अशोक सिंघल की सादगी और समर्पण को अमित शाह ने किया याद, बोले- ऐसे व्यक्तित्व बहुत कम देखने को मिलते हैं

नई दिल्ली: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके जीवन और कार्यों को याद किया। समारोह को संबोधित करते हुए शाह ने अशोक सिंघल के व्यक्तित्व को त्याग, सादगी, राष्ट्रभक्ति, धर्मनिष्ठा और संघर्ष जैसे गुणों से जुड़ा बताया। अमित शाह ने कहा कि अशोक सिंघल का जीवन विभिन्न भूमिकाओं में उत्कृष्टता और समर्पण का उदाहरण रहा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन से लेकर स्वयंसेवक और प्रचारक के रूप में काम करने तक उन्होंने हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाया। बाद में विश्व हिंदू परिषद की जिम्मेदारी मिलने के बाद भी उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय तक हिंदुत्व के प्रति समर्पित होकर काम करने का प्रयास किया। शाह ने कहा कि समाज में ऐसे व्यक्तित्व बहुत कम देखने को मिलते हैं, जिनके जीवन में त्याग, सादगी, राष्ट्रभक्ति, धर्मनिष्ठा और संघर्ष जैसे कई गुण एक साथ दिखाई दें। उनके मुताबिक, अशोक सिंघल का जीवन इन्हीं मूल्यों से प्रभावित रहा। जेल के दौरान अशोक सिंघल से मुलाकात का किया जिक्र अमित शाह ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए अशोक सिंघल के साथ हुई मुलाकातों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली में रहने के दौरान उनके लिए एक कठिन दौर आया था और उस समय वे जेल में थे। शाह के अनुसार, उस समय वे विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय में अशोक सिंघल से मिलने जाया करते थे। उन्होंने कार्यालय की सादगी का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 20 वर्ग मीटर के छोटे से स्थान में ही अशोक सिंघल का रसोईघर, बाथरूम और सोने की व्यवस्था थी। शाह ने कहा कि इतने बड़े व्यक्तित्व के जीवन में इतनी सादगी को करीब से अनुभव करना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। अमित शाह के संबोधन में अशोक सिंघल के सार्वजनिक जीवन, संगठन के प्रति उनके समर्पण और व्यक्तिगत सादगी को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। जन्म शताब्दी समारोह के जरिए उनके जीवन और कार्यों को याद किया जा रहा है।
प्रयागराज में चिराग पासवान का बड़ा बयान, 2027 में यूपी चुनाव लड़ेगी LJP (रामविलास)

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान रविवार को प्रयागराज पहुंचे, जहां उन्होंने युवाओं के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक तैयारियों को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। चिराग पासवान ने कहा कि वह अपने युवा साथियों की बात सुनने के लिए प्रयागराज आए हैं। उन्होंने युवाओं को देश की सबसे बड़ी आबादी का हिस्सा बताते हुए कहा कि उनकी समस्याओं और सुझावों को नीति निर्माण में उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि बिहार में युवा आयोग के गठन की दिशा में पहल की गई है और अब राष्ट्रीय स्तर पर भी युवा आयोग के गठन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चिराग पासवान ने कहा कि युवाओं की भागीदारी केवल रोजगार और शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है। इसी सोच के तहत राष्ट्रीय स्तर पर युवा आयोग की पहल को आगे बढ़ाने की बात उन्होंने कही। 2027 के यूपी चुनाव पर भी स्पष्ट किया रुख प्रयागराज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान चिराग पासवान ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भी पार्टी की योजना स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेगी और इसमें कोई संदेह नहीं है। पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई पहले ही चुनावी तैयारियों को लेकर संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाने की जानकारी दे चुकी है। पार्टी के अनुसार, प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों को ध्यान में रखकर संगठनात्मक तैयारी की जा रही है, जबकि 101 सीटों पर विशेष रूप से जिम्मेदारियां तय की गई हैं। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व करेगा। ऐसे में आने वाले समय में सीटों, उम्मीदवारों और संभावित गठबंधन को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। युवाओं के बीच बढ़ेगा संवाद प्रयागराज का कार्यक्रम पार्टी के युवा संवाद अभियान का हिस्सा रहा। पार्टी के मुताबिक आगे वाराणसी, गोरखपुर और लखनऊ समेत अन्य शहरों में भी युवाओं के बीच कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। चिराग पासवान के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश में LJP (रामविलास) की आगामी राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रहेगी। फिलहाल पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव में उतरने की अपनी मंशा सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दी है।
तिलक नगर में सड़क निरीक्षण के दौरान विवाद, थप्पड़ वाले वीडियो पर प्रवेश वर्मा ने दी सफाई

