नेपाल में भारी बारिश से बागमती नदी उफान पर, कई हाईवे बंद

काठमांडू: नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हो गया है। राजधानी काठमांडू से होकर गुजरने वाली बागमती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद नदी कई जगहों पर अपने किनारों से बाहर निकल गई है। इससे नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लगातार बारिश के चलते बागमती नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की अपील की जा रही है। स्थानीय स्तर पर जलस्तर और बारिश की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। भारी बारिश का असर नेपाल के सड़क परिवहन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कई प्रमुख राजमार्गों पर भूस्खलन की घटनाओं के कारण यातायात बाधित हो गया है। काठमांडू को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाले पृथ्वी हाईवे, बीपी हाईवे और कांती लोकपथ जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर कई जगह आवाजाही रुक गई है। सड़कें बंद होने के कारण लंबी दूरी की बसों और अन्य परिवहन वाहनों को रास्ते में ही रुकना पड़ा है। कई वाहन सड़क किनारे खड़े दिखाई दे रहे हैं, जिससे यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भूस्खलन के कारण मार्गों पर मलबा जमा होने से यातायात सामान्य करने में भी चुनौती सामने आ रही है। नेपाल में मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और नदियों के जलस्तर बढ़ने की घटनाएं सामने आती रही हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और सड़क या नदी किनारे जाने से पहले स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों की जानकारी जरूर लें। मौसम में सुधार और प्रभावित मार्गों से मलबा हटाए जाने के बाद ही यातायात पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन, मुंबई से आंदोलन शुरू करने की तैयारी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देश में एक नए आंदोलन की तैयारी की जा रही है। CJP की ओर से 2 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन आयोजित करने की तारीख तय किए जाने की बात सामने आई है। इस बार आंदोलन का केंद्र केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहने वाला है। आयोजकों के मुताबिक, देशव्यापी अभियान की शुरुआत मुंबई से करने की तैयारी है और अभिजीत दीपके इसके नेतृत्व में आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। आयोजकों का कहना है कि यह अभियान लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों को जनता के बीच ले जाने के उद्देश्य से चलाया जाएगा। अभिजीत दीपके ने लोगों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस मुहिम से जुड़ने की अपील की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। इस आंदोलन को देश के अलग-अलग शहरों तक पहुंचाने की योजना बताई जा रही है। आयोजकों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य विभिन्न स्थानों पर लोगों से संवाद करना और चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा को आगे बढ़ाना है। हालांकि, इस प्रस्तावित आंदोलन का स्वरूप, विभिन्न शहरों में कार्यक्रम और स्थानीय स्तर पर इसकी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी आयोजकों की ओर से सामने आना अभी बाकी है। अभिजीत दीपके ने इस अभियान की तुलना महात्मा गांधी के आंदोलनों से करते हुए लोगों का ध्यान देशव्यापी जनभागीदारी की ओर आकर्षित किया है। दांडी मार्च ऐतिहासिक रूप से अहम जनआंदोलन रहा था। अब प्रस्तावित अभियान के जरिए अलग-अलग शहरों में लोगों को जोड़ने की बात कही जा रही है। 2 अक्टूबर को होने वाले इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी नजरें टिकी हैं। CJP की ओर से उठाई जा रही मांगों और चुनाव आयोग से जुड़े विवादों के बीच यह आंदोलन सार्वजनिक बहस का एक और मंच बन सकता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इस अभियान को कितना समर्थन मिलता है और आयोजक इसे किस स्वरूप में आगे बढ़ाते हैं।
चुनाव आयोग के फैसले पर उठे सवाल, पूर्व कानून मंत्री अश्वनी कुमार ने जताई चिंता

