45 दिन तक चलेगा जमाबंदी शुद्धीकरण अभियान, रैयतों के घर-घर पहुंचेगा राजस्व विभाग

पटना: बिहार में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को दुरुस्त करने और जमाबंदी में दर्ज त्रुटियों को दूर करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विशेष अभियान चलाने जा रहा है। विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि पहली बार बड़े स्तर पर रैयतों के घर-घर जाकर जमाबंदी के रिकॉर्ड का शुद्धीकरण किया जाएगा। यह अभियान करीब 45 दिनों तक चलाया जाएगा। पटना के शास्त्रीनगर स्थित राजस्व सर्वे प्रशिक्षण संस्थान में शुक्रवार को सभी जिलों के अपर समाहर्ता (राजस्व) के साथ विभागीय कार्यों की समीक्षा बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने की। बैठक से पहले विभागीय सचिव जय सिंह ने मंत्री का स्वागत पुस्तक और पौधा भेंट कर किया। समीक्षा के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को मौजा-वार अभियान चलाकर जमाबंदी रिकॉर्ड को त्रुटिरहित बनाने पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली सरकारी जमीन का भौतिक सत्यापन शुरू करने और सरकारी प्लॉट से जुड़ी जमाबंदियों की जांच में तेजी लाने पर भी जोर दिया गया। बैठक में म्यूटेशन, परिमार्जन प्लस, डिजिटाइज्ड एवं लेफ्ट आउट जमाबंदी, ई-मापी, अभियान बसेरा, सरकारी भूमि सत्यापन और RCMS समेत कई राजस्व कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। मृत रैयतों के उत्तराधिकार से संबंधित मामलों और बंटवारा म्यूटेशन की स्थिति पर भी अधिकारियों से जानकारी ली गई। इसके अलावा भू-अभिलेख पोर्टल पर स्कैन किए गए दस्तावेजों को अपलोड करने, निबंधन से पहले भूमि रिकॉर्ड के सत्यापन तथा लॉक की गई जमाबंदियों को नियमानुसार अनलॉक करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा हुई। गलत प्रश्नावली और कथित फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मामलों में अब तक की कार्रवाई की स्थिति भी अधिकारियों से पूछी गई। विभाग का यह अभियान जमीन के रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को दूर करने और राजस्व अभिलेखों को अधिक व्यवस्थित एवं भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

निशांत कुमार ने हाजीपुर सदर अस्पताल का किया औचक निरीक्षण, रेफरल पॉलिसी को लेकर दिए सख्त निर्देश

हाजीपुर: वैशाली दौरे के दौरान निशांत कुमार ने हाजीपुर सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में मरीजों को रेफर किए जाने से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कुछ मामलों में मरीजों को रेफर करने के कारणों और संबंधित रिकॉर्ड के रखरखाव में कमियां सामने आने की बात कही गई। निशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि सरकार की रेफरल पॉलिसी का उद्देश्य मरीजों को रेफर करने से रोकना नहीं है, बल्कि ऐसे मामलों में अनावश्यक रेफरल पर नियंत्रण करना है, जहां मरीज का इलाज जिला अस्पताल में ही संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मरीज को जिला अस्पताल में जरूरी उपचार और सुविधाएं उपलब्ध हैं, तो बिना आवश्यकता उसे मेडिकल कॉलेज या किसी बड़े अस्पताल में भेजना मरीज और उसके परिजनों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बन सकता है। दूसरी ओर, गंभीर स्थिति या विशेषज्ञ उपचार की जरूरत वाले मरीजों को समय पर उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करना भी स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों से अपील करते हुए कहा कि रेफरल पॉलिसी को केवल सरकारी आदेश के तौर पर न देखा जाए। इसका मुख्य उद्देश्य मरीजों को सही समय पर सही स्तर की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्यकर्मी भी समाज का हिस्सा हैं और उनके परिवार के सदस्य भी कभी न कभी इसी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का उपयोग कर सकते हैं। निशांत कुमार ने राज्य के सभी जिलों के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को रेफरल पॉलिसी को गंभीरता से लागू करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि रेफरल व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जाएगी और अस्पतालों में औचक निरीक्षण का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस प्रक्रिया का उद्देश्य अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के साथ-साथ मरीजों को अनावश्यक भागदौड़ से बचाना और जरूरत पड़ने पर उन्हें समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध कराना बताया गया है।