नई दिल्ली: दिल्ली के तिलक नगर में सड़क निरीक्षण के दौरान मंत्री प्रवेश वर्मा और स्थानीय लोगों के बीच विवाद का मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें प्रवेश वर्मा एक युवक का मोबाइल नीचे करते और उसके बाद उसे कथित तौर पर थप्पड़ मारते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी ने मंत्री पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है। मामले पर प्रवेश वर्मा ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा कि वीडियो को एकतरफा तरीके से पेश किया जा रहा है। उनके मुताबिक, विकासपुरी रिंग रोड पर पिछले कई दिनों से सड़क निर्माण का काम चल रहा है और वह खुद निर्माण कार्य की गुणवत्ता का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया कि मौके पर काम संतोषजनक तरीके से चल रहा था और स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि लंबे समय बाद इस सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। प्रवेश वर्मा ने तिलक नगर के AAP विधायक जरनैल सिंह पर गंभीर आरोप भी लगाए। उनका दावा है कि विधायक ने PWD के इंजीनियरों पर ठेकेदार से मुलाकात कराने और कथित कमीशन की व्यवस्था कराने का दबाव बनाया था। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि जब उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो सड़क निर्माण को लेकर सवाल उठाने के लिए रात में बनी सड़क को उखाड़कर उसके वीडियो बनाए गए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। मंत्री के अनुसार, उन्होंने मौके पर पहुंचने के बाद जरनैल सिंह को फोन कर निरीक्षण में शामिल होने के लिए बुलाया और करीब 45 मिनट तक उनका इंतजार किया। उनका कहना है कि बाद में विधायक अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और विवाद की स्थिति बन गई। प्रवेश वर्मा ने कहा कि इसी दौरान उनके परिवार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई, जिसके बाद वह आवेश में आ गए। उन्होंने कहा कि उस परिस्थिति में उन्होंने जो प्रतिक्रिया दी, वह उसी घटनाक्रम का हिस्सा थी। वहीं, आम आदमी पार्टी का आरोप है कि सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाने वाले युवक को मंत्री ने थप्पड़ मारा। घटना के वीडियो के आधार पर पार्टी ने मंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। मामले में शिकायत और संभावित पुलिस कार्रवाई के बाद घटनाक्रम की आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।
मोकामा में खूनी संघर्ष के बाद पीड़ित परिवार से मिले अनंत सिंह के पुत्र, घटना को लेकर इलाके में तनाव

पटना/मोकामा: मोकामा के पंचमहला थाना क्षेत्र में शनिवार को हुए खूनी संघर्ष के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। इस हिंसक घटना में एक महिला की मौत होने और उसके गर्भस्थ शिशु की भी जान जाने की बात सामने आई है। घटना के बाद रविवार को मोकामा विधायक अनंत सिंह के पुत्र पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली। पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान उन्होंने परिजनों से बातचीत की और घटना के संबंध में उनकी बात सुनी। इस दौरान परिवार के सदस्यों ने घटना के बाद की परिस्थितियों और अपनी परेशानियों के बारे में जानकारी दी। मुलाकात के बाद इलाके में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि शनिवार को पंचमहला थाना क्षेत्र में दो पक्षों के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। संघर्ष के दौरान हुई घटना में महिला की मौत हो गई। महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की भी जान चली गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। हिंसा की शुरुआत किस वजह से हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और घटना के दौरान किन परिस्थितियों में महिला की मौत हुई, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी पुलिस सतर्क है। संवेदनशील इलाके में स्थिति पर नजर रखी जा रही है, ताकि किसी तरह की दोबारा अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। अनंत सिंह के पुत्र के पीड़ित परिवार से मिलने को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, घटना के कारणों और जिम्मेदार लोगों को लेकर अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
मोतिहारी के ढाका में पुलिस की कार्रवाई, मो. सेयाज आलम गिरफ्तार

