नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन ने बढ़त मिलने के बाद छात्रों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि छात्रों ने जिस भरोसे के साथ उनका समर्थन किया, उससे उन्हें बेहद खुशी महसूस हो रही है। शोकीन के मुताबिक, उनके चुनाव अभियान में छात्रों की भूमिका सबसे अहम रही और विद्यार्थियों ने खुद आगे बढ़कर उनके लिए प्रचार किया।
दीपांशु शोकीन ने कहा कि चुनाव के दौरान उनका मुख्य उद्देश्य खुद को छात्रों के वास्तविक प्रतिनिधि के तौर पर साबित करना था। उन्होंने कहा कि वे जिस लड़ाई को लेकर चुनाव मैदान में उतरे थे, उसमें छात्रों की समस्याओं और उनकी आवाज को प्रमुखता देना सबसे महत्वपूर्ण था। उनके अनुसार, चुनाव के दौरान छात्रों का लगातार समर्थन इस बात का संकेत है कि उनकी बातों और मुद्दों को विद्यार्थियों के बीच जगह मिली।
उन्होंने अपने चुनाव अभियान के दौरान नंगे पैर चलने के अनुभव का भी जिक्र किया। शोकीन ने कहा कि यह शारीरिक असुविधा उनके लिए लगातार एक याद दिलाने वाली बात रही कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले करीब डेढ़ लाख छात्रों को भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसी अनुभव ने उन्हें छात्रों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए काम करने का संकल्प मजबूत किया।
दीपांशु शोकीन ने कहा कि चुनाव के दौरान छात्रों से किए गए वादों और उनके सामने मौजूद समस्याओं को वे आगे भी प्राथमिकता देंगे। उनका कहना है कि DUSU को ऐसा मंच बनाया जाना चाहिए जहां विद्यार्थियों की समस्याएं मजबूती से उठाई जा सकें और छात्रों को अपनी बात रखने का प्रभावी अवसर मिले।
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में उनकी कोशिश छात्रों की आवाज को विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने की होगी। साथ ही उन्होंने एक ऐसे DUSU की बात कही, जिसमें कामकाज को लेकर जवाबदेही और छात्रों के प्रति जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से दिखाई दे।