भागलपुर में दिनदहाड़े भाजपा नेता को मारी गोली, इलाज के दौरान मौत; इलाके में दहशत

भागलपुर: बिहार के भागलपुर में दिनदहाड़े हुई गोलीबारी की घटना से इलाके में सनसनी फैल गई। इस वारदात में भाजपा नेता उमाभूषण उर्फ पप्पू तांती को गोली लग गई। गंभीर रूप से घायल भाजपा नेता को इलाज के लिए जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JLNMCH) में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घटना के बाद आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गोली चलने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जुटने लगी। गंभीर हालत में पप्पू तांती को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस की टीम वारदात से जुड़े तमाम पहलुओं की पड़ताल कर रही है। घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ के साथ-साथ अपराधियों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। दिनदहाड़े हुई इस हत्या के बाद स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि खुलेआम गोलीबारी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, घटना के पीछे वास्तविक वजह क्या है और हत्या किन परिस्थितियों में हुई, इसका स्पष्ट खुलासा पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल पुलिस संभावित आरोपियों की तलाश में जुटी है। घटना के बाद इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि वारदात में कितने लोग शामिल थे और हमलावर किस दिशा में फरार हुए। इस घटना ने एक बार फिर भागलपुर में अपराध और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। पुलिस जांच के बाद ही हत्या से जुड़े अन्य तथ्यों और संभावित कारणों की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

साल्बोनी जमीन घोटाला मामले में अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय को अदालत ले गई CID

पश्चिम मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल: साल्बोनी जमीन घोटाला मामले में जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। पश्चिम बंगाल सीआईडी (CID) ने तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) सुमित रॉय को मेदिनीपुर जिला अदालत में पेशी के लिए ले जाया। इस कार्रवाई के बाद मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक, साल्बोनी में जमीन से जुड़े कथित घोटाले की जांच सीआईडी द्वारा की जा रही है। इसी जांच के सिलसिले में सुमित रॉय को पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए जांच एजेंसी ने अपने कब्जे में लिया है। इसके बाद उन्हें मेदिनीपुर जिला अदालत के समक्ष पेश किया गया। साल्बोनी जमीन मामले में जमीन के लेन-देन, दस्तावेजों और उससे जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर जांच एजेंसी अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल कर रही है। सीआईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जमीन से जुड़े कथित लेन-देन में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और यदि अनियमितता हुई तो इसमें किन लोगों की भूमिका रही। सुमित रॉय का नाम इस मामले की जांच में सामने आने के बाद अब अदालत में उनकी पेशी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका या अपराध में संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है। जांच एजेंसी की ओर से लगाए गए आरोपों को भी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साबित किया जाना बाकी है। इस मामले को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी के अदालत में पेश किए जाने से मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। अब अदालत में होने वाली सुनवाई और सीआईडी की आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि साल्बोनी जमीन मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और सुमित रॉय की भूमिका को लेकर एजेंसी के पास क्या तथ्य सामने आते हैं। मामले से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ किए जाने की संभावना बनी हुई है।