मोतिहारी/ढाका: बिहार के मोतिहारी जिले के ढाका इलाके में पुलिस ने मो. सेयाज आलम नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, उसके मोबाइल फोन की जांच के दौरान कथित आतंकी गतिविधियों से संबंधित कुछ वीडियो और तस्वीरें बरामद हुई हैं। पुलिस अब इस डिजिटल सामग्री के स्रोत, उसके इस्तेमाल और संभावित संपर्कों की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच में मोबाइल डिवाइस से ऐसी डिजिटल सामग्री मिलने की बात सामने आई है, जिसे सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं। हालांकि, बरामद वीडियो और तस्वीरों का वास्तविक संदर्भ क्या है तथा उनका किसी संगठित गतिविधि या नेटवर्क से सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। मामले में पुलिस डिजिटल संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गिरफ्तार व्यक्ति किन लोगों के संपर्क में था और मोबाइल के जरिए किस तरह की बातचीत या सामग्री का आदान-प्रदान हुआ। संभावित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ कर मामले से जुड़े अन्य तथ्यों को जुटाने में लगी है। डिजिटल उपकरणों से प्राप्त जानकारी की तकनीकी जांच भी की जा सकती है, ताकि कथित सामग्री के स्रोत और उसके प्रसार से संबंधित जानकारी सामने आ सके। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और मामले में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने बरामद डिजिटल सामग्री और कथित संपर्कों को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और पुलिस की आगे की रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
तिलक नगर में सड़क की गुणवत्ता को लेकर विवाद, केजरीवाल ने मंत्री पर युवक को थप्पड़ मारने का आरोप

नई दिल्ली: दिल्ली के तिलक नगर इलाके में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि इलाके में बनाई गई सड़क की गुणवत्ता बेहद खराब है और स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद निरीक्षण के दौरान एक युवक के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। केजरीवाल ने दावा किया कि तिलक नगर में भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार के कार्यकाल में सड़क का निर्माण कराया गया था। उनके मुताबिक, सड़क की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि स्थानीय लोग उसे हाथ से उखाड़कर दिखा सकते थे। इसी मुद्दे को लेकर जब स्थानीय लोगों ने संबंधित मंत्री के सामने सड़क की स्थिति रखी, तो वहां विवाद की स्थिति पैदा हो गई। AAP नेता केजरीवाल का आरोप है कि सड़क की खराब गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए जाने के दौरान एक युवक पूरे घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग कर रहा था। उनके अनुसार, मंत्री ने कथित तौर पर अपना आपा खो दिया और रिकॉर्डिंग कर रहे युवक को थप्पड़ मार दिया। केजरीवाल ने इस घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और काम की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद तिलक नगर जाकर सड़क का निरीक्षण करेंगे और मौके पर स्थिति को देखेंगे। हालांकि, युवक को थप्पड़ मारे जाने और सड़क की गुणवत्ता से जुड़े आरोपों को लेकर संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी। इस विवाद के बीच सड़क निर्माण की गुणवत्ता, सरकारी कामों की निगरानी और स्थानीय लोगों की शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि सड़क की गुणवत्ता की जांच में क्या सामने आता है और कथित थप्पड़ कांड पर संबंधित पक्ष की ओर से क्या प्रतिक्रिया दी जाती है।
सासाराम में 5 नवंबर को होगा मौर्य शक्ति का चौथा मौर्य महासम्मेलन