नई दिल्ली: चुनाव आयोग से जुड़े हालिया विवाद के बीच पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्वनी कुमार ने आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया और असहमति के सम्मान को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से यह कहा गया है कि असहमति और विचार-विमर्श किसी भी संस्थागत प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा हैं। हालांकि, सार्वजनिक स्तर पर उठ रही आपत्तियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अश्वनी कुमार के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के किसी निर्णय को लेकर यह सवाल उठाया गया है कि क्या उसमें आयोग के अन्य दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों पर पर्याप्त विचार किया गया। उन्होंने कहा कि जब सभी चुनाव आयुक्तों को समान शक्तियां प्राप्त हैं, ऐसे में निर्णय प्रक्रिया में सामने आने वाली असहमति को लेकर पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। पूर्व कानून मंत्री ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने लोगों के बीच गंभीर शंकाएं पैदा की हैं। उनके अनुसार, चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता केवल उसके फैसलों से नहीं, बल्कि उन फैसलों तक पहुंचने की प्रक्रिया से भी जुड़ी होती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनावों की निगरानी, निर्देशन और नियंत्रण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। आयोग की भूमिका को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में आयोग के भीतर होने वाले विचार-विमर्श, असहमति और अंतिम निर्णय की प्रक्रिया सार्वजनिक चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है। अश्वनी कुमार की टिप्पणी इसी व्यापक बहस की ओर इशारा करती है कि संवैधानिक संस्थाओं में निर्णय लेते समय सभी संबंधित पक्षों की राय किस तरह दर्ज और विचारित की जाती है। उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक दलों तथा नागरिक समाज के विभिन्न वर्गों में चर्चा जारी है। हालांकि, किसी भी आरोप या आपत्ति के अंतिम निष्कर्ष के लिए संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और तथ्यों को देखना जरूरी होगा। चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता, संस्थागत संवाद और निर्णय लेने की स्पष्ट प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी संदर्भ में अश्वनी कुमार ने उठाए गए सवालों को गंभीरता से देखने की जरूरत बताई है।
ECI नियुक्ति कानून पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, जस्टिस दीपांकर दत्ता ने उठाए अहम सवाल

नई दिल्ली: चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और उसकी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई ने एक बार फिर चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता और जनता के भरोसे से जुड़े सवालों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए सिर्फ चुनाव आयोग का स्वतंत्र होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका स्वतंत्र दिखाई देना भी जरूरी है। मामला 2023 में बनाए गए उस कानून से जुड़ा है, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति का प्रावधान किया गया है। इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय अंतरिम व्यवस्था में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल थे। जस्टिस दत्ता ने चयन समिति की संरचना को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा नामित मंत्री से अपने ही नामितकर्ता के खिलाफ खड़े होने की अपेक्षा करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकता है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में विपक्ष के नेता की भूमिका प्रभावी संतुलन बनाने के बजाय सीमित हो सकती है। हालांकि, ये टिप्पणियां प्रथमदृष्टया विचार हैं और मामले पर अंतिम संवैधानिक फैसला अभी बाकी है। जस्टिस दत्ता ने यह भी रेखांकित किया कि चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता केवल नियुक्त किए जाने वाले व्यक्तियों की व्यक्तिगत ईमानदारी या योग्यता का विषय नहीं है। महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया आम लोगों को कितनी निष्पक्ष और स्वतंत्र नजर आती है। यही भरोसा चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता का अहम हिस्सा माना जाता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ की राय अलग-अलग रही। जस्टिस दत्ता ने जहां मौजूदा पीठ में ही मामले को तय करने की बात कही, वहीं जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने इसे बड़ी संविधान पीठ के सामने भेजने के पक्ष में राय दी। इसके बाद मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा गया है, जो उचित संख्या वाली संविधान पीठ के गठन पर निर्णय करेंगे। ऐसे में आगे की सुनवाई में यह सवाल महत्वपूर्ण रहेगा कि 2023 के कानून के तहत बनी नियुक्ति व्यवस्था संविधान में निहित चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के मानकों पर कितनी खरी उतरती है। फिलहाल अदालत की टिप्पणियां इस व्यापक बहस को सामने लाती हैं कि चुनावी संस्था की स्वतंत्रता के साथ-साथ उसकी निष्पक्षता पर जनता का विश्वास भी मजबूत रहना चाहिए।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर घटा, एयर शो से पहले घाटों की सफाई तेज