बैंक कर्मचारियों की देशव्यापी एक दिवसीय हड़ताल, लखनऊ में भी जोरदार प्रदर्शन

लखनऊ: देशभर में बैंक कर्मचारियों की ओर से एक दिवसीय हड़ताल शुरू होने के बाद बैंकिंग सेवाओं पर इसका असर देखने को मिल रहा है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर सार्वजनिक क्षेत्र के कई प्रमुख बैंकों के कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर काम से अलग रहकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। हजरतगंज स्थित इंडियन बैंक के बाहर बैंक कर्मियों का प्रदर्शन देखने को मिला। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए। महिला बैंक कर्मचारियों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लेते हुए अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी कई मांगों को लेकर संगठन स्तर पर बातचीत और आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं निकलने के कारण एक दिवसीय हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। बैंक कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सप्ताह में पांच कार्य दिवस यानी 5 वर्किंग डे लागू करना भी शामिल है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बैंकिंग सेक्टर में काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है और कर्मचारियों को कामकाज के साथ-साथ ग्राहकों की बढ़ती जरूरतों को भी संभालना पड़ता है। ऐसे में कार्यदिवस से जुड़े बदलाव समेत अन्य मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। कई मांगों को लेकर कर्मचारियों का विरोध हड़ताल में शामिल बैंक कर्मचारी विभिन्न मुद्दों को लेकर अपना विरोध जता रहे हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से समय-समय पर बैंकिंग व्यवस्था, कर्मचारियों की कार्यस्थितियों, पर्याप्त स्टाफ, काम के घंटे और अन्य सेवा संबंधी विषयों को लेकर मांगें उठाई जाती रही हैं। लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे बैंक कर्मियों ने भी अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन केवल एक दिन की हड़ताल तक सीमित नहीं है। यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। बैंक यूनियनों की ओर से आगे भी बड़े स्तर पर हड़ताल की चेतावनी दी गई है। कर्मचारियों के मुताबिक मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय हड़ताल का प्रस्ताव है। इसके बाद भी समाधान नहीं निकलने पर 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है। इस घोषणा के बाद बैंकिंग सेक्टर से जुड़े लोगों के बीच आगे की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अगर आंदोलन लंबे समय तक चलता है तो बैंक शाखाओं में प्रत्यक्ष रूप से होने वाले कामकाज पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है। बैंक शाखाओं में कौन-कौन सी सेवाएं प्रभावित होंगी? एक दिवसीय हड़ताल का सबसे सीधा असर बैंक की शाखाओं में होने वाले नियमित कामकाज पर पड़ने की संभावना है। बैंक शाखाओं में कर्मचारियों की मौजूदगी कम या नहीं होने के कारण कैश जमा और निकासी, चेक से जुड़े काम, बैंक खाते से संबंधित कई सेवाएं, दस्तावेजी प्रक्रिया और ग्राहकों से जुड़े अन्य काउंटर कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह बंद नहीं रहती। मौजूदा डिजिटल व्यवस्था के कारण ग्राहकों के पास बैंक शाखा के अलावा कई दूसरे विकल्प मौजूद हैं। UPI, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और ATM जैसी डिजिटल या वैकल्पिक सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की उम्मीद है, हालांकि किसी तकनीकी समस्या या संबंधित बैंक की व्यवस्था के आधार पर सेवा प्रभावित होने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए जिन ग्राहकों को बैंक शाखा जाकर कोई जरूरी काम करना है, उनके लिए हड़ताल की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। वहीं सामान्य डिजिटल लेनदेन करने वाले ग्राहकों को ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल करने में सुविधा मिल सकती है। लखनऊ में महिला बैंक कर्मचारियों की भी सक्रिय भागीदारी लखनऊ के हजरतगंज इलाके में हुए प्रदर्शन की एक खास बात यह रही कि महिला बैंक कर्मचारी भी बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल हुईं। उन्होंने अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने एकजुटता का संदेश दिया। उनका कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र में कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को लंबे समय से उठाया जाता रहा है और इन्हें केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। महिला कर्मचारियों की भागीदारी यह भी दिखाती है कि बैंक यूनियनों की मांगों को लेकर कर्मचारियों के अलग-अलग वर्गों में आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर संगठन की ओर से तय कार्यक्रम के तहत आंदोलन जारी रखने की बात कही। ग्राहकों को हो सकती है परेशानी बैंक हड़ताल का सबसे ज्यादा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जिन्हें बैंक शाखा में जाकर जरूरी काम पूरा करना था। महीने के दौरान कई ऐसे काम होते हैं जिनके लिए ग्राहक को बैंक की शाखा जाना पड़ता है। इनमें कैश से जुड़े काम, चेक जमा करना, कुछ दस्तावेजी प्रक्रियाएं और बैंक कर्मचारियों से आमने-सामने संपर्क की जरूरत वाले कार्य शामिल हैं। ऐसे में हड़ताल के दिन ग्राहकों को वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ सकता है। डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए स्थिति अपेक्षाकृत आसान हो सकती है, लेकिन जिन लोगों को शाखा आधारित सेवाओं की जरूरत है, उन्हें हड़ताल समाप्त होने के बाद बैंक जाना पड़ सकता है। बैंक कर्मचारियों की हड़ताल का असर अलग-अलग शहरों और बैंकों में अलग स्तर पर दिखाई दे सकता है। कुछ जगहों पर कर्मचारियों के प्रदर्शन अधिक बड़े स्तर पर हो सकते हैं, जबकि कहीं केवल सीमित संख्या में कर्मचारी विरोध दर्ज करा सकते हैं। आंदोलन लंबा चला तो बढ़ सकती है मुश्किल फिलहाल एक दिन की हड़ताल के कारण बैंकिंग कामकाज पर असर पड़ने की बात सामने आ रही है। लेकिन यदि कर्मचारियों और संबंधित पक्षों के बीच मांगों को लेकर सहमति नहीं बनती है और आगे प्रस्तावित तीन दिवसीय या अनिश्चितकालीन हड़ताल होती है, तो इसका प्रभाव ज्यादा व्यापक हो सकता है। बैंकिंग सेक्टर देश की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बैंक शाखाओं के जरिए रोजाना बड़ी संख्या में लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियां होती हैं। ऐसे में लगातार कई दिनों तक शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहने पर ग्राहकों के साथ-साथ