सासाराम, 27 सितंबर 2026। मौर्य शक्ति रोहतास की एक महत्वपूर्ण बैठक सासाराम स्थित राज वाटिका वेदा में आयोजित की गई। बैठक में संगठन के पदाधिकारियों और प्रमुख सदस्यों ने आगामी कार्यक्रमों को लेकर विस्तार से चर्चा की। बैठक में मौर्य शक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि मौर्य मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। बैठक के दौरान रवि मौर्य ने बताया कि संगठन का चौथा मौर्य महासम्मेलन आगामी 5 नवंबर को सासाराम की धरती पर आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन को सफल बनाने के लिए संगठन स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय और उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को महासम्मेलन के दौरान सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ताओं एवं समाज के प्रमुख लोगों को भी आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम की तैयारियों के लिए मौर्य शक्ति के पदाधिकारी लगातार जनसंपर्क अभियान चलाएंगे। इस दौरान लोगों से संवाद कर उन्हें महासम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। बैठक में कुशवाहा बोर्ड के गठन की मांग को भी प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया गया। संगठन की ओर से कहा गया कि मध्य प्रदेश और राजस्थान की तर्ज पर बिहार में भी कुशवाहा बोर्ड के गठन की मांग को महासम्मेलन के मंच से मजबूती के साथ रखा जाएगा। बैठक की अध्यक्षता गोरखनाथ मौर्य ने की, जबकि संचालन नीरज कुशवाहा ने किया। इस अवसर पर अजय कुशवाहा, डॉ. संतोष मौर्य, मनजी कुशवाहा, संजय मौर्य, जितेंद्र कुशवाहा, अमरेंद्र कुशवाहा, पंकज मौर्य, सुषमा कुशवाहा, धनंजय कुशवाहा, अधिवक्ता राम सुरेश सिंह, प्रोफेसर शशि भूषण मौर्य, मुन्ना कुशवाहा, सुनील कुशवाहा, श्याम नारायण मेहता, भोले शंकर मौर्य, रमाशंकर कुशवाहा, गोपाल कुशवाहा, डॉ. हीरालाल सिंह, शशि भूषण सिंह, डॉ. शिवाजी सिंह, बबलू मेहता, सुशील कुशवाहा, सुनील मौर्य, अजीत मेहता, राम इकबाल सिंह, डॉ. केके सिंह, दीनानाथ कुशवाहा और अश्विनी कुशवाहा सहित कई लोग उपस्थित रहे।
बिहार SIR: मतदाता सूची की जांच में 22 लाख से अधिक मृतकों के नाम मिले, CM सम्राट चौधरी का दावा

पटना, बिहार: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जांच प्रक्रिया के दौरान सामने आए आंकड़ों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री के अनुसार, मतदाता सूची की जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए, जिनकी पात्रता या वर्तमान स्थिति को लेकर रिकॉर्ड में बदलाव की जरूरत थी। सम्राट चौधरी ने बताया कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान करीब 22 लाख 34 हजार ऐसे नाम मिले, जिनसे जुड़े मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी। इसके अलावा करीब 36 लाख 28 हजार ऐसे लोगों के नाम भी सामने आए, जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके थे। मुख्यमंत्री के मुताबिक, जांच में करीब 7 लाख ऐसे नाम भी मिले, जो एक से अधिक जगहों पर मतदाता के रूप में दर्ज थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्यापन के बाद ऐसे नामों को मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया पूरी की गई। सरकार की ओर से इसे मतदाता सूची को अधिक व्यवस्थित और अद्यतन बनाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। SIR के दौरान मतदाता सूची में दर्ज नामों और संबंधित विवरणों के सत्यापन को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस भी देखने को मिली है। विपक्षी दलों की ओर से प्रक्रिया के अलग-अलग पहलुओं पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े पक्षों का कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना और गलत या पुराने रिकॉर्ड को दुरुस्त करना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ताजा बयान के बाद एक बार फिर बिहार की मतदाता सूची में हुए बदलावों और SIR प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस प्रक्रिया के अंतिम प्रभाव को समझने के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सत्यापन और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम शामिल रहते हैं और कितने नाम बाहर किए जाते हैं।
दिशा सालियान केस में सुरक्षा को लेकर निलेश ओझा का बड़ा दावा

