पटना। बिहार में शिक्षा के क्षेत्र से अपनी अलग पहचान बनाने वाले खान सर इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी कोचिंग या छात्रों से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में उनकी सक्रियता और सोशल मीडिया पर तेजी से सामने आ रहे उनके वीडियो हैं। हाल के दिनों में खान सर को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य करते हुए देखा गया है। उनके कई वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल भी हुए हैं।
इसी के साथ सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या खान सर की लोकप्रियता को भविष्य में किसी राजनीतिक भूमिका की दिशा में ले जाने की कोशिश हो रही है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स इन वीडियो को जनसेवा की गतिविधि मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि लगातार वीडियो और रील के जरिए ऐसी गतिविधियों को सामने लाने के पीछे कोई रणनीतिक PR प्रयास तो नहीं है। हालांकि, खान सर या उनकी टीम की ओर से ऐसा कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य राजनीतिक लॉन्चिंग या मुख्यमंत्री पद की तैयारी है। सोशल मीडिया पर PR को लेकर चल रही चर्चा फिलहाल दावों और प्रतिक्रियाओं तक ही सीमित है।
खान सर की लोकप्रियता का दायरा भी बड़ा है। वे लंबे समय से शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए जाने जाते हैं और उनके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की बड़ी डिजिटल पहुंच है। उनकी गतिविधियों में शिक्षा के अलावा स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़े प्रयास भी शामिल रहे हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या खान सर के मन में भविष्य में राजनीति में आने या मुख्यमंत्री बनने जैसी कोई महत्वाकांक्षा है? इसका जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं है। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में ऐसा कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला है जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री पद की अपनी इच्छा घोषित की हो।
एक दूसरा सवाल भी अक्सर उठता है—क्या दूसरे राज्य से आने वाला व्यक्ति बिहार का मुख्यमंत्री बन सकता है? संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार मुख्यमंत्री बनने के लिए किसी व्यक्ति का बिहार का मूल निवासी होना अनिवार्य नहीं है। राज्य विधानमंडल की सदस्यता के लिए भारतीय नागरिक होना और निर्धारित संवैधानिक योग्यताएं पूरी करना जरूरी है। विधानसभा सदस्य बनने के लिए न्यूनतम उम्र 25 वर्ष है।
इसलिए खान सर के मामले में असली सवाल उनका मूल स्थान नहीं, बल्कि यह होगा कि क्या वे भविष्य में सक्रिय राजनीति में प्रवेश करते हैं, चुनाव लड़ते हैं और विधानसभा में बहुमत हासिल करने वाली राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री बनने की चर्चा को राजनीतिक अटकल के रूप में ही देखा जा सकता है।