नागपुर के SBI में दिनदहाड़े लूट से हड़कंप, बैंककर्मियों पर फेंका लाल मिर्च पाउडर; 4.53 लाख रुपये लेकर भागा आरोपी पकड़ा गया

नागपुर, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के नागपुर में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक शाखा में हुई लूट की घटना से इलाके में सनसनी फैल गई। जानकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति बैंक में पहुंचा और कथित तौर पर बैंककर्मियों को निशाना बनाते हुए उन पर लाल मिर्च का पाउडर फेंक दिया। अचानक हुई इस घटना से बैंक के अंदर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बताया जा रहा है कि आरोपी ने बैंक कर्मचारियों की आंखों में मिर्च पाउडर डालने के बाद मौके का फायदा उठाया और करीब 4.53 लाख रुपये की नकदी लेकर वहां से फरार हो गया। कुछ ही समय में घटना की जानकारी पुलिस तक पहुंची, जिसके बाद इलाके में आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आसपास के इलाकों में छानबीन शुरू की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुलिस की सक्रियता के चलते आरोपी को ज्यादा देर तक भागने का मौका नहीं मिला और उसे कुछ समय बाद ही पकड़ लिया गया। पकड़े गए आरोपी की पहचान सूरज बोरकर के रूप में बताई जा रही है। घटना के बाद पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वारदात की पूरी योजना किस तरह बनाई गई थी और क्या आरोपी ने पहले से बैंक की गतिविधियों पर नजर रखी थी। पुलिस घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। बैंक में इस तरह अचानक हुई लूट की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। बैंक के भीतर मौजूद कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच वारदात के दौरान काफी घबराहट की स्थिति रही। हालांकि आरोपी के जल्द पकड़े जाने से पुलिस को मामले की जांच आगे बढ़ाने में मदद मिली है। फिलहाल पुलिस द्वारा आरोपी से पूछताछ और लूट की रकम की बरामदगी समेत मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर और वारदात के पीछे की वजह स्पष्ट हो सकेगी।

महोबा में किसानों से वसूली के आरोप पर विधायक का सख्त रुख, सर्वेयरों को पहनाई जूतों की माला

महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में किसानों से फसल सर्वे के नाम पर कथित वसूली का मामला सामने आने के बाद चरखारी विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत का सख्त रुख देखने को मिला। आरोप है कि कुछ सर्वेयर किसानों से फसल सर्वे के नाम पर पैसे की मांग कर रहे थे। मामले की जानकारी मिलने के बाद विधायक ने कथित तौर पर मौके पर मौजूद ग्रामीणों को कार्रवाई के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि विधायक ने वीडियो कॉल के जरिए ग्रामीणों से बातचीत की और किसानों से कथित वसूली करने वाले सर्वेयरों के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। इसके बाद ग्रामीणों ने आरोपित सर्वेयरों को कथित तौर पर पेटीकोट पहनाकर और जूतों की माला डालकर गांव में जुलूस निकाला। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला चर्चा में आ गया। वीडियो में विधायक किसानों से जुड़े मामले को लेकर सख्त तेवर में नजर आते हैं। हालांकि, वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना अभी बाकी है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि संबंधित सर्वेयरों के खिलाफ प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की गई है। विधायक बृजभूषण राजपूत इससे पहले भी अपने बेबाक और आक्रामक राजनीतिक अंदाज को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। उनके बारे में पूर्व में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के काफिले को रोककर अपनी बात रखने का मामला भी चर्चा में रहा है। फसल सर्वे के दौरान किसानों से पैसे लिए जाने के आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे सरकारी योजनाओं और किसानों तक पहुंचने वाली राहत व्यवस्था पर सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं, पूरे मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद क्षेत्र में यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। किसानों का कहना है कि फसल सर्वे जैसी सरकारी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली नहीं होनी चाहिए और शिकायत मिलने पर प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

GDP के आंकड़ों पर सरकार का जोर, बाजार में नुकसान से निवेशकों की बढ़ी चिंता; विपक्ष ने उठाए सवाल