ठाणे: दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में CBI की ओर से FIR दर्ज किए जाने के बाद अब गवाहों और मामले से जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान के वकील निलेश ओझा ने दावा किया है कि FIR दर्ज होने के तुरंत बाद चार लोगों के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए पत्र दिया गया था। इनमें सतीश सालियान, गवाह समीर वानखेड़े, स्वयं निलेश ओझा और आशुतोष पाठक के नाम शामिल बताए गए हैं। ओझा के अनुसार, पत्र में केंद्रीय गृह मंत्रालय और नारकोटिक्स ब्यूरो से संबंधित रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कई गंभीर आरोपों की जांच की मांग की गई थी। उन्होंने दावा किया कि मामले में आदित्य ठाकरे समेत कई हाई-प्रोफाइल लोगों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच जरूरी है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने तक नहीं मानी जा सकती। CBI ने सितंबर 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज की थी। FIR में कथित गैंगरेप, हत्या, साजिश, सबूत मिटाने और मामले को दबाने जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, FIR में कई लोगों के नामों का उल्लेख उनकी कथित भूमिका की जांच के संदर्भ में किया गया है, लेकिन नाम दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। निलेश ओझा ने यह भी आरोप लगाया कि मामले से जुड़े लोगों को Witness Protection Scheme और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत सुरक्षा मिलनी चाहिए थी। उनका कहना है कि सुरक्षा नहीं मिलने के बाद उन्होंने उपलब्ध सामग्री और दस्तावेज CBI को सौंपे और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की। मामले में अब CBI की जांच आगे बढ़ रही है। ऐसे में जांच एजेंसी द्वारा जुटाए जा रहे साक्ष्य और आगे की कानूनी कार्रवाई से ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी। दूसरी ओर, आदित्य ठाकरे ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उन्होंने दिशा सालियान से कभी मुलाकात नहीं की और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को उन्होंने राजनीतिक एवं चरित्रहनन की कोशिश बताया है।
सोशल मीडिया पर बढ़ती मौजूदगी के बीच सवाल—क्या खान सर की नजर बिहार की राजनीति पर है?

पटना। बिहार में शिक्षा के क्षेत्र से अपनी अलग पहचान बनाने वाले खान सर इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी कोचिंग या छात्रों से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में उनकी सक्रियता और सोशल मीडिया पर तेजी से सामने आ रहे उनके वीडियो हैं। हाल के दिनों में खान सर को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य करते हुए देखा गया है। उनके कई वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल भी हुए हैं। इसी के साथ सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या खान सर की लोकप्रियता को भविष्य में किसी राजनीतिक भूमिका की दिशा में ले जाने की कोशिश हो रही है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स इन वीडियो को जनसेवा की गतिविधि मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि लगातार वीडियो और रील के जरिए ऐसी गतिविधियों को सामने लाने के पीछे कोई रणनीतिक PR प्रयास तो नहीं है। हालांकि, खान सर या उनकी टीम की ओर से ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य राजनीतिक लॉन्चिंग या मुख्यमंत्री पद की तैयारी है। सोशल मीडिया पर PR को लेकर चल रही चर्चा फिलहाल दावों और प्रतिक्रियाओं तक ही सीमित है। खान सर की लोकप्रियता का दायरा भी बड़ा है। वे लंबे समय से शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए जाने जाते हैं और उनके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की बड़ी डिजिटल पहुंच है। उनकी गतिविधियों में शिक्षा के अलावा स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़े प्रयास भी शामिल रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या खान सर के मन में भविष्य में राजनीति में आने या मुख्यमंत्री बनने जैसी कोई महत्वाकांक्षा है? इसका जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं है। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में ऐसा कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला है जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री पद की अपनी इच्छा घोषित की हो। एक दूसरा सवाल भी अक्सर उठता है—क्या दूसरे राज्य से आने वाला व्यक्ति बिहार का मुख्यमंत्री बन सकता है? संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार मुख्यमंत्री बनने के लिए किसी व्यक्ति का बिहार का मूल निवासी होना अनिवार्य नहीं है। राज्य विधानमंडल की सदस्यता के लिए भारतीय नागरिक होना और निर्धारित संवैधानिक योग्यताएं पूरी करना जरूरी है। विधानसभा सदस्य बनने के लिए न्यूनतम उम्र 25 वर्ष है। इसलिए खान सर के मामले में असली सवाल उनका मूल स्थान नहीं, बल्कि यह होगा कि क्या वे भविष्य में सक्रिय राजनीति में प्रवेश करते हैं, चुनाव लड़ते हैं और विधानसभा में बहुमत हासिल करने वाली राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री बनने की चर्चा को राजनीतिक अटकल के रूप में ही देखा जा सकता है।