वारा बयान दिए जा रहे हैं। ऐसे में अजय आलोक की टिप्पणी ने दिल्ली की सियासत में बयानबाजी को और तेज कर दिया है।
INDIA गठबंधन की बैठक से पहले शिवराज का हमला, राहुल गांधी के नेतृत्व पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने INDIA गठबंधन और कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी हार के बावजूद कांग्रेस अपनी गलतियों पर आत्ममंथन और जनता से माफी मांगने के बजाय भ्रम फैलाने और विपक्षी दलों पर आरोप लगाने का रास्ता अपना रही है। शिवराज सिंह चौहान ने INDIA गठबंधन की बैठक में प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर विपक्षी एकता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण चुनावी राज्य से समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं हुए। वहीं, दिल्ली की बैठक में आम आदमी पार्टी और डीएमके की गैरमौजूदगी का भी उन्होंने उल्लेख किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अखिलेश यादव ने राज्यसभा नामांकन प्रक्रिया में व्यस्त होने की बात कही थी, जबकि कुछ दलों ने बैठक से दूरी बनाई। शिवराज ने उद्धव ठाकरे के वर्चुअल तरीके से जुड़ने का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्षी गठबंधन के भीतर एकजुटता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि गठबंधन की स्थिति ऐसी हो गई है कि उसके नेता अलग-अलग दिशाओं में दिखाई दे रहे हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर भी शिवराज ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन राहुल गांधी को अपना नेता मानने के लिए तैयार नहीं है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस के भीतर भी राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर सवाल होने का आरोप लगाया। यह टिप्पणी उस घटनाक्रम के बाद आई है जिसमें कांग्रेस की कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं से अपने नेतृत्व पर भरोसा करने की अपील की थी। वहीं, 30 सितंबर को हुई INDIA गठबंधन की बैठक का प्रमुख मुद्दा चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष की आगे की रणनीति बताया गया है। विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त कार्रवाई और आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की। शिवराज सिंह चौहान के बयान ने इस बैठक को लेकर राजनीतिक बयानबाजी को और तेज कर दिया है। एक ओर कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, वहीं बीजेपी नेता विपक्षी गठबंधन की एकजुटता और नेतृत्व पर निशाना साध रहे हैं।