देश की अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार की ओर से लगातार सकारात्मक आंकड़े पेश किए जा रहे हैं। GDP में बढ़ोतरी को आर्थिक मजबूती और विकास की रफ्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, दूसरी ओर शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों को हो रहे नुकसान ने आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। ऐसे में अब यह सवाल उठने लगा है कि आर्थिक विकास के बड़े आंकड़ों का सीधा फायदा आम आदमी की जेब तक कितना पहुंच रहा है। शेयर बाजार में निवेश करने वाले छोटे और मध्यम निवेशकों के लिए बाजार की गिरावट किसी आंकड़े से ज्यादा उनकी वास्तविक बचत से जुड़ी होती है। बाजार में कमजोरी आने पर कई लोगों के निवेश का मूल्य घट जाता है। ऐसे समय में निवेशकों के बीच यह चिंता रहती है कि उनकी मेहनत से जुटाई गई पूंजी सुरक्षित रहेगी या नहीं। इसी मुद्दे को लेकर सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि GDP की तेज वृद्धि निश्चित तौर पर अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती है, लेकिन विकास का सही आकलन तभी किया जा सकता है जब उसका असर रोजगार, आय, महंगाई, बचत और आम लोगों की जीवनशैली पर भी दिखाई दे। दूसरी तरफ सरकार के समर्थकों का तर्क है कि GDP में वृद्धि देश की आर्थिक क्षमता और उत्पादन में विस्तार का महत्वपूर्ण संकेत है। उनके मुताबिक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव एक अलग आर्थिक प्रक्रिया है और इसे अकेले देश की आर्थिक स्थिति का पैमाना नहीं माना जा सकता। इस पूरे मुद्दे के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आर्थिक विकास के आंकड़ों और आम नागरिक की आर्थिक स्थिति के बीच कितना अंतर है। क्या GDP की मजबूती के साथ आम परिवार की आय और बचत भी मजबूत हो रही है? क्या निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए पर्याप्त जागरूकता और सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है? फिलहाल GDP के आंकड़ों और शेयर बाजार की स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। सरकार जहां आर्थिक प्रगति को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है, वहीं विपक्ष और आलोचक आम लोगों की जेब और निवेशकों के नुकसान को मुद्दा बना रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि आर्थिक विकास का लाभ देश के आम नागरिक तक कितनी मजबूती से पहुंचता है।

गोंडा में विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर सियासत तेज, न्याय की मांग पर मंत्री संजय निषाद धरने पर

गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा में विनोद साहनी की हत्या का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। हत्या के बाद परिवार की सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। इसी बीच पुलिस की कार्यशैली और आरोपियों को कथित संरक्षण दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले को लेकर मंत्री संजय निषाद के धरने पर बैठने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। उनका कहना है कि विनोद साहनी के परिवार को न्याय मिलना चाहिए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी जरूरी है। इस घटनाक्रम ने सरकार और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष और PDA से जुड़े नेताओं की ओर से इस घटना को सामाजिक न्याय और राजनीतिक हिस्सेदारी के मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में जातीय पक्षपात और ‘ठाकुरवाद’ जैसे आरोप पहले भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में गोंडा की घटना को लेकर भी सत्ता में भागीदारी और सभी वर्गों को समान न्याय मिलने के दावों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। राजनीतिक तौर पर यह तर्क भी सामने आ रहा है कि किसी समुदाय के प्रतिनिधि को सत्ता में पद मिल जाना और जमीनी स्तर पर उसे बराबरी का सम्मान एवं न्याय मिलना दो अलग-अलग बातें हैं। यदि किसी पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए सत्ता पक्ष से जुड़े नेता को भी अपनी ही सरकार के सामने आवाज उठानी पड़े, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है। विनोद साहनी हत्याकांड में अब मांग की जा रही है कि मृतक के परिवार को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए, आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो और पुलिस की भूमिका की भी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। मामले में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या संरक्षण की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठ रही है। फिलहाल पूरे प्रकरण में निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद बनी हुई है।

BRICS Summit में शामिल होने भारत पहुंचे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS के 18वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंच गए हैं। उनके भारत पहुंचने पर नई दिल्ली एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया। पुतिन की इस यात्रा को भारत और रूस के बीच रिश्तों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत दौरे के दौरान रूसी राष्ट्रपति की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात होगी। दोनों नेताओं के बीच भारत और रूस के आपसी संबंधों को लेकर अहम बातचीत होने की उम्मीद है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। राष्ट्रपति पुतिन अपने दौरे के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लेंगे। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और अन्य आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं और दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हैं। वहीं, BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होगी। वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते हालात जैसे विषयों पर भी नेताओं के बीच विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक स्तर पर कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें रहेंगी। इस यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों और बातचीत से भारत-रूस संबंधों को आगे बढ़ाने के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। BRICS सम्मेलन के साथ-साथ दोनों देशों के बीच होने वाली द्विपक्षीय बातचीत इस दौरे को और खास बना रही है।