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर अब चेतावनी के निशान से नीचे आ गया है। पानी कम होने के बाद शहर के कई घाटों पर बड़ी मात्रा में गाद जमा हो गई है। आगामी 22, 23 और 25 अक्टूबर को नमो घाट पर प्रस्तावित एयर शो को देखते हुए नगर निगम ने घाटों की साफ-सफाई और गाद हटाने का काम तेज कर दिया है। जलस्तर में कमी आने के साथ ही घाटों की सीढ़ियों और आसपास के हिस्सों में जमा मिट्टी और गाद साफ करने की जरूरत बढ़ गई है। नगर निगम की टीमों को सफाई अभियान में लगाया गया है, ताकि कार्यक्रम से पहले नमो घाट और आसपास का क्षेत्र व्यवस्थित और साफ-सुथरा दिखाई दे। बताया जा रहा है कि एयर शो को लेकर नमो घाट पर तैयारियां पहले से ही चल रही हैं। बड़ी संख्या में लोगों के कार्यक्रम में पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन का जोर घाटों की स्वच्छता, सुरक्षा और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर है। गाद हटाने के साथ-साथ घाटों के आसपास जमा कचरे की सफाई भी की जा रही है। गंगा का जलस्तर कम होने के बाद घाटों पर सफाई कार्य के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हुआ है। नगर निगम की कोशिश है कि निर्धारित कार्यक्रमों से पहले सफाई का काम पूरा कर लिया जाए, जिससे आयोजन के दौरान लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। नमो घाट वाराणसी के प्रमुख पर्यटन और सार्वजनिक स्थलों में शामिल है। यहां होने वाले बड़े आयोजनों में स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों की भी मौजूदगी रहती है। ऐसे में एयर शो से पहले घाट की साफ-सफाई और सौंदर्य व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन की ओर से कार्यक्रम को लेकर अन्य तैयारियों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। आने वाले दिनों में नमो घाट और आसपास के क्षेत्रों में व्यवस्थाओं को और बेहतर किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल गंगा का जलस्तर नीचे आने के बाद नगर निगम की प्राथमिकता घाटों पर जमा गाद को जल्द से जल्द हटाकर आयोजन स्थल को तैयार करना है।
यूपी में माफिया के दौर से निवेश के माहौल तक, अमित शाह ने गिनाए योगी सरकार के काम

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता को महत्वपूर्ण बताया। ग्रेटर नोएडा में आयोजित UP International Trade Show 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में कई स्तरों पर बदलाव देखा है और इसका असर निवेश के माहौल पर भी पड़ा है। अमित शाह ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश के पुराने दौर का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय राज्य में माफिया का प्रभाव था। उनके मुताबिक, वर्ष 2017 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने और योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाए। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार ने राज्य में माफिया के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की है, जिससे निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार हुआ है। गृह मंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य में निवेश के लिए केवल आर्थिक नीतियां ही पर्याप्त नहीं होतीं, बल्कि राजनीतिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और नीतियों के लगातार लागू होने का भी असर पड़ता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्थिरता मौजूदा सरकार की पहचान बनी है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार तीन कार्यकाल में जनता का विश्वास हासिल किया है और इस दौरान नीतियां बनाने के साथ-साथ उन्हें जमीन पर लागू करने पर भी जोर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अनुभव के आधार पर मौजूदा नीतियों में बदलाव करती रही है और जरूरत के अनुसार नई नीतियां तैयार की गई हैं। अमित शाह के मुताबिक, इन प्रयासों का उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। ग्रेटर नोएडा में आयोजित व्यापार शो को उत्तर प्रदेश के उद्योग, व्यापार, एमएसएमई और निवेश से जुड़े क्षेत्रों के लिए एक प्रमुख मंच के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे आयोजनों के जरिए राज्य सरकार देश-विदेश के निवेशकों और कारोबारियों को उत्तर प्रदेश में उपलब्ध औद्योगिक अवसरों से परिचित कराने पर जोर दे रही है।
पटना में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, पुलिस ने किया वॉटर कैनन का इस्तेमाल

पटना: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को पटना में जोर पकड़ता नजर आया। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। बिहार कांग्रेस की ओर से आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और नेता शामिल हुए। कार्यकर्ताओं के हाथों में पोस्टर और बैनर नजर आए। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे। कांग्रेस ने चुनाव आयोग के फैसलों और मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर सवाल उठाए हैं। जानकारी के अनुसार, कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशभर में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। बिहार में भी पार्टी ने पटना में मार्च निकालने की घोषणा की थी। इससे पहले बिहार कांग्रेस की ओर से बताया गया था कि प्रदर्शन के तहत आर. ब्लॉक इलाके से राज्य निर्वाचन आयोग की ओर मार्च किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग के जरिए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। जब कार्यकर्ता आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। इससे मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी। कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयोग से जुड़े फैसलों की समीक्षा की मांग की जा रही है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मामलों पर स्पष्टता जरूरी है। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। चुनाव आयोग से जुड़े फैसलों और कथित आंतरिक असहमति को लेकर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं, जबकि इन मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने-अपने दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पटना में हुए इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई के बाद मामला और चर्चा में आ गया है। फिलहाल प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज बनी हुई हैं।
असम में शुरू हुआ ‘नॉर्थ-ईस्ट सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’, 50 समस्याओं के समाधान के लिए युवाओं को मौका

गुवाहाटी: असम सरकार ने राज्य की रोजमर्रा की चुनौतियों के लिए नए और तकनीकी समाधान तलाशने की दिशा में एक नई पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ‘सेवा और संकल्प अभियान’ की भावना के तहत ‘नॉर्थ-ईस्ट सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ लॉन्च करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य देशभर के युवाओं और इनोवेटर्स को असम की स्थानीय समस्याओं से जोड़कर उनके व्यावहारिक समाधान तलाशना है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि इस इनोवेशन चैलेंज के तहत असम सरकार और आम लोगों के सामने आने वाली 50 प्रमुख समस्याओं को रखा गया है। इन समस्याओं में प्रशासन, जनसेवा, तकनीक और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े अलग-अलग मुद्दे शामिल हैं। सरकार चाहती है कि इन चुनौतियों पर देशभर के युवा अपनी सोच, तकनीकी क्षमता और नए आइडिया के साथ समाधान प्रस्तुत करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि समस्याएं भले ही असम से जुड़ी हों, लेकिन उनके समाधान के लिए किसी एक राज्य तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। देश के किसी भी हिस्से से युवा इन चुनौतियों के लिए अपने आइडिया लेकर सामने आ सकते हैं। इससे स्थानीय समस्याओं के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभव और तकनीकी सोच का इस्तेमाल किया जा सकेगा। सरकार की योजना है कि इन 50 समस्याओं में से प्रत्येक के लिए दो या तीन बेहतर आइडिया चुने जाएं। इसके बाद इन विचारों की उपयोगिता और व्यावहारिकता को परखा जाएगा। अगर कोई आइडिया जमीन पर लागू करने लायक पाया जाता है तो उसे वास्तविक समाधान के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। हिमंत बिस्वा सरमा ने इस पहल को असम में पहली बार आयोजित होने वाला एक अनोखा कार्यक्रम बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि देशभर के युवा इस चैलेंज में भाग लेकर अपनी रचनात्मक सोच और इनोवेशन के जरिए असम की समस्याओं के समाधान में योगदान देंगे। इस पहल के जरिए सरकार और युवाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय जरूरतों के लिए नए तकनीकी समाधान विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
बेगूसराय में नवनिर्मित जीविका भवन का लोकार्पण, गिरिराज सिंह के पहनावे पर भी चर्चा

बेगूसराय: जिले के नावकोठी प्रखंड में नवनिर्मित जीविका भवन का लोकार्पण केंद्रीय कपड़ा मंत्री और स्थानीय सांसद गिरिराज सिंह ने बिहार सरकार के मंत्री संजय पासवान की मौजूदगी में किया। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय स्तर पर जीविका से जुड़ी गतिविधियों और ग्रामीण महिलाओं को मिलने वाले अवसरों को लेकर भी चर्चा हुई। जीविका भवन के निर्माण का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और समुदाय आधारित गतिविधियों को बेहतर स्थान उपलब्ध कराना है। ऐसे भवनों के माध्यम से समूहों की बैठक, प्रशिक्षण और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद रहती है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और बिहार सरकार के मंत्री संजय पासवान समेत स्थानीय जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे। लोकार्पण के दौरान क्षेत्र में विकास योजनाओं और ग्रामीण स्तर पर रोजगार एवं आजीविका से जुड़े प्रयासों को लेकर भी बातें सामने आईं। हालांकि कार्यक्रम के दौरान गिरिराज सिंह के पहनावे को लेकर राजनीतिक चर्चा भी देखने को मिली। उन्होंने इस दौरान लोअर और टी-शर्ट पहन रखी थी। उनके इस अंदाज को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे बदलते समय के साथ नेताओं के बदले पहनावे और नए अंदाज के तौर पर देखा, जबकि विपक्षी खेमे की ओर से इसे लेकर तंज भी किए गए। इसी क्रम में एक राजनीतिक टिप्पणी में यह दावा किया गया कि राहुल गांधी के पहनावे की नकल करते हुए गिरिराज सिंह इस उम्र में भी खुद को जवान दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि यह टिप्पणी एक राजनीतिक तंज है और इसे तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं, कार्यक्रम का मुख्य केंद्र नवनिर्मित जीविका भवन का लोकार्पण और ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना रहा। स्थानीय लोगों और जीविका समूहों के लिए इस भवन के जरिए प्रशिक्षण तथा सामुदायिक कार्यक्रमों को बेहतर आधार मिलने की उम्मीद जताई गई।
वोट बैंक की राजनीति से ऊपर सामाजिक सुधार पर जोर, PM मोदी ने BJP कार्यकर्ताओं को दिया सेवा का संदेश

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा यात्रा’ से जुड़े प्रतिभागियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद किया। इस दौरान उन्होंने सामाजिक बदलाव और जनसेवा को राजनीति के केंद्र में रखने की बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं का दायित्व केवल चुनावी गतिविधियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए भी लगातार काम करना जरूरी है। वाराणसी और गुजरात के वडनगर के बीच चल रही ‘सेवा यात्रा’ को सामाजिक जुड़ाव और जनसेवा से जोड़कर देखा जा रहा है। यात्रा के दौरान प्रतिभागी अलग-अलग शहरों, जिलों और गांवों में लोगों से संवाद कर रहे हैं और सेवा से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं। इनमें स्वच्छता अभियान, स्थानीय लोगों से बातचीत तथा स्कूल, अस्पताल और अन्य सामुदायिक स्थानों पर जनसंपर्क जैसी गतिविधियां शामिल हैं। गांधी के सामाजिक सुधार कार्यों का किया उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधी जी ने स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ समाज में मौजूद बुराइयों के खिलाफ भी काम किया। उनके अनुसार राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भी समाज सुधार और सकारात्मक बदलाव को प्राथमिकता देनी चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं को केवल वोट बैंक के नजरिए से समाज को देखने के बजाय लोगों की समस्याओं और जरूरतों को समझने तथा उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने सेवा करने वाले लोगों के सम्मान को भी महत्वपूर्ण बताया। गांवों में बदलाव का भी किया जिक्र प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में शहरों और गांवों के बीच का अंतर कम हुआ है। उनके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ है और गांवों में सुविधाओं का विस्तार देखने को मिला है। उन्होंने महिलाओं के बीच आत्मनिर्भरता बढ़ने की बात भी कही। सेवा यात्रा का उद्देश्य भी युवाओं को जमीनी स्तर पर लोगों से जोड़ना और समाज की वास्तविक परिस्थितियों को करीब से समझने का अवसर देना बताया गया है। यात्रा में शामिल प्रतिभागी विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए स्थानीय समुदायों के साथ संवाद कर रहे हैं। सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर पीएम मोदी ने कहा कि देश के विकास में सरकार के साथ समाज की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने सेवा कार्यों को केवल किसी अभियान तक सीमित रखने के बजाय इसे सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत चल रही यात्राएं 17 सितंबर से शुरू हुई हैं और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 7 अक्टूबर तक जारी रहेंगी। इन यात्राओं का फोकस युवा भागीदारी, जनसंपर्क, सामाजिक सेवा और जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ने पर है।